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शहरी चमक में पीछे छूटा ‘ग्राम’

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम में स्थित गुरुग्राम औद्योगिक नगरी है। बड़ी-बड़ी गगनचुंबी इमारतें, हरे-भरे पार्क आदि से भरपूर गुरुग्राम आज भीषण जाम की समस्या, युवाओं को रोजगार, स्कूल व कॉलेजों की कमी से गुजर रहा है। साथ ही ग्रामीण इलाके भी विकास के लिए तरस रहे हैं। सांसद राव इंद्रजीत सिंह का दावा है कि वे लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और ऐसे बहुत सारे कार्य हैं जो उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए किए हैं। तो वहीं, इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कैप्टन अजय यादव कहते हैं कि सांसद के वादे हवा-हवाई साबित हुए हैं।

Author Published on: March 25, 2019 2:09 AM
सरकार में मंत्री और कद्दावर नेताओं में शुमार राव इंद्रजीत सिंह

अजय पांडेय

सरकार में मंत्री और हरियाणा के अहिरवाल के कद्दावर नेताओं में शुमार राव इंद्रजीत सिंह गुरुग्राम लोकसभा सीट से दो बार पहले ही जीत दर्ज कर चुके हैं। उन्होंने गुरुग्राम संसदीय सीट से 2009 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीता जबकि 2014 के चुनाव में वे भाजपा के टिकट पर लोकसभा पहुंचे। वे 1998 और 2004 में भी महेंद्रगढ़ संसदीय क्षेत्र से संसद का सफर तय कर चुके हैं। विरासत में मिली सियासत को चमकाने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। उनका कहना है कि जहां तक क्षेत्र के विकास की बात है तो वे लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और ऐसे बहुत सारे कार्य हैं जो उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए किए हैं लेकिन इस क्षेत्र में एम्स के निर्माण की मंजूरी उनकी सबसे बड़ी सफलता है क्योंकि मनेठी में इसका निर्माणकार्य पूरा हो जाने से समूचे क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा की बहुत बड़ी सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इसी प्रकार गुरुग्राम की वर्षों पुरानी जीएमडीए के गठन की मांग को पूरा कराने में भी उनको सफलता मिली, दिल्ली-बावल-अलवर के बीच रैपिड रेल के निर्माण कार्य का शुभारंभ हुआ और कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस वे की शुरुआत हुई है। उनका कहना है कि विकास कार्यों की सूची बहुत लंबी है और क्षेत्र की जनता विकास के दावे को जानती और मानती भी है।

गुरुग्राम के सांसद के दावे अपनी जगह हो सकते हैं लेकिन अगर आप व्यस्त समय में दिल्ली से गुरुग्राम जाना चाहते हैं तो संभव है कि घंटे-डेढ़ घंटे की दूरी तय करने में आपको चार घंटे भी लग जाएं। विभिन्न कारपोरेट घरानों का मुख्यालय बन चुके इस शहर ने बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार दिए लेकिन जितनी बड़ी संख्या में लोग यहां आते-जाते हैं, उतने बड़े स्तर पर परिवहन का नेटवर्क विकसित नहीं हो सकता है। मेट्रो ने थोड़ी राहत जरूर दी है लेकिन सड़क पर अराजकता की स्थिति कायम है। ज्यादा समय नहीं गुजरा जब बरसात के महीने में गुरुग्राम में ऐसा जाम लगा कि वाहन पूरी रात सड़क पर खड़े रह गए। इस सड़क जाम की गूंज दिल्ली तक सुनाई पड़ी। एक खास बात और भी हुई है कि गुरुग्राम ने भूमंडलीकरण के दौर में ऊंची छलांग जरूर लगाई लेकिन अब इसके विकास की रफ्तार धीमी हो गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में वह रौनक नहीं है जो पहले हुआ करती थी। इतना ही नहीं गुरुग्राम में घूमते हुए आपको एक ओर तो ऐसा लगेगा कि क्षेत्र का एक हिस्सा देश के किसी भी बड़े शहर को मात देने की कूवत रखता है जबकि ओल्ड गुरुग्राम में उस प्रकार की सुविधाए नहीं देखने को मिलतीं।

पहले गुड़गांव के नाम से मशहूर इस शहर का नाम हरियाणा की भाजपा सरकार ने बदलकर गुरुग्राम कर दिया। पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य का गांव इसी क्षेत्र में होने की वजह से इसका नाम गुरुग्राम पड़ा। इस संसदीय क्षेत्र का एक हिस्सा शहरी है जो आधुनिक सुख सुविधाओं से लैस है तो दूसरी ओर मेवात का ग्रामीण क्षेत्र है जो इस संसदीय क्षेत्र की चकाचौंध में पैबंद की तरह है। इस संसदीय क्षेत्र में नौ विधानसभा क्षेत्र हैं और चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र में 17.89 लाख मतदाता हैं। यादव बहुल इस लोकसभा क्षेत्र में यादव मतदाताओं की संख्या करीब पांच लाख है तो मेवात में मतदाताओं की संख्या करीब साढेÞ चार लाख है। जाट मतदाताओं की संख्या करीब डेढ़ लाख है। गुरुग्राम संसदीय क्षेत्र आजादी के बाद ही अस्तित्व में आया और 1977 तक बना रहा। उसके बाद फिर परिसीमन के बाद 2009 में यहां पर संसदीय चुनाव कराए गए।

वादे जो किए
’ पिछले लोकसभा चुनाव से पहले गुरुग्राम को जीएमडीए बनाने का वादा किया
’ केएमपी का निर्माण पूरा कराने का वादा
’ गुरुग्राम को जाम मुक्त व प्रदूषण मुक्त बनाने का वादा

वादे जो वफा न हुए
’गुरुग्राम को सड़क जाम से मुक्त करने का काम अधूरा है।
’उद्योग धंधों का विकास और क्षेत्र के युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने का वादा भी अधूरा है।
’मेवात में विकास की रोशनी अपेक्षाकृत कम पहुंची है, इस क्षेत्र के विकास के दावे भी खोखले हैं।
’पर्याप्त संख्या में स्कूल-कॉलेजों की कमी बनी हुई है।

क्या रही शिकायतें
’सड़क जाम से लोग त्रस्त हैं। दिल्ली-गुरुग्राम के बीच रोज घंटों जाम लगता है।
’प्रदूषण ने भी शहर की सेहत बिगाड़ी है।
’कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
’सांसद और सूबे की सरकार के बीच बेहतर तालमेल नहीं दिखता।

सांसद का दावा
केंद्र सरकार में मंत्री व क्षेत्र के सांसद राव इंद्रजीत का कहना है कि देश का 22वां एम्स इस संसदीय क्षेत्र में बनाया जा रहा है। 1000 करोड़ रुपए की लागत से राजीव चौक पर सिग्नेचर टावर का निर्माण, इफको चौक पर अंडरपास और हीरो होंडा चौक पर फ्लाईओवर का निर्माण कराया गया। इसी प्रकार 1200 करोड़ रुपए की लागत से गुरुग्राम सोहना रोड का चौड़ीकरण तथा बादशाहपुर एलिवेटेड रोड का निर्माण शुरू हो गया है।
– राव इंद्रजीत सिंह, सांसद

विपक्ष के बोल
सांसद के वादे हवा-हवाई साबित हुए। मेवात में विश्वविद्यालय खोलने की बात थी लेकिन कुछ हुआ नहीं। इसी प्रकार गुरुग्राम में विश्वविद्यालय की इमारत बनाने की बात भी धरी रह गई। पुराने गुरुग्राम की हालत खराब है और सच बात तो यह है कि विकास डीएलएफ वालों ने किया, इसमें सांसद का कोई योगदान नहीं है। -कैप्टन अजय यादव, कांग्रेस नेता

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