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साधु ने की थी यूपी के नए डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के लिए भविष्यवाणी-लाल बत्ती कभी नहीं छोड़ेगी साथ

दिनेश शर्मा लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं और 1988 से यहां एक अलुमिनी भी हैं।

लोकसभा चुनावों में बंपर जीत के बाद भाजपा ने जब सदस्य बनाने का अभियान शुरू किया था तो शर्मा उसके राष्ट्रीय इंचार्ज थे।

योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद यूपी में दो डिप्टी सीएम भी चुने गए हैं। पहले हैं यूपी बीजेपी के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और दूसरे हैं दिनेश शर्मा, जो लखनऊ के मेयर भी हैं। लखनऊ यूनिवर्सिटी में कॉमर्स के प्रोफेसर दिनेश शर्मा वहां के जाने-माने नेता हैं और आरएसएस से भी ताल्लुक रखते हैं। वह दो बार लखनऊ के मेयर चुने जा चुके हैं। पहली बार उन्हें नवंबर 2006 में चुना गया था और वह जुलाई 2012 के चुनावों में भी विजयी रहे थे। शर्मा लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं और 1988 से यहां एक अलुमिनी भी हैं।

शर्मा ने अपना राजनीतिक करियर एबीवीपी के साथ जुड़कर शुरू किया था। वह मेयर बनने से पहले बीजेपी के छात्र संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा के राज्य अध्यक्ष भी रह चुके हैं। साल 2014 में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था और बाद में गुजरात का इंचार्ज बनाया गया। लोकसभा चुनावों में बंपर जीत के बाद भाजपा ने जब सदस्य बनाने का अभियान शुरू किया था तो शर्मा उसके राष्ट्रीय इंचार्ज थे। वह मौजूदा बीजेपी आलाकमान के काफी नजदीकी माने जाते हैं। उन्हीं के न्योते पर पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लखनऊ के एेशबाग में हुई रामलीला में शरीक हुए थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उनको डिप्टी सीएम बनाए जाने का मकसद सरकार को मध्यम वर्ग से जोड़ने के कवायद है। शर्मा के लखनऊ के मुसलमानों के बीच काफी अच्छी छवि है।

‘उनके जैसा कोई नहीं’: लखनऊ नॉर्थ से बीजेपी विधायक नीरज बोरा कहते हैं, उनके पास सबसे बड़ा फायदा यही है कि आपको एेसा एक भी शख्स नहीं मिलेगा, जो उनके खिलाफ बोले। जब मैंने 2012 के मेयर चुनावों में उनके खिलाफ चुनाव लड़ा था, तो वह मुझसे किसी दुश्मन की तरह मुकाबला नहीं कर रहे थे। वह अकसर कहते थे कि मैं उनकी यूनिवर्सिटी के क्लासमेट का छोटा बेटा हूं। इतना ही नहीं जब मैं कांग्रेस का उम्मीदवार था और मुझे बीएसपी और एसपी का भी सपोर्ट था, तब भी वह बड़े अंतर से चुनाव जीते थे। यह उनकी छवि के बारे में बहुत कुछ बताता है।

साधु ने की थी भविष्यवाणी: उनके करीबी दावा करते हैं कि जब वह राजनीति की पिच पर उतरे थे तो एक साधु ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि कभी लालबत्ती नहीं छोड़ पाएंगे । शायद इसी कारण मेयर बनने से पहले वह दो बार राज्यमंत्री का पद संभाल चुके हैं। उनकी छोटी बहन वंदना शर्मा कहती हैं कि वह पार्टी और राजनीति के लिए प्रतिबद्ध हैं और डिप्टी सीएम के पद के काबिल हैं। उनके बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। उनकी छवि हमेशा से साफ रही है।

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