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मालेगांव ब्लास्ट के तुरंत बाद हेमंत करकरे ने निकाल लिया था साध्वी प्रज्ञा का कनेक्शन, एक महीने में कर लिया था गिरफ्तार

घटना के महीने भर के अंदर करकरे की अगुवाई में एटीएस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए 23 अक्टूबर, 2008 को प्रज्ञा ठाकुर के तौर पर पहली गिरफ्तारी की थी।

Author April 20, 2019 9:57 PM
भोपाल से भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा। (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस।)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से चुनावी मैदान में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भाजपा ने उतारा है। 26/11 के मुंबई आतंकी हमले में शहीद हुए एटीएस चीफ हेमंत करकरे पर विवादित बयान की वजह से वो सुर्खियों में हैं। प्रज्ञा साल 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए आतंकी धमाकों में आरोपी हैं। जब सरकार ने मालेगांव ब्लास्ट की जांच की जिम्मेदारी एटीएस (आतंक निरोधी दस्ता) को सौंपी थी तब हेमंत करकरे उसके चीफ थे। तब घटना के तुरंत बाद एटीएस ने इस घटना से साध्वी प्रज्ञा के कनेक्शन जोड़ लिए थे। एटीएस के मुताबिक, 29 सितंबर, 2008 को जिस बाइक में आईईडी ब्लास्ट किए गए थे वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की पूर्व सदस्य प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाम रजिस्टर था।

घटना के महीने भर के अंदर करकरे की अगुवाई में एटीएस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए 23 अक्टूबर, 2008 को प्रज्ञा ठाकुर के तौर पर पहली गिरफ्तारी की थी। ठाकुर से पूछताछ के बाद एटीएस ने सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत दस अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था। अभी इस मामले की जांच चल ही रही थी कि उसी साल 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा मुंबई पर किए गए आतंकी हमले में आतंकियों से लोहा लेते हुए एटीएस चीफ हेमंत करकरे कामा हॉस्पिटल के पास शहीद हो गए । करकरे की शहीदत के बाद एटीएस ने जनवरी 2009 में मालेगांव ब्लास्ट केस में साध्वी प्रज्ञा समेत कुल 11 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर किया।

मालेगांव विस्फोट की अपनी जांच से पहले, करकरे ने जून 2008 में ठाणे और नवी मुंबई के सिनेमाघरों में हुए विस्फोटों की भी जांच की थी। इस मामले में हिंदुत्व समूह से जुड़े दो लोगों को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी पाया गया था और साल 2011 में उन्हें दस साल कैद की सजा सुनाई गई थी। 2016 में मामले की जांच करते हुए एनआईए ने एटीएस की जांच में कई खामियां निकालीं और कोर्ट से साध्वी प्रज्ञा को डिस्चार्ज करने का अनुरोध किया लेकिन कोर्ट ने ऐसा करने से मना कर दिया और कहा कि विस्फोट से जुड़े मामले में प्रथम दृष्टया सबूत उनके खिलाफ हैं और उनकी भूमिका संदेह से परे नहीं है। बाद में बीमारी की वजह से एनआईए कोर्ट ने साल 2017 में प्रज्ञा को जमानत पर छोड़ दिया। प्रज्ञा आरोप लगाती रही हैं कि हेमंत करकरे की अगुवाई में एटीएस ने उन्हें बहुत यातनाएं दीं।

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