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स्थानीय मुद्दों संग जातियों की गोलबंदी पर है जोर

भीलवाड़ा एक जमाने में प्रदेश का बड़ा ओद्यौगिक क्षेत्र था और कपड़ा मिलों से लोगों की आजीविका चलती थी। वस्त्र उद्योग पूरी तरह से चरमरा गया है। भीलवाड़ा शहर में ही तीन दिन में एक बार पीने का पानी लोगों को मिल रहा है।

Author April 26, 2019 2:07 AM
जातीय समीकरण के साथ स्थानीय मुद्दे करेंगे बेड़ा पार

राजस्थान की भीलवाड़ा लोकसभा सीट का चुनाव जातियों की गोलबंदी में फंस गया है। चुनाव में स्थानीय समस्याओं के कारण मुद्दे तो खूब हैं पर इलाके में आरएसएस का प्रभाव होने के कारण भाजपा ने पूरा चुनाव नरेंद्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने पर केंद्रित कर दिया है। भाजपा ने एक बार फिर से अपने सांसद सुभाष बहेडिया को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने जिला अध्यक्ष और क्रिकेट संघ की राजनीति करने वाले रामपाल शर्मा को मैदान में उतारा है। भीलावाड़ा संसदीय सीट में कपड़ों की कई बडी इकाइयां हैं और उनमें काम करने वाले मजदूरों के वोटों पर दोनों राजनीतिक दलों की निगाहें लगी हुई हैं। इलाके में पीने के पानी की बडी समस्या है तो साथ में दूरदराज के इलाकों में बिजली ने भी लोगों को परेशान कर रखा है।

भीलवाड़ा संसदीय सीट पर अब तक 9 बार कांग्रेस जीत चुकी है। इस सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री और मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर भी कांग्रेस की तरफ से सांसद रहे हैं। इलाके में पिछले 20 वर्ष से आरएसएस ने अपनी पकड़ मजबूत कर रखी है, इससे भाजपा का प्रभाव बढ़ गया है।

इस सीट से 2009 में पंजाब के मौजूदा राज्यपाल वीपी सिंह ने भी भाजपा की तरफ से चुनाव लड़ा था। इलाके में भाजपा की मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि छह महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने संसदीय क्षेत्र की टाठ में से पांच विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। भीलवाड़ा में पिछले दो लोकसभा चुनाव के नतीजों में 2014 में भाजपा के सुभाष बहेडिया ने प्रदेश के मौजूदा राज्य मंत्री अशोक चांदना को दो लाख से ज्यादा के वोटों के अंतर से हराया था। इससे पहले 2009 के चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी ने पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह को एक लाख वोटों से हराया था। भीलवाड़ा के सरकारी कॉलेज के राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर एसएम गुप्ता का कहना है कि जनता तो दोनों दलों के वादों से ही परेशान है। भीलवाड़ा एक जमाने में प्रदेश का बड़ा ओद्यौगिक क्षेत्र था और कपड़ा मिलों से लोगों की आजीविका चलती थी। वस्त्र उद्योग पूरी तरह से चरमरा गया है। भीलवाड़ा शहर में ही तीन दिन में एक बार पीने का पानी लोगों को मिल रहा है।

पेयजल बड़ी समस्या है उसके समाधान की तरफ किसी भी जनप्रतिनिधि ने कोई ध्यान नहीं दिया। चुनाव में ही इस समस्या के समाधान का वादा दोनों दल करते हैं। गुप्ता का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के उम्मीदवारों की स्थानीय स्तर पर अच्छी पकड़ है पर लोक सभा चुनाव पूरी तरह से राष्ट्रीय मुददों पर ही लड़ा जा रहा है। जनता भी देश के मौजूदा हालातों को देख कर ही अपना फैसला करेगी।

भाजपा के मौजूदा सांसद सुभाष बहेडिया के पास अपने पांच साल के कार्यकाल की कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। इसके बावजूद उनके स्वभाव की सरलता ही यहां लोगों को आकर्षित करती है। बहेडिया का कहना है कि जनता तो एक बार फिर से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना चाहती है। भाजपा का स्थानीय स्तर पर संगठन बहुत ही मजबूत है और उनकी बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक सीधी पहुंच भी है। इलाके में पेयजल को बड़ी समस्या मानते हुए बहेडिया कहते हैं कि इसके समाधान के उच्च स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार ने इस दिशा में काफी प्रयास किए थे और बीसलपुर और चंबल से पानी लाने की योजना भी बनाई गई थी।

कांग्रेस के रामपाल शर्मा का कहना है कि भाजपा की प्रदेश में पांच साल तक सरकार रही पर किसी तरह का कोई काम सांसद नहीं करा पाए। भीलवाड़ा की जनता पूरी तरह से इस बार बदलाव के मूड में है। कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति इस बार कारगर बनाई है। भाजपा सिर्फ भावनात्मक मुददों को उठा कर चुनाव जीतना चाहती है। जनता भाजपा से बेरोजगारी, महंगाई और पानी-बिजली जैसे मुददों पर जवाब मांग रही है जो वह दे नहीं रही है।

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