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गुजरात चुनाव 2017 फाइनल ओपिनियन पोल: बीजेपी-कांग्रेस में कांटे की टक्कर, पर फिर से कमल खिलने के आसार!

Gujarat Election, Chunav 2017 Opinion Poll: गुजरात में पहले चरण की वोटिंग में अब सिर्फ चार दिन ही बचे हैं। इस बीच एबीपी न्यूज ने लोकनीति और सीएसडीएस द्वारा किए गए ओपिनियन पोल सर्वे प्रसारित किया है।
Gujarat Election, Chunav 2017 Opinion Poll: गुजरात विधान सभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग 9 दिसंबर को होगी, जबकि दूसरे चरण में 14 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे।

Gujarat Election 2017 Final Opinion Poll: बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी के लिए यह खबर चिंतित करने वाली है। एबीपी के ओपिनियन पोल के मुताबिक गुजरात में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर है। दोनों ही पार्टियों को 43-43 फीसदी वोट मिलने के आसार हैं जबकि अन्य के खाते में 14 फीसदी वोट जाने के आसार हैं। एबीपी न्यूज ने लोकनीति और सीएसडीएस द्वारा किए गए ओपिनियन पोल सर्वे प्रसारित किया है। सर्वे के मुताबिक182 सदस्यों वाले गुजरात विधानसभा में बीजेपी को कुल 91 से 99 सीटें मिलने की उम्मीद है जबकि कांग्रेस की झोली में 78 से 86 सीटें जाती दिख रही हैं। अन्य के खाते में 3 से 7 सीट जाती दिख रही हैं। औसतन बीजेपी को 95, कांग्रेस को 82 और अन्य को 5 सीटें मिलती दिख रही हैं। इस तरह बीजेपी मामूली बहुमत से फिर से गुजरात में सरकार बनाती दिख रही है।

सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सुधारों से गुजरात के व्यापारी खुश नहीं हैं। सर्वे में कहा गया है कि जीएसटी और नोटबंदी से गुजरात के व्यापारी नाराज हैं और अधिकांश व्यापारी कांग्रेस के साथ चले गए हैं। जीएसटी दरों में बदलाव से भी व्यापारी खुश नहीं हुए। सर्वे में कहा गया है कि 40 फीसदी व्यापारी बीजेपी को वोट कर सकते हैं जबकि 43 फीसदी व्यापारी कांग्रेस के साथ जा सकते हैं। पिछले सर्वे के मुकाबले बीजेपी को वोट करने वाले व्यापारियों की संख्या में तीन फीसदी की गिरावट हुई है, जबकि कांग्रेस को इस मामले में चार फीसदी का फायदा होता दिख रहा है।

Gujarat Election 2017 Final Opinion Poll Updates:

– मध्य गुजरात (कुल 40 सीट) के गांवों में भी कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही है। इस इलाके में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर दिख रही है। कांग्रेस को कुल 40 फीसदी वोट मिलने के आसार हैं जबकि बीजेपी को 41 फीसदी वोट मिलने के आसार दिख रहे हैं। बीजेपी को अक्टूबर के सर्वे के मुकाबले 13 फीसदी वोट का नुकसान होता दिख रहा है।

– दक्षिण गुजरात के तहत 35 विधान सभा सीटें आती हैं। यहां भी कांग्रेस को बढ़त मिलता हुआ दिखाई पड़ता है। बीजेपी को कुल 40 फीसदी वोट मिलने के आसार हैं जबकि कांग्रेस को 42 फीसदी वोट मिलने के आसार हैं। अक्टूबर के मुकाबले नवंबर में बीजेपी को कुल 11 फीसदी वोट का नुकसान होता दिख रहा है। कांग्रेस को छोटू वसावा से गठबंधन होने का फायदा कांग्रेस को होता दिख रहा है।

– उत्तर गुजरात की कुल 53 विधान सभा सीटों पर कांग्रेस को बढ़त मिलने के आसार हैं। कांग्रेस को 49 फीसदी वोट जबकि बीजेपी को 45 फीसदी वोट मिलने के आसार हैं।

– सौराष्ट्र-कच्छ की कुल 54 विधान सभा सीटों पर गांवों में कांग्रेस आगे जबकि शहरों में बीजेपी आगे। बीजेपी को पटेल बहुल इस इलाके में 45 फीसदी और कांग्रेस को 39 फीसदी वोट। बीजेपी को 3 फीसदी वोट की बढ़त जबकि कांग्रेस को 3 फीसदी का नुकसान होता दिख रहा है।

– बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा, कांग्रेस नेता अल्पेश ठाकोर की करारी हार होगी और जिग्नेश मेवाणी अपनी जमानत नहीं बचा पाएंगे। उनके मुताबिक चुनावों में हार्दिक पटेल कोई फैक्टर नहीं है।

– पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की उनके ही समाज में लोकप्रियता में कमी आई है। फिलहाल उनकी लोकप्रियता 58 फीसदी रह गई है। पहले यह अगस्त में 61 फीसदी और अक्टूबर में 64 फीसदी था। माना जा रहा है कि हार्दिक पटेल की सेक्स सीडी के बाद उनकी लोकप्रियता में कमी आई है।

– सवर्णों का झुकाव बीजेपी के साथ है। कांग्रेस से 26 फीसदी ज्यादा सवर्ण वोट बैंक बीजेपी के साथ दिख रहा है।

– आदिवासी वोटरों का भी झुकाव कांग्रेस के साथ दिख रहा है। बीजेपी से 18 फीसदी ज्यादा आदिवासी वोट बैंक भी कांग्रेस के साथ जाता दिख रहा है।

– दलित वोट बैंक कांग्रेस के साथ जाता दिख रहा है। बीजेपी से 18 फीसदी ज्यादा दलित वोट बैंक कांग्रेस के साथ जाता दिख रहा है।

– पाटीदार समुदाय बीजेपी से खिसक कर कांग्रेस की तरफ जा रहा है।

– कोली जाति का झुकाव बीजेपी के साथ होता दिख रहा है। परंपरागत रूप से यह जाति कांग्रेस के साथ रही है। कांग्रेस से 26 फीसदी ज्यादा कोली वोट बैंक बीजेपी के साथ जाता दिख रहा है।

– पटेल समाज का झुकाव कांग्रेस के साथ होता दिख रहा है। बीजेपी से 2 फीसदी ज्यादा पटेल वोट बैंक कांग्रेस के साथ जाता दिख रहा है।

– 40 फीसदी व्यापारी बीजेपी को वोट कर सकते हैं जबकि 43 फीसदी व्यापारी कांग्रेस के साथ जा सकते हैं।

– सर्वे के मुताबिक GST और नोटबंदी से गुजरात के अधिकांश व्यापारी नाराज। अधिकांश व्यापारी कांग्रेस के साथ। जीएसटी से 37 फीसदी व्यापारी खुश जबकि 44 फीसदी नाराज।

गुजरात में पहले चरण की वोटिंग में अब सिर्फ चार दिन ही बचे हैं। इस बीच इस सर्वे एजेंसी का यह तीसरा ओपिनियल पोल सामने आया है। इससे पहले 1 सितंबर को जारी पहले ओपिनियन पोल में कहा गया था कि बीजेपी को 59 फीसदी वोट और कांग्रेस को मात्र 33 फीसदी वोट मिलेंगे। इसके बाद 10 नवंबर को जारी दूसरे ओपिनियल पोल सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के वोट बैंक में गिरावट दर्ज की गई जबकि कांग्रेस के वोट प्रतिशत में इजाफा हो गया। फाइनल ओपिनियन पोल सर्वे 23 से 30 नवंबर के बीच 50 विधानसभा के 200 बूथों पर किया गया था। इसमें 3665 लोगों ने अपनी राय रखी थी। इस सर्वे के नतीजे बीजेपी को निराश करने वाले दिख रहे हैं।

बता दें कि गुजरात विधान सभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग 9 दिसंबर को होगी, जबकि दूसरे चरण में 14 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। 18 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश के साथ ही गुजरात चुनावों के नतीजे आएंगे। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव जीतने के लिए अपनी-अपनी ताकत झोंक दी है। बीजेपी के लिए यह चुनाव नाक की लड़ाई बनी हुई है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह गुजरात से ही आते हैं। अलबत्ता इन दोनों नेताओं का तूफानी चुनावी दौरा और चुनावी सभाएं गुजरात में हो रही हैं। उधर, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी नए तेवर और अंदाज में गुजरातियों को लुभाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं।

182 सदस्यों वाले गुजरात विधानसभा का यह चौदहवां चुनाव होगा। फिलहाल 115 सदस्यों के साथ भारतीय जनता पार्टी गुजरात विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है। दूसरे नंबर पर कांग्रेस है लेकिन पिछले दिनों उसके कई विधायक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। हालांकि, पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस की सीटों में इजाफा हुआ है जबकि भाजपा की सीटों में कमी होती गई है। इस बार के चुनाव की एक खासियत यह भी है कि चुनाव आयोग पहली बार सभी बूथों पर वीवीपीएटी लगे ईवीएम से चुनाव कराएगी। गुजरात में 22 साल से बीजेपी की सरकार है।

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  1. A
    anoop
    Dec 7, 2017 at 10:22 am
    जब कांग्रेस को तीन तीन लोगों का समर्थन मिला है और फीर भी नहीं जीत पाए तो यह शर्मनाक राहुल के लिए होगी क्योंकी सवाल यह भी उठेगा की क्या सिर्फ हार निश्चित थी इसी बजह से अध्यछ बना दिया गया पहले ही
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    Reply
    1. A
      anoop
      Dec 7, 2017 at 10:16 am
      बीजेपी का अगर सीट कम भी आता है और कांग्रेस से ज्यादा तव भी राहुल की स्थिति खराव होगी क्योंकि फीर पांच साल के लिए हार्दिक और जिग्नेश को कोई पूछने बाला नही रहेगा ! इसी पीरियड में बीजेपी फीर से पटेल समुदाय को अपने पाले में कर लेगी | पर हमारे राहुल बाबा का क्या होगा जो की न घर के रहेंगे और ना ही घात के |
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      Reply
      1. A
        Anil Saraswat
        Dec 5, 2017 at 4:40 pm
        कांग्रेस गर ज्यादा सीटें ले गई तो बड़ी उपलब्धि होगी। इससे देश की राजनीति प्रभावित होगी। यदि भाजपा की सरकार बनी और १०० से नीचे सीटें आईं तो भी भाजपा को नुकसान होगा। यह भाजपा की अवनति मानी जायेगी। आज देश पर गुजरात राज कर रहा है। मोदी pm औऱ अमित शाह सत्ता पार्टी प्रमुख हैं। दिल्ली के सचिवालय में गुजरात कैडर के आईएएस प्रमुख विभागों में तैनात है। सीबीआई प्रमुख, रबी प्रमुख गुजरात से हैं। जाहिर है कि भाजपा के वरीय नेताओं को अमित और मोदी ने ही सन्यास जीवन में धकेल दिया है। गुजरात में भाजपा की साख गिरने के बाद यशवंत सिन्हा के साथ और भी वरीय नेता खुलकर मोदी ऒर शाह पर ह ा करेंगे।
        (1)(2)
        Reply
        1. D
          DR MISS
          Dec 4, 2017 at 9:37 pm
          Bjp should improve economic policies to help all Indians specifically poor classes
          (2)(3)
          Reply
          1. M
            Manish singh
            Dec 4, 2017 at 6:36 pm
            Ghatiya hindi Patrika vaypari naraz hai Congress ke saath nahi hai Congress ne kitna paisa diya tujhe galat news ke lia
            (6)(25)
            Reply
            1. Aryamusafir Vedpathik
              Dec 5, 2017 at 12:44 pm
              मनीष जी, पिछले ७० वर्ष से हमारे देश में गणतन्त्र/पार्टीतन्त्र/दलतन्त्र/दल-दलतन्त्र (कीचड़तन्त्र) गठबन्धन सरकार/पूंजीतन्त्र (उद्योगतन्त्र, व्यापारतन्त्र, व्यवसायतन्त्र, माफियातन्त्र, तस्करतन्त्र)/गनतन्त्र बन्दूकतन्त्र/गुट्टतन्त्र/गुण्डातन्त्र गुण्डाराज/झूठतन्त्र/भीड़तन्त्र/भ्रष्टतन्त्र/लूटतन्त्र है। यह गणतन्त्र पूर्णतः विदेशी शासन प्रणाली है। इसकी चुनाव प्रणाली तथा सभी कानून भी विदेशी है। इसलिये समाचार पत्र, टीवी चैनल वाले पैड न्यूज, पार्टियों के विज्ञापनों और ओपिनियन पोल से जनता को भ्रमित करके पैसा कमाते हैं। छः हजार वर्ष पहले तक हमारे देश में लोकतन्त्र/प्रजातन्त्र/जनतन्त्र/जनता का शासन था। जो पूर्ण रूप से स्वदेशी था। वर्तमान में जो व्यक्ति नामांकन, जमानत राशि, चुनाव प्रचार में धन खर्च करके शासक बनता है उसका सबसे पहला उद्देश्य धन कमाना ही होता है। चाहे देश की कैसी और कितनी भी हानि क्यों न हो। यही कारण है कि किसी भी राजनैतिक दल का शासन हो भय--भूख--भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होता है। कोई भी राजनैतिक दल देश का कल्याण नहीं कर सकता। राष्ट्रहित में सभी राजनैतिक दलों का नामोनिशान मिटना जरूरी है।
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              Reply
            2. M
              Manish singh
              Dec 4, 2017 at 6:35 pm
              Gha a hindi Patrika vaypari naraz hai Congress ke saath hai Congress ne kitna paisa diya tujhe galat news ke lia
              (2)(16)
              Reply
              1. R
                Rahul - The Aurangzeb
                Dec 5, 2017 at 2:52 pm
                congress paisa deta hai apni burai karne ke liye jab ki janata uske saath hai... surely, tum rahul gandhi ke piddi ke team ka netrutva kar rahe ho...
                (1)(0)
                Reply
              2. Load More Comments