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Election 2019: बुंदेलखंड की इन तीन सीटों पर 1984 के बाद नहीं खुला कांग्रेस का खाता, झांसी में भी सिर्फ 2 बार मिली जीत, जानें इस बार कैसा है हाल?

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड से तीन सीटें ऐसी हैं जहां 1984 के बाद से कांग्रेस को एक भी बार जीत नहीं मिली है। वहीं बुंदेलखंड की चौथी सीट से महज दो बार जीत मिली है।

बुंदेलखंड की तीन सीटों पर 1984 के बाद कांग्रेस को नहीं मिली एक भी जीत, फोटो सोर्स- जनसत्ता

Lok Sabha Election 2019:  2019 लोकसभा चुनावों के 2 चरणों की वोटिंग हो चुकी है। 23 अप्रैल को तीसरे चरण के लिए वोटिंग होनी है। तीसरे चरण में 14 राज्यों की 115 सीटों के साथ उन दो सीटों पर भी वोटिंग होगी, जिन पर चुनाव आयोग ने मतदान टाल दिया था। यानी 23 अप्रैल को कुल 16 राज्यों की 117 सीटों पर वोटिंग होगी। इन 117 सीटों में बुंदेलखंड की चार सीटें भी शामिल हैं। इन चार सीटों में तीन सीटें ऐसी हैं, जिन पर 1984 के बाद कांग्रेस कभी जीत दर्ज नहीं कर पाई।

बुंदेलखंड की चार सीटें: बुंदेलखंड की चार सीटों में बांदा, हमीरपुर, जालौन और झांसी सीट आती हैं। दरअसल बुंदेलखंड में कांग्रेस पिछले 34 साल से  जीत के लिए संघर्ष कर रही है। यहां की चार में से तीन लोकसभा सीटें बांदा, हमीरपुर और जालौन में कांग्रेस 1984 के बाद से जीत नहीं दर्ज कर पाई है। सिर्फ झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट पर 1999 में सुजान सिंह बुंदेला और 2009 में प्रदीप जैन आदित्य कांग्रेस को जीत दिला पाए हैं। ऐसे में अब 2019 में कांग्रेस तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं झांसी-ललितपुर सीट पर कांग्रेस की सहयोगी पार्टी जन अधिकार पार्टी चुनाव लड़ रही है। ऐसे में इन चार सीटों पर इस बार लड़ाई कांग्रेस की साख के लिए है।

जानें क्यो पिछड़ती गई पार्टी: दरअसल क्षेत्रीय दलों की बढ़ोत्तरी के साथ ही कांग्रेस का परंपरागत वोटर कम हुआ है। यही कारण बताया जाता है कि कांग्रेस पिछड़ती गई। वहीं तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में पार्टी ने बुंदेलखंड की चारों सीटों पर बेहतरीन जीत हासिल की थी। लेकिन इसके बाद पार्टी हारती चली गई। हालांकि पार्टी ने कई प्रत्याशियों पर दांव खेला लेकिन सिर्फ हार ही हाथ लगी।

एक सीट पर दो बार कांग्रेस को मिली जीत: दरअसल 1984 के बाद बुंदेलखंड की सिर्फ एक सीट पर कांग्रेस को दो बार जीत हासिल हुई। 1999 में 2 लाख 83 हजार 387 वोटों के साथ सुजान सिंह बुंदेला को जीत मिली थी। वहीं इसके बाद 2009 में प्रदीप जैन आदित्य ने जीत दिलाई। हालांकि 2009 के बाद से ही कांग्रेस एक भी जीत दर्ज नहीं कर पाई है।

1984 से 2014 तक कैसा रहा कांग्रेस का हाल; जालौन-गरोठा:
– 1984 में चौधरी लच्छीराम ने पार्टी को जीत दिलाई थी।
-1989, 1991 और 1996 में कांग्रेस को मिली हार।
-1998 में कांग्रेस की ओर से बेनीबाई, 1999 में रामप्रसाद और 2004 में नाथूराम को मिला चौथा स्थान।
-2009 में डॉ. बाबू रामधीन अहिरवार और 2014 में विजय चौधरी भी चौथे स्थान पर रहे।

1984 से 2014 तक कैसा रहा कांग्रेस का हाल; बांदा- चित्रकूट:
-1984 में भीष्म देव दुबे ने जीत का परचम लहराया।
– 1989 में पार्टी को मिला तीसरा स्थान।
-1991 में महिराज और 1996 में रामेश्वर को मिली हार।
-1999 में पार्टी प्रत्याशी दादाराम को मिला चौथा स्थान।
– 2004 और 2009 में पार्टी नहीं कर पाई कुछ कमाल।
-2014 में विवेक सिंह को करीब 36 हजार वोटों के साथ हार का सामना करना पड़ा।

1984 से 2014 तक कैसा रहा कांग्रेस का हाल; हमीरपुर- महोबा
-1984 में स्वामी प्रसाद ने 1,49,460 वोटों के साथ जीत दर्ज की।
-1989 में स्वामी प्रसाद दूसरे और 1991 में स्वामी प्रसाद तीसरे स्थान पर रहे।
-1999 में राजेन्द्र सिंह को टिकट मिला और वो चौथे नंबर पर रहे।
-2004 में गंगाचरण राजपूत और 2009 में सिद्ध गोपाल साहू भी जीत का ध्वज नहीं लहरा पाए।
-2014 में प्रीतम सिंह लोधी को मिली हार।

1984 से 2014 तक कैसा रहा कांग्रेस का हाल; झांसी-ललितपुर
– 1984 में सुजान सिंह बुंदेला ने जीत का परचम लहराया।
-1989 में सुजान सिंह को हार का स्वाद चखना पड़ा।
– 1991 और 1996 में भी पार्टी को हार का स्वाद चखना पड़ा।
– 1984 के बाद 1999 में सुजान सिंह ने कांग्रेस की जीत दिलाई।
-2004 में फिर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
– 1999 के बाद 2009 में प्रदीप जैन आदित्य ने कांग्रेस को जीत दिलाई।
– 2014 में प्रदीप जैन आदित्य का जादू नहीं चल पाया और वो चौथे नंबर पर रहे।

2019 में कौन हैं मैदान में: बता दें कि इस बार जौलोन-गरौठा से पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी मैदान में हैं। हमीरपुर-महोबा से प्रीतम सिंह लोधी और बांदा-चित्रकूट से बालकुमार पटेल चुनावी मैदान में हैं। वहीं झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सहयोगी पार्टी जन अधिकार पार्टी के शिवचरण कुशवाह मैदान में हैं।

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