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नए मतदाता बनेंगे उम्मीदवारों के भाग्य विधाता

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): बंगाल की हर लोकसभा सीट पर औसतन 47 हजार 660 से ज्यादा ऐसे मतदाता होंगे, जो पहली बार ईवीएम का बटन दबाएंगे। वैसे बंगाल में सबसे ज्यादा नए मतदाता (83 हजार 516) दमदम संसदीय इलाके में हैं और दूसरे नंबर पर आती है दक्षिण कोलकाता लोकसभा सीट, यहां नए मतदाताओं की संख्या 61 हजार 442 है। उत्तर कोलकाता लोकसभा इलाके में नए मतदाताओं की संख्या सबसे कम 19 हजार 203 है।

Lok Sabha Election 2019: चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर चुका है। (Illustration: CR Sasikumar)

शंकर जालान

इस दफा देश में करीबन डेढ़ करोड़ ऐसे मतदाता हैं, जो पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें से सबसे ज्यादा नए मतदाता पश्चिम बंगाल में ही हैं। सात चरणों में होने वाले 17वीं लोकसभा के चुनाव में सूबे में 20 लाख एक हजार 898 ऐसे मतदाता हैं, जिनका जन्म 21वीं सदी में हुआ है। राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 32 सीटों पर इस बार नए व युवा मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रहेगी। इसी के मद्देनदर हर पार्टी और हर उम्मीदवारों की पहली नजर युवाओं और नए मतदाताओं पर है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2019 के आम चुनावों में 29 राज्यों में 18 से 22 साल तक की उम्र के वे युवा जो न केवल पहली बार मतदान करेंगे, बल्कि 282 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के भाग्य विधाता भी बनेंगे। ऐसे युवाओं की तादाद वाले राज्यों में पहले नंबर पर है पश्चिम बंगाल। इसके बाद क्रमश: उत्तर प्रदेश 16 लाख 75 हजार 567, मध्य प्रदेश 13 लाख 60 हजार 554, राजस्थान 12 लाख 82 हजार 118 और महाराष्ट्र 11 लाख 99 हजार 527 का नंबर आता है।

सूबे में कांग्रेस, माकपा, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि इस बार लोकसभा चुनाव में जो नया होने जा रहा है, वह यह कि आजादी के बाद यह पहला ऐसा आम चुनाव होगा, जब 21वीं सदी में जन्मे लोग पहली बार मतदान करेंगे। इन नेताओं का तर्क है कि 2014 में हुए लोकसभा के चुनाव के दौरान इस सदी में जन्मे लोगों की आयु 18 वर्ष नहीं थी, लेकिन इस चुनाव में उनकी उम्र वोट देने लायक हो गई है और वे पहली बार देश की सरकार चुनने के लिए वोट डालेंगे।  चुनाव आयोग की मानें तो 16वीं लोकसभा यानी 2014 से 17वीं लोकसभा यानी 2019 तक नौ करोड़ मतदाता बढ़े हैं, जिनमें डेढ़ करोड़ मतदाताओं की उम्र 18 से 19 साल के बीच हैं।

इस बीच, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने युवा मतदाताओं को एक विशेष संदेश देते हुए कहा कि देश के युवाओं को चुनाव प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए, क्योंकि उनके पास किसी भी देश का भविष्य बदलने की क्षमता है। राज्यपाल ने कहा कि हर कोई जानता है कि युवा मतदाताओं का क्या महत्त्व होता है। देश निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे अहम होती है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के आधार पर पता चलता है कि बीते लोकसभा चुनाव में 280 सीटों पर जितना जीत-हार का अंतर था, इस बार पहली दफा वोट करने वालों की संख्या उससे कहीं ज्यादा हो सकती है। 1997 और 2001 के बीच जन्मे ये मतदाता पिछले आम चुनाव में मतदान के योग्य नहीं थे। अनुमान है कि हर लोकसभा सीट पर औसतन साढ़े 27 हजार ऐसे मतदाता होंगे जो पहली बार मतदान करेंगे।

राजनीति के पंडितों का कहना है कि नए मतदाता इसलिए भी बेहद खास हैं, क्योंकि यह बेहतर तरीके से जानकारी को हासिल करते हैं, तकनीक का इस्तेमाल करते हैं और अपनी स्वतंत्र सोच रखते हैं। यही वह वर्ग है जो चुनावों में सबसे अधिक बढ़-चढ़ कर भागीदारी करता है। इसीलिए इस वर्ग पर सभी राजनीतिक दलों की निगाहें हैं। यही कारण है कि इस आयु वर्ग को ध्यान पर रख ही उम्मीदवार प्रचार की रणनीति बना रहे हैं। सभी प्रमुख दलों की युवा इकाई इन युवाओं को आकर्षित करने के लिए इसलिए फेसबुक, ट्यूटर, यू टूब का सहारा ले रही है, क्योंकि इकाई से जुड़े लोग भली-भांति जानते हैं कि इस बार नए मतदाता ही उम्मीदवारों के भाग्य विधाता बनने वाले हैं।

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