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यूपी उपचुनाव: सिम्पैथी वोट से होगा बेड़ा पार? बीजेपी ने मृगांका और अवनि सिंह को बनाया उम्मीदवार

बीजेपी ने दोनों ही सीटों पर बहुत ही सोच-समझकर उम्मीदवार उतारे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि दोनों सीटों पर सहानुभूति की लहर काम करेगी और वोटर दिवंगत नेताओं के परिजनों के पक्ष में लामबंद हो सकेंगे।

मृगांका सिंह को भाजपा ने कैराना संसदीय उप चुनाव में टिकट दिया है। (तस्वीर- मृगांका सिंह फेसबुक)

भारतीय जनता पार्टी ने उप चुनावों के लिए पार्टी प्रत्याशियों का एलान कर दिया है। उत्तर प्रदेश की कैराना संसदीय सीट पर होने वाले उप चुनाव के लिए पार्टी ने दिवंगत सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को उम्मीदवार बनाया है जबकि नूरपुर विधान सभा सीट पर दिवंगत विधायक लोकेन्द्र सिंह की पत्नी अवनि सिंह को उम्मीदवार बनाया है। बता दें कैराना संसदीय सीट हुकुम सिंह के निधन से और नूरपुर विधान सभा सीट लोकेंद्र सिंह के निधन से खाली हुई हैं। पार्टी ने झारखंड, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की एक-एक विधान सभा सीटों के लिए भी उम्मीदवारों के नाम का एलान किया है। झारखंड के गोमिया से माधव लाल सिंह, उत्तराखंड के ठराली (सुरक्षित) सीट से मुन्नी देवी और पश्चिम बंगाल के महेशतला से रिटायर्ड आईपीएस अफसर सुजीत घोष को उम्मीदवार बनाया है।

सभी सीटों पर 28 मई को मतदान होना है। इसके लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 10 मई तक नामांकन होंगे। माना जा रहा है कि ये प्रत्याशी 9 और 10 मई को नामांकन दाखिल करेंगे। चुनावी नतीजे 31 मई को आएंगे। उत्तर प्रदेश की दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने गठबंधन किया है। इस गठबंधन के तहत कैराना सीट पर रालोद की तबस्सुम हसन से मृगांका सिंह की टक्कर होगी जबकि नूरपुर सीट पर अवनि सिंह की टक्कर सपा के नईमुल हसन से होगी। नईमुल हसन पहले भी नूरपुर से दो बार 2012 और 2017 में चुनाव लड़ चुके हैं और अवनि सिंह के पति लोकेंद्र सिंह से हार चुके हैं।

बीजेपी ने दोनों ही सीटों पर बहुत ही सोच-समझकर उम्मीदवार उतारे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि दोनों सीटों पर सहानुभूति की लहर काम करेगी और वोटर दिवंगत नेताओं के परिजनों के पक्ष में लामबंद हो सकेंगे। उधर, गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीटों पर उप चुनाव में जीत से गदगद सपा ने फिर से सामाजिक समीकरण के बूते उम्मीदवार उतारे हैं। चुनाव से ऐन पहले सपा ने रालोद से गठबंधन किया है। सपा को पहले से ही बसपा का समर्थन हासिल है। माना जा रहा है कि अब कांग्रेस भी इस गठबंधन को समर्थन दे सकती है।

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