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लोकसभा चुनाव में विधान सभा चुनाव के पैटर्न पर पड़े वोट तो बीजेपी को बहुमत के आसार नहीं, समझिए समीकरण

अगर सभी राज्यों के पिछले विधानसभा चुनाव का पैटर्न और चुनावी समीकरण दोहराया जाता है तो भाजपा को 2019 में 219 (2014 में 288) सीटें मिल सकती हैं जबकि कांग्रेस को 97 (2014 में 44) सीटें मिल सकती हैं।

Author December 19, 2018 6:14 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

हाल ही में पांच राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम) में विधान सभा चुनाव हुए हैं। जम्मू-कश्मीर में भी चुनाव होने हैं। इन राज्यों समेत 2014 के आम चुनावों के बाद से अब तक देश के लगभग सभी राज्यों में एक-एक बार विधान सभा चुनाव हो चुके हैं। वहां के विधान सभा चुनावों के आंकड़ों और वोटिंग पैटर्न पर गौर करने पर पता चलता है कि अगर पिछले विधान सभा चुनाव जैसा ही वोटिंग पैटर्न रहा तब भी 2019 के आम चुनाव में भाजपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि कांग्रेस की सीटें दोगुनी से भी ज्यादा हो सकती हैं। भाजपा के सहयोगी दलों को भी तगड़ा झटका लग सकता है।

हालांकि, यह स्पष्ट है कि लोकसभा और विधान सभा चुनावों में मतदाताओं का मूड और उनकी प्राथमिकताएं अलग-अलग होती हैं। बावजूद इसके अगर सभी राज्यों के पिछले विधानसभा चुनाव का पैटर्न और चुनावी समीकरण दोहराया जाता है तो अंग्रेजी अखबार ‘लाइव मिंट’ के मुताबिक भाजपा को 2019 में 219 (2014 में 288) सीटें मिल सकती हैं जबकि कांग्रेस को 97 (2014 में 44) सीटें मिल सकती हैं। यहां यह बताना जरूरी है कि पिछले विधान सभा चुनावों में भी कई राज्यों में मोदी मैजिक बेअसर रहा है।

बिहार में साल 2015 में विधान सभा चुनाव हुए थे। तब कहा जा रहा था कि देशभर में मोदी लहर है, बावजूद इसके वहां महागठबंधन की जीत हुई थी। इसमें राजद, जेडीयू और कांग्रेस शामिल थी लेकिन आज जेडीयू महागठबंधन से निकलकर एनडीए गठबंधन में है, जबकि एनडीए से निकलकर हम महागठबंधन में शामिल हो चुकी है। उपेंद्र कुशवाहा और शरद यादव की पार्टी का रुझान भी महागठबंधन की तरफ है। बावजूद इसके 2015 के विधान सभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न पर ही राजद को 12 सीटें मिल सकती हैं जो फिलहाल चार है। जेडीयू को भी आठ सीटें मिल सकती हैं जो फिलहाल 2 है।

दिल्ली में भी 2015 में विधान सभा चुनाव हुए। वहां 70 में से 67 सीटों पर आम आदमी पार्टी की जीत हुई। उसी चुनावी पैटर्न पर आप 2019 में 9 लोकसभा सीटें जीत सकती हैं। इनमें से सात सीटें दिल्ली की हैं। फिलहाल आप के चार सांसद पंजाब से हैं जबकि दिल्ली की सभी सात संसदीय सीटों पर भाजपा का कब्जा है। तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी टीआरएस की विधान सभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद माना जा रहा है कि 2019 में उसकी सीटें 11 से बढ़कर 15 हो सकती हैं। माना जा रहा है कि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी भाजपा की नहीं चलेगी और विधान सभा चुनाव की तरह क्षेत्रीय दलों का कब्जा रहेगा।

आंकड़ों के मुताबिक ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को 38 (2014 में 34), तमिलनाडु की सत्ताधारी एआईएडीएमके को 34 (2014 में 37) नवीन पटनायक की बीजू जनता दल को 21 (2014 में 20), तेलगु देशम पार्टी को 15 और अन्य को 99 सीटें मिल सकती हैं। गौर करने वाली बात है कि तमिलनाडु में जीत दिलाने वाली अब न तो जयललिता हैं और न ही डीएमके के करुणानिधि रहे। उसी तरह आंध्र प्रदेश में टीडीपी अब एनडीए से निकलकर कांग्रेस के साथ आ चुकी है। यानी पिछले विधान सभा चुनाव का पैटर्न यहां भी बदल सकता है।

सबसे बड़ा उथल-पुथल 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में हो सकता है। पिछले विधान सभा चुनाव (2017) के वोटिंग पैटर्न के मुताबिक समाजवादी पार्टी को पांच, जबकि बहुजन समाज पार्टी को तीन सीटें मिल सकती हैं। यह तब की स्थिति है जब दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ी हैं। मौजूदा राजनीतिक समीकरण और माहौल में सपा, बसपा और रालोद एक साथ एक मंच पर आए हैं। ऐसे में इनकी एकजुटता से 2019 में भाजपा की सीटें 219 से भी कम हो सकती हैं क्योंकि तब सपा, बसपा, रालोद की सीटें बढ़ेंगी और भाजपा की कम होंगी। अगर कांग्रेस ने महाराष्ट्र (एनसीपी), कर्नाटक (जेडीएस) में गठबंधन किया तो उसकी सीटें और बढ़ सकती हैं। इसके अलावा अगर कांग्रेस के गठबंधन का दायरा अन्य हिस्सों में बढ़ा तो भाजपा की हार की आशंका और भी बढ़ सकती है।

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