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आप ने नहीं लड़ा जींद उपचुनाव पर खुद को बता रही नंबर दो, कांग्रेस को भी करारा संदेश

कुल 1 लाख 30 हजार 828 वोटों में से 50,556 भाजपा को मिले जबकि कुछ हफ्ते पहले बनी नई पार्टी जेजेपी को 37,631 वोट मिले। कांग्रेस के सुरजेवाला को 22, 740 वोट मिले।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस अघ्यक्ष राहुल गांधी।

हरियाणा के जींद विधान सभा उपचुनाव में भले ही आम आदमी पार्टी (आप) ने अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया हो मगर चुनाव नतीजों में खुद को नंबर दो बता रही है और लगे हाथ कांग्रेस को यह करारा संदेश देने में कामयाब रही है कि अगर भाजपा को हराना है तो उसे वैकल्पिक राजनीति करनी होगी। बता दें कि आप ने जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला को अपना समर्थन दिया था जो 37,600 वोट के साथ नंबर दो पर रहे। हालांकि, भाजपा चुनावी बैतरणी पार करने और विपक्षी दल से ये सीट झटकने में कामयाब रही।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला पार्टी उम्मीदवार थे जो तीसरे स्थान पर रहे। सुरजेवाला कैथल से विधायक हैं और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के काफी करीबी हैं। इस चुनाव पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लिखा है, “जींद उपचुनाव के नतीजों से ये तो साबित हो गया कि हरियाणा में भाजपा को कांग्रेस नही हरा सकती। नया राजनैतिक विकल्प ही भाजपा को उखाड़ कर फेंक सकता है।”

जींद असेंबली उप चुनाव इस साल होने वाले हरियाणा विधान सभा चुनाव के लिए सेमीफाइनल माना जा रहा था लेकिन भाजपा उम्मीदवार कृष्णलाल मिड्ढा की जीत ने भाजपा को संजीवनी दी है क्योंकि हाल के दिनों में हुए तीन राज्यों के विधान सभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद ये माना जाने लगा था कि भाजपा अब कमजोर हो रही है। जींद में त्रिकोणीय मुकाबला होने के साथ-साथ इंडियन नेशनल लोक दल और लोकतांत्रिक सुरक्षा पार्टी ने भी वोट काटकर चुनाव को प्रभावित किया है।

कुल 1 लाख 30 हजार 828 वोटों में से 50,556 भाजपा को मिले जबकि कुछ हफ्ते पहले बनी नई पार्टी जेजेपी को 37,631 वोट मिले। कांग्रेस के सुरजेवाला को 22, 740 वोट मिले। जेजेपी जिस पार्टी से अलग हुई है यानी आईएनएलडी को मात्र 3454 वोट मिले जबकि भाजपा के बागी सांसद राज कुमार सैनी की पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के उम्मीदवार विनोद आसरी को 13,582 वोट मिले। दिलचस्प बात है कि भाजपा उम्मीदवार ने जेजेपी उम्मीदवार से मात्र 12,935 वोट ज्यादा हासिल किए। यानी केजरीवाल की वैकल्पिक राजनीति के फार्मूले के तहत इस सीट पर एलएसपी से हाथ मिला लेने से भाजपा की हार हो सकती थी। ये सीट आईएनएलडी के विधायक हरिचंद मिड्ढा के निधन से खाली हुई थी। उनकी जगह उनके बेटे भाजपा से चुने गए हैं। कृष्णलाल मिड्ढा दो महीने पहले ही आईएनएलडी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।

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