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Gorakhpur लोकसभा सीट का गुणा-गणितः क्यों इसे अपने लिए ‘सेफ’ सीट समझती रही है बीजेपी

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): बाबा गोरखनाथ की भूमि कहे जाने वाले गोरखपुर में 2019 लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक लड़ाई अब बहुत दिलचस्प हो गई है। लगभग चार दशक तक एकतरफा जीत के बाद पिछले साल महागठबंधन ने बीजेपी से यह सीट छीन ली थी।

Lok Sabha Election 2019 : यहां समझें गोरखपुर सीट का गणित। फोटो सोर्स : जनसत्ता

Lok Sabha Election 2019: बाबा गोरखनाथ की भूमि कहे जाने वाले गोरखपुर में 2019 लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक लड़ाई अब बहुत दिलचस्प हो गई है। लगभग चार दशक तक एकतरफा जीत के बाद पिछले साल महागठबंधन ने बीजेपी से यह सीट छीन ली थी। यानी मंदिर से निर्धारित वाली बीजेपी की सुरक्षित सीट अब उतनी ‘सेफ’ नहीं रही। इसका सबसे बड़ा कारण यहां से योगी आदित्यनाथ के दावेदार न होना हो सकता है पर 2019 में इस कमी को पूरा करने के लिए बीजेपी ने उपचुनाव में सपा से जीत हासिल करने वाले प्रवीण निषाद की पार्टी को अपने साथ मिला लिया है। आइए बताते हैं कि आज वीआईपी सीट बन चुके गोरखपुर का पूरा लेखाजोखा…पूर्वांचल में सभी पार्टियों के लिए यह एक अहम सीट क्यों है।

गोरखपुर लोकसभा सीट का इतिहास : आज़ादी के बाद गोरखपुर के सबसे पहले सांसद श्री सिंहासन सिंह जी थे जो कि देवरिया के रहने वाले थे, वे तीन बार सांसद रहे। गोरखनाथ मठ का सदा से गोरखपुर की राजनीति में काफी प्रभाव रहा है। गोरखनाथ मठ के श्री महंत दिग्विजयनाथ राजनीति में आये और यहीं से गोरखनाथ मठ का राजनीति प्रभाव इस सीट पर बढ़ता चला गया। महंत दिग्विजयनाथ पहली बार 1967 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज किए। 1969 में उनकी मृत्यु के बाद ये सीट पुनः मठ के महंत अवेद्यनाथ के पास चली गई। 1971 के लोकसभा चुनाव में मंदिर अपनी पकड़ नहीं बना सका और सीट कांग्रेस के नरसिंह नारायण पांडेय जी के खाते में चली गई। कभी कांग्रेस कभी भरतीय लोक दल को ये सीट मिलती रही। लेकिन नौवीं लोकसभा 1989-90) में गोरखपुर लोकसभा सीट की लड़ाई एकतरफा हो गई और मन्दिर का राजनीतिक प्रभाव फिर से तेज हो गया। 1989 से 1998 तक महंथ अवेद्यनाथ गोरखपुर के सांसद रहे। उनके बाद उनके शिष्य व वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक सफर प्रारंभ हुआ। पहली बार सन 1998-99 मे वे बारहवीं लोकसभा के सबसे कम उम्र के सांसद के रूप में यहां से चुने गए और सन 2017 तक वे यहाँ के सांसद रहे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हे ये सीट खाली करनी पड़ी।

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क्यों अहम है गोरखपुर? : गोरखपुर न सिर्फ वीआईपी सीट है बल्कि पूर्वांचल को साधने वाली सीट में से एक है। इसलिए सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए इस सीट की अहमियत कुछ ज्यादा ही है। कहा जाता है कि ठीक बनारस की तरह अगर गोरखपुर सीट किसी पार्टी ने साध ली तो आसपास की कम से कम पांच सीटों पर इसका सकारात्मक ही असर पड़ता है। खासकर यहां से पहली बार योगी आदित्यनाथ सीएम बने हैं। उनके सीएम बनने के बाद गोरखपुर में कई सारी परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। एम्स और फर्टलाइजर जैसे कार्यों के सहारे बीजेपी फिर से खोई सीट हासलि करने की कोशिश में है।

उपचुनाव ने बीजेपी को दिखाया था आईना : लगभग 27 साल बाद 2017-18 में गोरखपुर लोकसभा सीट का समीकरण इस कदर बदला जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। वर्तमान सांसद श्री प्रवीण निषाद ने भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र दत्त शुक्ल को उपचुनाव में हराया। जीत का अंतर महज लगभग 21000 था, परंतु ये सबको आश्चर्यचकित करने वाला परिणाम था। लोगों में एक धारणा बन गई थी कि गोरखपुर लोकसभा सीट भाजपा के लिए सबसे सुरक्षित सीटों मे से एक है, लेकिन इस उपचुनाव ने इस धारणा को बदलने का कार्य किया। और यहा से गोरखपुर की जातिवादी राजनीति का असर दिखना प्रारंभ हुआ। निषाद पार्टी के श्री प्रवीण निषाद को सपा बसपा और कांग्रेस तीनो का समर्थन हासिल था। यहा महागठबंधन का एक नमूना भी दिखा। यहीं से सपा-बसपा महागठबंधन की नींव पड़ी थी। लेकिन अब निषाद पार्टी बीजेपी के साथ राजग में है, ऐसे यहां बड़ा वोटबैंक समझे जाने वाला निषाद समुदाय संभव है इस बार बीजेपी के साथ जाए। बता दें कि गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत पांच विधानसभा सीट कैम्पियरगंज, पिपराइच, गोरखपुर शहरी, गोरखपुर ग्रामीण, और सहजनवा आती है।

बीजेपी रवि किशन पर चला दांव : योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद बीजेपी को इस सीट पर कोई तगड़ा दावेदार नहीं मिल रहा था। इसलिए बीजेपी ने 2019 में इस सीट से भोजपुरी सिने स्टार रवि किशन के ऊपर दांव चला है। मुख्य रूप से जौनपुर के रहने वाले रवि किशन की पूर्वांचल में तगड़ी पॉपुलरिटी है। हालांकि, 2014 में वो कांग्रेस से चुनाव हार गए थे। ऐसा पहली बार नहीं है जब गोरखपुर सीट पर कोई भोजपुरी स्टार चुनाव लड़ रहा है। 2009 में मनोज तिवारी ने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ ताल ठोंकी थी पर तब वे समादवादी पार्टी में थे। बीजेपी ने गोरखपुर के मौजूदा सांसद प्रवीण निषाद को संतकबीर नगर से टिकट दे दिया है। (गोरखपुर से अविनाश की रिपोर्ट)

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