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यूपीः जंग-ए-मैदान में रजवाड़े

प्रतापगढ़ और अमेठी के चार रजवाड़े चुनावी मैदान में हैं। जंग-ए-मैदान में एक राजकुमारी और तीन राजाओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। प्रतापगढ़ में दो रजवाड़े आमने-सामने हैं।

Author अमेठी | Published on: April 18, 2019 2:23 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

स्वामीनाथ शुक्ल

प्रतापगढ़ और अमेठी के चार रजवाड़े चुनावी मैदान में हैं। जंग-ए-मैदान में एक राजकुमारी और तीन राजाओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। प्रतापगढ़ में दो रजवाड़े आमने-सामने हैं। इनमें लड़ाई कांटे की है। प्रतापगढ़ में कालाकांकर राजघराने की राजकुमारी रत्ना सिंह चौथी बार सदन जाने के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार बनी हैं। इसके पहले राजकुमारी रत्ना सिंह 1996, 1999 और 2009 में तीन बार कांग्रेस की सांसद बन चुकी हैं। रत्ना सिंह के पहले उनके पिता राजा दिनेश सिंह 1967, 1971, 1984 और 1989 में प्रतापगढ़ से कांग्रेस के सांसद चुने गए थे। राजा दिनेश सिंह राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री भी थे। रत्ना सिंह जनता के दुख सुख में खड़ी रहती है। इनके पास कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मजबूत टीम है।

प्रतापगढ़ में भदरी राजघराने के कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया अब जनसत्ता पार्टी के अध्यक्ष हैं। रघुराज की पार्टी से उनके मौसेरे भाई जामों के राजा कुंवर अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल भइया दूसरी बार लोकसभा जाने के लिए उम्मीदवार हैं। अक्षय प्रताप सिंह 2004 में सपा से सांसद बने थे। इसके बाद प्रतापगढ़ से विधान परिषद के सदस्य हैं। सिंह प्रतापगढ़ से चार बार एमएलसी बन चुके हैं। भदरी के राजा रघुराज प्रताप सिंह कुंडा से आधा दर्जन बार निर्दल विधायक और कई बार मंत्री बन चुके हैं। भदरी और जामों राजघराने का चुनावी मुकाबला कालाकांकर राजघराने से हैं। इससे प्रतापगढ़ में कालाकांकर की राजकुमारी रत्ना सिंह और जामों के राजा अक्षय प्रताप सिंह आमने-सामने हैं। प्रतापगढ़ में सपा-बसपा के सामूहिक गठबंधन से बसपा से अशोक तिवारी और भाजपा से संगम लाल गुप्ता उम्मीदवार बने हैं। 2009 के चुनाव में रत्ना सिंह को 1,69,137 वोट, कुंवर अक्षय प्रताप को 1, 21,252 वोट मिले थे। जबकि 2014 के चुनाव में रत्ना सिंह 1,38,620 वोट पड़े थे, लेकिन अपना दल के हरिबंश सिंह सांसद चुने गए थे।

मगर वे पांच साल गायब थे। इससे हरिबंश के नाम पर गुमशुदा पोस्टर तक छपे थे। रघुराज प्रताप सिंह जनता के बीच में बने रहते हैं। इनके पास कार्यकर्ताओं समथर्कों की लंबी फौज है। अमेठी के राजा डॉ संजय सिंह सुल्तानपुर से कांग्रेस उम्मीदवार हैं। सिंह 2009 में सुल्तानपुर से कांग्रेस के सांसद बन चुके हैं। डॉ सिंह बहुत लंबे समय से सुल्तानपुर में डेरा जमाए हैं। डॉ सिंह 2009 के पहले 1998 में भाजपा से अमेठी के सांसद बने थे। इसके बाद 1996 में जनता दल और 2014 में कांग्रेस से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। संजय सिंह अमेठी विधानसभा से तीन बार विधायक रह चुके हैं। संजय की पत्नी अमिता सिंह सुल्तानपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री थीं। संजय सिंह का मुकाबला भाजपा की मेनका गांधी से है। इसके बाद सपा बसपा गठबंधन के सोनू सिंह उम्मीदवार हैं। मेनका गांधी मुसलमानों को डराने और मतदाताओं को चार भागों में बांटने को लेकर सुर्खियों में हैं। चुनाव आयोग मेनका गांधी के चुनाव प्रचार पर 48 घंटे के लिए रोक लगा रखा है।

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