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JDU के पूर्व MLC का दावा- केशव प्रसाद मौर्य ने योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर की बगावत, नरेंद मोदी को माननी पड़ हार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की रेस में केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, यूपी भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा भी शामिल थे।

भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ अब सूबे के अगले मुख्यमंत्री होंगे। योगी आदित्यनाथ को शनिवार को लखनऊ में हुई भाजपा विधायकों की बैठक में विधायक दल का नेता चुना गया। इसके साथ ही यूपी भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा को डिप्टी सीएम होंगे। योगी आदित्यनाथ अपने कैबिनेट के साथ रविवार को पीएम मोदी और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में शपथ लेंगे।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की रेस में केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, यूपी भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा भी शामिल थे। पहले मनोज सिन्हा इस रेस में सबसे आगे थे, लेकिन बाद में आदित्यनाथ का नाम इस रेस में आगे आ गया।

योगी आदित्यनाथ के विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद जदयू के पूर्व एमएलसी प्रेमकुमार मणि ने दावा किया है कि केशव प्रसाद मौर्य ने योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर नरेंद्र मोदी से बगावत कर दी थी। जदयू के पूर्व एमएलसी ने यह दावा अपनी फेसबुक पोस्ट में की है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा है, ‘मुख्यमंत्री चुनाव में राजनीति चली तो केशव मौर्य की। पौराणिक कृष्ण का एक नाम केशव भी है। चंद्रगुप्त मौर्य में जो चंद्रगुप्त है, उसे भी कृष्ण से जोड़ा जाता है। केशव को चुनाव के बाद उम्मीद थी कि उन्हें सीएम बनाया जाएगा। लेकिन पॉलिटिक्स में लॉबी और मीडिया उनके साथ नहीं था। मोदी किसी पपेट को सीएम बनाना चाहते थे। जानकारी मिलने पर केशव गश खा गए। अस्पताल में भर्ती हुए। जान बची तो पुरखों का ख्याल किया होगा। ताल ठोक कर खड़े हो गए। योगी से संपर्क साधा और मोदी के उम्मीदवार के खिलाफ हल्ला बोल दिया। बाजी केशव के हाथ रही। मोदी हार गए।’

यहां देखें प्रेमकुमार मणि की पूरी फेसबुक पोस्ट।

इसके साथ ही प्रेमकुमार मणि ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, ‘ योगी आदित्यनाथ उर्फ़ अजय सिंह उत्तरप्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। कल शपथग्रहण होगा। 11 जनवरी से ही नाना प्रकार के कयास लगाए जा रहे थे। नाम से ज्यादा मुख्यमंत्री के जात की चिंता लोगों को थी। आ गए योगी। लेकिन हमारे यहां योगियों की कौन कहे भगवानों की भी जात होती है। कबीर माथा कूटते रह गए ‘जात न पूछो साधु की’। लेकिन मानता कौन है। आप साधु हों, योगी हों, ईश्वर हों – कुछ भी हों, जात जरुरी है। यहाँ मुर्दे की जात होती है। कायदे से योगी की जात नहीं होनी चाहिए . लेकिन उनके माँ -बाप की जात तो होगी !’

साथ ही पूर्व एमएलसी ने लिखा है, ‘5जनवरी 1972 को गढ़वाल में जन्मे योगी का जन्म नाम अजय सिंह है। साधु की जात नहीं होती। यूपी को एक निर्जात मुख्यमंत्री मिला है। उनकी कट्टरता से लोगों का डरना स्वाभाविक है। प्रेमचंद की एक बात का भरोसा है कि उत्तरदायित्व का ज्ञान बहुधा संकुचित विचारों का उद्धारक होता है।’

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