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Lok Sabha Election 2019: आयोग ने नेताओं से ही जांच कराई, पाई हरी झंडी

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): जांच में पाया गया कि जिन मशीनों के बारे में शिकायत की गई, वे रिजर्व मशीनें थीं। मतदान में इनका इस्तेमाल नहीं किया गया था। मतदान के दौरान ईवीएम में तकनीकी खराबी होने पर रिजर्व मशीनों से बदला जाता है।

ईवीएम मशीन (फाइल फोटो)

Lok Sabha Election 2019: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को मतगणना स्थल तक पहुंचाने में गड़बड़ी और दुरुपयोग की शिकायतों को लेकर राजनीति दलों के बड़े नेता आरोप लगाते रहे। दूसरी ओर, चुनाव क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर काम देख रहे स्थानीय नेता चुनाव आयोग की प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए दस्तावेज पर दस्तखत करते रहे। चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश और बिहार समेत विभिन्न राज्यों से सोशल मीडिया पर आरोपों पर संज्ञान लेते हुए जांच कराई और उम्मीदवारों के मुख्य चुनाव एजंटों को पूरी प्रक्रिया समझाई। चुनाव आयोग ने जांच प्रक्रिया के दस्तावेज तैयार किए हैं।

चुनाव आयोग की अधिकारी शेफाली शरण के मुताबिक, सोशल मीडिया पर जहां-जहां से शिकायतें आईं, उन चुनाव क्षेत्रों में मशीनों को मतगणना केंद्रों तक ले जाने और रखरखाव में गड़बड़ी की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए संबद्ध राज्यों के जिला चुनाव अधिकारियों से तत्काल जांच रिपोर्ट मंगाई गई। जांच में पाया गया कि जिन मशीनों के बारे में शिकायत की गई, वे रिजर्व मशीनें थीं। मतदान में इनका इस्तेमाल नहीं किया गया था। मतदान के दौरान ईवीएम में तकनीकी खराबी होने पर रिजर्व मशीनों से बदला जाता है।

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, चंदौली, डुमरियागंज और झांसी एवं बिहार की सारण सीट पर मतदान के बाद ईवीएम के दुरुपयोग की शिकायतों पर कार्रवाई की। अधिकारियों के मुताबिक, मतदान में इस्तेमाल की गई ईवीएम और वीवीपैट को व्यवस्थित रूप से सील करने के बाद मतगणना केंद्रों पर बने स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में सुरक्षित रखा गया है। इन जगहों पर केंद्रीय बल के जवान तैनात हैं। स्ट्रांग रूम को उम्मीदवार और उनके निर्धारित प्रतिनिधि कभी भी देख सकते हैं। चुनाव आयोग ने जो दस्तावेज तैयार कराए, उनके मुताबिक अलग-अलग जगहों पर गलतफहमी हुई। स्थानीय नेताओं को प्रक्रिया समझा दी गई तो उन्होंने संतुष्टि जताई।

यूपी के गाजीपुर के जंगीपुर में स्ट्रांग रूम के बाहर महागठबंधन उम्मीदवार अफजाल अंसारी ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ धरना दिया। वे लोग मशीनों की निगरानी की मांग कर रहे थे। गाजीपुर के डीएम के बालाजी ने समूचे प्रकरण पर चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि व्यवस्था के तहत हर उम्मीदवार अपने प्रतिनिधियों को स्ट्रांग रूम की निगरानी के लिए तैनात कर सकता है। इसका हवाला देकर अंसारी की ओर से पहले पांच प्रतिनिधि, फिर तीन और बाद में दो प्रतिनिधियों को आठ घंटे की शिफ्ट में तैनात करने की मांग की गई। अंसारी से एक प्रतिनिधि ही रखने के लिए कहा गया, जिसे समझाने के बाद वे मान गए।

यूपी के चंदौली में सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र की रिजर्व ईवीएम को स्थानीय मंडी समिति में रखने की मांग पर गठबंधन और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। यहां विधायक प्रभुनारायण यादव समेत तमाम नेता धरने पर बैठ गए। विवाद के बाद मशीनों को कलेक्ट्रेट में रख दिया गया। विवाद पर चुनाव आयोग ने सफाई दी है। चंदौली के जिलाधिकारी की रिपोर्ट है कि रिजर्व मशीनों को रखने के दौरान कोई अनियमितता नहीं बरती गई और पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया। ईवीएम की सुरक्षा पर अब सपा के जिलाध्यक्ष भी संतुष्ट हैं।

यूपी के झांसी में रिजर्व और खराब ईवीएम को लेकर विवाद हो गया। विपक्षी दलों का आरोप था कि ईवीएम को बदला जा रहा है। चुनाव आयोग ने कहा कि झांसी में ईवीएम को पूरी सुरक्षा में प्रोटोकॉल का पालन करते हुए राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की मौजूदगी में रखा गया है। अब यह मुद्दा सुलझ गया है। झांसी में शिकायतकर्ताओं को ईवीएम को चेक करके दिखाया भी गया। सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों के सामने पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए मशीनें सील की गईं। इनका वीडियो बनाया गया।

राजद की नेता राबड़ी देवी ने सारण की कुछ तस्वीरें ट्वीट कर आरोप लगाया कि देशभर के स्ट्रांग रूम के आसपास ईवीएम की बरामदगी हो रही है। ट्रकोंं और निजी वाहनों में ईवीएम पकड़ी जा रही है। ये कहां से आ रही है, कहां जा रही है कब, क्यों, कौन और किसलिए इन्हें ले जा रहा है। क्या यह पूर्व निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है चुनाव आयोग को अतिशीघ्र स्पष्ट करना चाहिए। इसके बाद आयोग के निर्देश पर जांच कराई गई। राजद के नेताओं ने स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी में स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया और संतुष्टि जताते हुए आयोग के नाम अनापत्ति पत्र जारी किया। पत्र पर राजद उम्मीदवार चंद्रिका राय के चुनाव एजंट प्रोफेसर लालबाबू यादव के दस्तखत हैं।

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