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तेजप्रताप का तलाक महागठबंधन के लिए भी बना रोड़ा, नहीं हो पा रहा सीटों का बंटवारा

राजद, कांग्रेस और हम के अलावा शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल और वाम दलों (भाकपा, माकपा) को भी महागठबंधन में शामिल किए जाने की चर्चा है। अटकलें तो उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को लेकर भी है।

भाई तेजस्‍वी यादव (दायें) के साथ तेज प्रताप यादव। (Express Photo By prashant Ravi)

राजद अध्यक्ष लालू यादव के बड़े बेटे और राजद विधायक तेज प्रताप यादव के तलाक मामले ने बिहार में महागठबंधन की राह में रोड़ा अटका दिया है। पारिवारिक तनाव की वजह से लालू यादव के छोटे बेटे और नेता विपक्ष तेजस्वी यादव महागठबंधन के घटक दलों के साथ बैठक नहीं कर पा रहे हैं। नवंबर के पहले हफ्ते में घटक दलों राजद, कांग्रेस और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के नेताओं की बैठक होनी थी और उसमें लोकसभा चुनावों के लिए सीटों के बंटवारे पर चर्चा होनी थी लेकिन 2 नवंबर को तेजप्रताप द्वारा पटना की अदालत में तलाक अर्जी दाखिल करने के बाद सब अटक सा गया है।

चूंकि अब लोकसभा चुनाव होने में छह महीने का ही समय रह गया है, ऐसे में सभी राजनीतिक दल सीटों का बंटवारा कर चुनाव की तैयारियों में जुट जाना चाहती हैं। महागठबंधन में भी इसकी तैयारी पहले ही थी लेकिन तलाक मामले की वजह से मामला अटक गया है। वैसे तेजस्वी ने एक दिन पहले ही शनिवार (10 अक्टूबर) को रांची पहुंचकर अपने पिता लालू यादव से रिम्स में मुलाकात की है। वैसे तो तेजस्वी ने इस मुलाकात को गैर राजनीतिक बताया और कहा कि वो पिता का स्वास्थ्य जानने और आशीर्वाद लेने गए थे क्योंकि 09 नवंबर को उनका जन्मदिन था लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि इस मुलाकात में महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर भी चर्चा हुई होगी।

बता दें कि राज्य में 40 लोकसभा सीटें हैं। राजद, कांग्रेस और हम के अलावा शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल और वाम दलों (भाकपा, माकपा) को भी महागठबंधन में शामिल किए जाने की चर्चा है। अटकलें तो उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को लेकर भी है। ऐसे में अगर महागठबंधन का कुनबा बड़ा होता है तो उसके बीच सीटों का बंटवारा अहम पड़ाव है। उधर, विपक्षी एनडीए में भी अभी तक सीटों के बंटवारे पर कोई आम सहमति नहीं बन सकी है। वैसे नीतीश कुमार की जेडीयू और बीजेपी ने बराबर-बराबर सीटों पर लड़ने का फैसला किया है।

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