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गैर कांग्रेसी राज में हुए पांच आम चुनाव, एक बार ही कांग्रेस पा सकी बहुमत!

1980 में हुए चुनावों में कांग्रेस ने जबर्दस्त वापसी की थी। 529 सीटों में से कांग्रेस ने 353 पर जीत दर्ज करते हुए पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी।

Author January 24, 2019 1:34 PM
Loksabha Election 2019: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पंजाब से चुनाव लड़ा सकती है कांग्रेस (एक्सप्रेस फोटो-रोहित जैन पारस)

मोरारजी देसाई की अगुवाई में 1977 में पहली बार देश में गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी लेकिन वह सरकार आपसी खींचतान की वजह से अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी। कांग्रेस के सहयोग से चौधरी चरण सिंह कुछ दिन के लिए प्रधानमंत्री बने लेकिन वो संसद का मुंह भी नहीं देख सके। कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद देश में मध्यावधि चुनाव कराने पड़े। 1980 में हुए चुनावों में कांग्रेस ने जबर्दस्त वापसी की थी। 529 सीटों में से कांग्रेस ने 353 पर जीत दर्ज करते हुए पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इंदिरा गांधी फिर से प्रधानमंत्री बनीं। यह पहला आम चुनाव था जब केंद्र में गैर कांग्रेसी दलों का शासन था। इस तरह का दूसरा चुनाव 1991 में हुआ। उस वक्त चंद्रशेखर की कार्यवाहक सरकार सत्ता में थी। कांग्रेस ने इनसे भी समर्थन वापस ले लिया था।

मई-जून 1991 में हुए आम चुनावों में ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आत्मघाती हमले में हत्या कर दी गई थी। उस चुनाव में कांग्रेस 545 में 244 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन उसके पास बहुमत नहीं था। तब पी वी नरसिम्हा राव ने कुछ दलों के समर्थन से केंद्र में अल्पमत की सरकार बनाई थी। केंद्र में यह पहली सरकार थी जिसने अल्पमत में रहते हुए अपना कार्यकाल पूरा किया था। नरसिम्हा राव पर सरकार बचाने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसदों को वोट के बदले रिश्वत देने का भी आरोप लगा था। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।

गैर कांग्रेसी राज में तीसरा आम चुनाव 1998 में हुआ, जब केंद्र में इंदर कुमार गुजराल की कार्यवाहक सरकार थी। इन चुनावों में कांग्रेस को मात्र 141 सीटें मिली थीं, जबकि 182 सीट जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। नीतीश कुमार की समता पार्टी, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और जयललिता की एआईएडीएमके के सहयोग से अटल बिहारी वाजपेयी की दूसरी बार एनडीए सरकार बनी थी जो तेरह महीने ही चल सकी। इसके बाद 1999 में फिर आम चुनाव हुए। भाजपा फिर 182 सीटें जीतने में कामयाब रहीं। एनडीए ने कुल 270 सीटें जीती थीं। केंद्र में पहली बार किसी गैर कांग्रेस सरकार ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। हालांकि, वाजपेयी ने ‘शाइनिंग इंडिया’ के चलते देश में पहले ही आम चुनाव कराने का फैसला किया और 2004 के चुनावों में उनकी हार हुई।

2004 का आम चुनाव ऐसा पांचवां चुनाव था जब केंद्र में गैर कांग्रेसी दलों का शासन था। कांग्रेस को इस चुनाव में मात्र 145 सीटें ही मिलीं थीं लेकिन चुनाव से पहले ही पार्टी ने कई दलों से गठबंधन किया था। यूपीए को तब कुल 218 सीटें मिली थीं। सपा (36), बसपा (19) और लेफ्ट पार्टियों (59) ने मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दिया था। इस गठबंधन सरकार ने भी पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। 2009 में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने अच्छा परफॉर्म किया और 2004 के प्रदर्शन (145) से 61 सीटें ज्यादा जीतते हुए कुल 206 सीटें जीतीं। इस बार यूपीए दो की सरकार में टीएमसी और डीएमके भी शामिल हुई थी। इस सरकार ने भी पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।

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तमाम सर्वे और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2019 में भी गठबंधन सरकार के आसार बनते दिख रहे हैं। हालिया सर्वे के मुताबिक यूपी में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन को 58 सीटें मिल सकती हैं जो 2004 जैसी स्थिति का संकेत देता है।

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