Lok Sabha Election 2019: नोटबंदी और जीएसटी ने जमकर किया परेशान, फिर भी खुश हैं अलीगढ़-आगरा-मथुरा के कारोबारी

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): टीम जनसत्ता अपनी बाइक रैली के तहत अलीगढ़, हाथरस, आगरा, फतेहपुर सीकरी और मथुरा के कारोबारियों से मिली। उनसे मोदी सरकार के 5 साल के काम-काज का लेखा-जोखा मांगा गया।

ग्राउंड रिपोर्टः नोटबंदी-जीएसटी पर क्या कहते हैं यूपी के कारोबारी?

Lok Sabha Election 2019 का बिगुल पूरे देश में बज चुका है और पहले चरण के मतदान संपन्न हो चुके हैं। अब बारी है दूसरे चरण के मतदान की, जो 18 अप्रैल को होने हैं। ऐसे में टीम जनसत्ता अपनी बाइक रैली के तहत अलीगढ़, हाथरस, आगरा, फतेहपुर सीकरी और मथुरा के कारोबारियों से मिली। उनसे मोदी सरकार के 5 साल के काम-काज का लेखा-जोखा मांगा गया और पूछा गया कि वे इस सरकार से कितने खुश हैं और कितने नाराज?

जीएसटी-नोटबंदी ने बड़ा दुख दीन्हा : टीम जनसत्ता ने पांचों शहरों के कारोबारियों से सबसे पहले एक ही सवाल पूछा कि मोदी सरकार के काम से वे कितने खुश हैं? व्यापारी वर्ग ने एक ही जवाब दिया कि पिछली सरकार ने जैसा काम किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। हालांकि, सरकार के कुछ फैसलों ने खासा परेशान भी किया, जिनमें नोटबंदी और जीएसटी जैसे कड़े कदम भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों फैसलों को लागू करने से पहले काफी प्लानिंग की जरूरत थी, जो नहीं की गई। इसका खमियाजा कारोबारियों को भुगतना पड़ा और वे काफी परेशान हुए। हालांकि, अब जीएसटी से कोई दिक्कत नहीं है।

National Hindi News, 15 April 2019 LIVE Updates: सिर्फ एक क्लिक से पढ़ें दिनभर की खबरें

अब सेट है जीएसटी : हाथरस की गल्ला मंडी के आढ़ती राजेश वार्ष्णेय कहते हैं कि जीएसटी एक अच्छा फैसला है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका बिल्कुल गलत था। टैक्स फाइलिंग का सिस्टम इतना जटिल था कि कुछ कारोबारी काफी समय तक परेशान रहे। यहां तक कि टैक्स अधिकारियों को भी इसके बारे में पूरी तरह से जानकारी नहीं थी, जिसके चलते कई बार टैक्स नहीं भर पाते थे और पेनाल्टी देनी पड़ती थी। हालांकि, अब सब कुछ सेट हो चुका है।

कड़वी दवा जरूरी थी : आगरा के लोहा कारोबारी नरेश कुमार सिंघल का मानना है कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसले लेने जरूरी थे। यह एक कड़वी दवा की तरह हैं, जिनसे अब फायदा नजर आ रहा है। नोटबंदी से कालाधन और नकली करंसी जैसी दिक्कतें दूर हो गईं। अब नकली नोट की समस्याएं सामने नहीं आती हैं। वहीं, जीएसटी के दायरे में आने के बाद वे कारोबारी भी टैक्स देने लगे हैं, जो इससे बचे रहते थे। मोदी सरकार के ये दोनों फैसले मास्टरस्ट्रोक हैं, जो पिछली सरकारें लाने से डरती रहीं।

विदेशों में बढ़ा सम्मान : अलीगढ़ के कारोबारी विपिन अग्रवाल के मुताबिक, जीएसटी लगने के बाद दिक्कतें जरूर हुई थीं, लेकिन कारोबारियों को यह एहसास हो चुका है कि यह फैसला देशहित में लिया गया। अलीगढ़ का कोई भी कारोबारी देशहित में लिए गए इस फैसले से नाराज नहीं है, क्योंकि अगर देश को मजबूत करना है तो कड़े कदम जरूर उठाने होंगे। फिलहाल शहर के कारोबारी पीएम मोदी को एक मौका और देने का मन बना चुके हैं, लेकिन नतीजा क्या रहता है, यह तो 23 मई को ही पता चलेगा।

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