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Kairana Lok Sabha Bypoll Results 2018: जानिए- कैराना में क्‍यों हुई बीजेपी की किरकिरी, खुला लोकसभा में रालोद का खाता

गन्ना और जिन्ना विवाद की वजह से वोटरों का ध्रुवीकरण हुआ जो बीजेपी को उल्टा पड़ गया। मोदी सरकार और योगी सरकार के प्रति जनता में नाराजगी भी एक वजह हो सकती है।

Author Updated: May 31, 2018 5:14 PM
हालिया उप चुनावों में कैराना संसदीय सीट पर रालोद की तबस्सुम हसन की जीत हुई है जबकि नूरपुर विधानसभा सीट पर सपा के नईमुल हसन की जीत हुई है।

10 राज्यों की 11 विधान सभा सीटों और चार लोकसभा सीटों पर हुए उप चुनाव के नतीजों से केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को झटका लगा है। 11 विधानसभा सीटों में से मात्र एक पर बीजेपी की जीत हुई है, जबकि चार लोकसभा में एक पर बीजेपी और एक पर बीजेपी समर्थित उम्मीदवार की जीत हुई है। महाराष्ट्र के पालघर संसदीय सीट पर बीजेपी के राजेंद्र गावित 29 हजार वोटों से जीतने में कामयाब रहे। हालांकि, इसी सीट पर 2014 में बीजेपी को करीब दो लाख के मार्जिन से जीत मिली थी। तब बीजेपी की तरफ से चिंतामन वनागा उम्मीदवार थे। उनके निधन से ही यह सीट खाली हुई थी। नगालैंड लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी समर्थित सत्ताधारी पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) के प्रत्याशी तोखेहो येपथोमी की जीत हुई है। यानी लोकसभा उप चुनावों में बीजेपी चार में से दो पर कब्जा बरकरार रख सकी जबकि पार्टी को दो सीटें गंवानी पड़ी।

देशभर की नजरें उत्तर प्रदेश की कैराना संसदीय और नूरपुर विधान सभा सीट पर टिकी थीं। यहां दोनों सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है। राज्य में लगातार यह दूसरा उप चुनाव है जब बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी है। आलम यह है कि 80 सांसदों वाले उत्तर प्रदेश में अब बीजेपी के केवल 68 सांसद रह गए हैं। तीन सीटें विपक्षी गठबंधन ने छीन ली है। गोरखपुर और फूलपुर सीट सपा ने और कैराना सीट रालोद ने छीन ली है। हालिया उप चुनावों में कैराना संसदीय सीट पर रालोद की तबस्सुम हसन की जीत हुई है जबकि नूरपुर विधानसभा सीट पर सपा के नईमुल हसन की जीत हुई है।

ये दोनों सीटें बीजेपी के पास थीं। कैराना में बीजेपी की हार को विपक्षी एकता के नतीजे के तौर पर देखा जा रहा है। यह सच है कि विपक्षी पार्टियों के एकजुट होने से बीजेपी का सामाजिक समीकरण और वोट बैंक बिगड़ा है लेकिन विपक्षी एकता के अलावा कैराना में तबस्सुम हसन भी जीत का एक कारक रही हैं। वो पहले भी इस सीट की नुमाइंदगी लोकसभा में कर चुकी हैं। इसके अलावा कैराना में दो राजनीतिक घरानों (हुकुम सिंह और हसन परिवार) की राजनीतिक लड़ाई ने भी हार-जीत तय करने में भूमिका निभाई है।  गन्ना और जिन्ना विवाद की वजह से वोटरों का ध्रुवीकरण हुआ जो बीजेपी को उल्टा पड़ गया। मोदी सरकार और योगी सरकार के प्रति जनता में नाराजगी भी एक वजह हो सकती है।

11 विधानसभा सीटों में से सिर्फ एक सीट पर ही बीजेपी को जीत मिली है। यह सीट उत्तराखंड की थराली विधानसभा सीट है। बीजेपी विधायक मगनलाल शाह के निधन से यह सीट खाली हुई थी। बीजेपी ने उनकी जगह मुन्नी देवी को उतारा था। इनके अलावा झारखंड में सत्ताधारी बीजेपी को भी झटका लगा है। वहां दोनों विधानसभा सीट पर विपक्षी जेएमएम ने कब्जा बरकरार रखा है। दोनों सीटों पर विधायकों को दोषी ठहराए जाने से सीटें खाली हुई थीं। पड़ोसी राज्य बिहार में भी सत्ताधारी एनडीए को झटका लगा है। जेडीयू की परंपरागत जोकीहाट सीट को विपक्षी राजद ने झटक लिया है। वहां राजद के शाहनवाज आलम ने करीब 41 हजार मतों से जेडीयू उम्मीदवार को हराया। पंजाब की एक सीट पर कांग्रेस, महाराष्ट्र की पलसू काडेगांव सीट पर कांग्रेस, कर्नाटक की आरआर नगर सीट पर कांग्रेस, मेघालय की अंपाती सीट पर भी कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई है जबकि केरल में चेंगानूर सीट पर सीपीएम, पश्चिम बंगाल की महेशताला सीट पर तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई है।

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