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Lok Sabha Election 2019: कोलकाता में 4 सीटों पर TMC-BJP के बीच निर्णायक जंग, मिली-जुली आबादी के वोट रखेंगे खास मायने

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): पश्चिम बंगाल में अंतिम चरण में 9 सीटों पर मतदान होगा। इन सीटों की मिली-जुली आबादी का किस ओर झुकाव होगा, यह जानना दिलचस्प होगा। इन सभी सीटों पर हर पार्टी अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही है। पर, यह भी सच है कि असली लड़ाई तृणमूल और बीजेपी के बीच ही है।

पीएम नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। फोटो सोर्स : इंडियन एक्सप्रेस

Lok Sabha Election 2019: चुनावी दौर में बंगाल सुर्खियों में है। इस बार चुनाव प्रचार में तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। दोनों ने एक-दूसरे को छोटा साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब तक हुए मतदान के दौरान साम-दाम-दंड-भेद सबका उपयोग किया गया है। आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लगी है। क्या प्रधानमंत्री, क्या मुख्यमंत्री, किसी ने किसी बख्शा नहीं। अब अंतिम चरण के मतदान के लिए चुनाव प्रचार खत्म हो गया है। इसके बावजूद निगाहें बंगाल पर हैं। यहां अंतिम चरण में 9 सीटों पर मतदान होने हैं। ये सीटें, उत्तर कोलकाता, दक्षिण कोलकाता, यादवपुर, डायमंड हार्बर, मथुरापुर, जयनगर, दमदम, बारासात एवं बसीरहाट हैं। इनमें चार सीटें उत्तर कोलकाता, दक्षिण कोलकाता, यादवपुर एवं दमदम की सीटें कोलकाता और उससे सटी हुई हैं। इन्हें वृहत्तर कोलकाता भी कहा जा सकता है। यहां की मिली-जुली आबादी का किस ओर झुकाव होगा, यह जानना दिलचस्प होगा। इन सभी सीटों पर हर पार्टी अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही है। पर, यह भी सच है कि असली लड़ाई तृणमूल और बीजेपी के बीच ही है।

उत्तर कोलकाता: उत्तर कोलकाता में सबसे ज्यादा फाइट देखने को मिल रही है। यहां चार बार सांसद और चार बार विधायक रह चुके सुदीप बंद्योपाध्याय तृणमूल कांग्रेस से उम्मीदवार हैं। चिट फंड मामले में जेल की सजा काट चुके सुदीप बंद्योपाध्याय किसी भी हाल में इस सीट को अपने हाथ से फिसलने नहीं देना चाहते हैं। यहां पर बीजेपी का वोट बैंक लगातार बढ़ा है। पिछले लोकसभा चुनाव में तृणमूल को 35.94%, बीजेपी को 25.88% और 35 साल तक बंगाल में राज करनेवाले लेफ्ट को 20.5% वोट मिला था। दूसरी ओर बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा यहां लगातार जीत के लिए प्रयास कर रहे हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वे सुदीप बंद्योपाध्याय से 96,226 वोटों से हार गए थे। हालांकि, वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल की स्मिता बक्शी मात्र 6000 वोटों से आगे थीं। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी वोटर हैं, जिनका वोट बीजेपी के खाते में जाने की संभावना है। इसलिए तृणमूल ने यहां के 10 वार्डों में जमकर जोर लगाया है। ये स्थान बड़ाबाजार का पोस्ता, जोड़ाबागान, नीमतला, जोड़ासांकों हैं। यहां मैदान में सीपीएम से कनीनिका बसु और कांग्रेस से सैयद शाहिद इमाम भी हैं। दोनों का अपना-अपना वोट बैंक है। वर्ष 2009 के पहले यह सीट सीपीएम के कब्जे में थी। वहीं, कांग्रेस भी यहां कुछ हद तक पकड़ है। यहां तृणमूल और बीजेपी दोनों अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं।

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दक्षिण कोलकाता: दक्षिण कोलकाता लोकसभा सीट भी बेहद खास है। लगभग 20 साल से इस क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस ने अपनी जड़ें जमा कर रखी हैं। बीजेपी वंहा पिछले पांच सालों से पांव पसारने की कोशिश कर रही है और बहुत हद तक सफल भी रही है। कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट ममता बनर्जी के दुर्ग का सबसे मजबूत दरवाजा है और बीजेपी ने इसी दुर्ग में ममता को ललकारा है। इस क्षेत्र से ममता बनर्जी छह बार सांसद चुनी गईं। वह इसी लोकसभा की विधानसभा सीट भवानीपुर से ममता बनर्जी फिलहाल विधायक हैं। तृणमूल ने मौजूदा सांसद सुब्रत बख्शी की जगह माला रॉय को यहां से मैदान में उतारा है। बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस की माला रॉय के खिलाफ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस को मैदान में उतारा है। वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव के दौरान चंद्र कुमार बोस भवानीपुर विधानसभा सीट से ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन हार गए थे। कांग्रेस ने मीता चक्रवर्ती को यहां से टिकट दिया है। माकपा से नंदिनी मुखर्जी मैदान में हैं। यहां की सभी सातों विधानसभा सीटों पर तृणमूल का कब्जा है। ऐसे में यहां पर तृणमूल का पलड़ा भले ही भारी हो, लेकिन बीजेपी ने यहां सेंध लगान में सफलता पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में तृणमूल को 36.95%, बीजेपी को 25.28% और लेफ्ट को 23.83% वोट मिला था।

यादवपुर: यादवपुर से दीदी ने अपने सियासी सफर की शुरुआत की थी। 1984 में इसी सीट पर ममता ने अपनी पहली बड़ी और चर्चित जीत दर्ज की थी, जब उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को हराया था। इसके बाद वे दक्षिण कोलकाता सीट से लड़ने लगीं। यादवपुर सीट पर हमेशा सीपीएम और टीएमसी की टक्कर रही है। 2014 में ममता की पार्टी के सुगत बोस ने सीपीएम के सुजन चक्रवर्ती को हराया था। 2009 में भी यह सीट टीएमसी के पास रही। टीएमसी ने इस बार सुगत बॉस का टिकट काटकर अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती को उतारा है। भाजपा ने प्रोफेसर अनुपमा हाजरा को टिकट दिया है। उनके अलावा सीपीएम के विकास रंजन भट्टाचार्य मैदान में हैं। विकास रंजन कोलकाता नगर निगम के मेयर भी रह चुके हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल को 45.92%, बीजेपी को 12.22% और लेफ्ट को 36.08% वोट मिला था। यहां तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट के बीच सीधी टक्कर है। लेकिन, जिस प्रकार बंगाल में बीजेपी का वोट बैंक बढ़ रहा है। ऐसे में पार्टी कड़ी अच्छी टक्कर दे सकती है। यह सीट ममता बनर्जी के नाक का सवाल भी है। इसलिए यहां पर प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

दमदम: दमदम लोकसभा सीट तृणमूल और बीजेपी दोनों के लिए खास है। इस क्षेत्र में बीजेपी कभी जीत हासिल कर चुकी है, तो अभी तृणमूल का दबदबा है। यहां तृणमूल से निवर्तमान सांसद सौगत राय उम्मीदवार हैं। सौगत राय ने पहली बार 2009 में दमदम सीट से जीत हासिल की थी। उन्होंने सीपीएम के अमिताभ नंदी को शिकस्त दी थी। वर्ष 2014 के चुनाव में सौगत रॉय ने दोबारा जीत हासिल की। इस बार उन्होंने सीपीएम के कद्दावर नेता असीम कुमार दासगुप्ता को हराया था। सौगत रॉय एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं। उनके मुकाबले सीपीएम ने नेपालदेव भट्टाचार्य को उतारा है। उधर, बीजेपी उम्मीदवार सामिक भट्टाचार्य भी मुकाबले में हैं। यहां कांग्रेस के सौरव साहा भी ताल ठोंक रहे हैं। इस सीट पर कभी किसी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा। नब्बे के आखिर के दशक में ये सीट बीजेपी के खाते में रही। इस सीट पर कभी सीपीएम तो कभी तृणमूल का कब्जा रहा। दमदम संसदीय क्षेत्र में 7 विधानसभा सीटें आती हैं। यहां की जनसंख्या मिलीजुली है। यहां हिंदीभाषियों की अच्छी खासी तादाद है। पिछले लोकसभा चुनाव में तृणमूल को 42.67%, बीजेपी को 22.5% और लेफ्ट को 28.99% वोट मिला था। इस क्षेत्र में तृणमूल ने प्रचार के दौरान अपनी पूरी शक्ति लगा दी, तो भाजपा के कद्दावर नेताओं ने भी रैली और रोड शो निकालकर प्रचार किया है। (कोलकाता से बिपिन की रिपोर्ट)

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