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State-Wise Exit Polls Results 2019 Lok Sabha Elections: फिर एनडीए सरकार के आसार, यूपी छोड़ बड़े राज्‍यों में ज्‍यादा नुकसान नहीं

Exit Polls Results 2019 Lok Sabha Elections: लोकसभा चुनाव के दौरान पूरे देश की नजरें बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश पर है। वजह ये है कि यहां की सीटें देश की आगामी सरकार को तय करेगी।

Exit Polls Results 2019: देश की राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र में मतदान करने के बाद एक मतदाता। (Photo: PTI)

Exit Poll Results 2019 India Lok Sabha Elections: 17वीं लोकसभा के लिए कुल सात चरणों में मतदान संपन्‍न हो गया है। 19 मई को आखिरी चरण की वोटिंग होते ही तमाम टीवी चैनलों ने एग्‍जिट पोल के नतीजे जारी किए। एनडीटीवी ने इन सब नतीजों का निचोड़ निकाल कर पोल ऑफ पोल्‍स किया। मतलब तमाम एग्‍जिट पोल के नतीजों के औसत के आधार पर एक आंकड़ा बताया गया। सारे एग्‍जिट पोल नतीजों में एनडीए सरकार की वापसी के अनुमान लगाए गए हैं।

कुल 543 सीटों में से 542 लोकसभा सीटों पर चुनाव हुए हैं। तमिलनाडु के वेल्लोर सीट पर आयोग ने धन-बल के इस्तेमाल की आशंका पर चुनाव रद्द कर दिया था। एनडीटीवी पोल ऑफ पोल्‍स के मुताबिक एनडीए को 305, यूपीएक को 125 और अन्‍य को 112 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। 

exit poll results 2019 india एक नजर मेें: राज्‍यों की बात करें तो एनडीटीवी पोल ऑफ पोल्‍स के मुताबिक उत्‍तर प्रदेश में एनडीए को 44, सपा-बसपा गठबंधन को 34 और कांग्रेस को 2 सीटें दी गई हैं। दिल्‍ली में बीजेपी को एक सीट का नुकसान बताया गया है। यानी छह सीटें दी गई हैं। एक सीट कांग्रेस को जाते दिखाई गई है।महाराष्‍ट्र में 36 (एनडीए), 11 (यूपीए) और 1 (अन्‍य) का आंकड़ा है। छत्‍तीसगढ़ की 11 में से सात सीटें बीजेपी और 4 कांग्रेस को जाती बताई गई हैं। झारखंड में एनडीए को 8, यूपीए को 5 और अन्‍य को 1 सीट दी गई है। बिहार में एनडीए को 30 और राजद गठबंधन को 9 के बाद एक बची सीट कांग्रेस को दी गई है।

मध्‍य प्रदेश में बीजेपी को 23 और कांग्रेस को 6 सीटें बताई गई हैं। गुजरात में बीजेपी को तीन सीटों का नुकसान बताया गया है, यानी यहां बीजेपी को 23 और कांग्रेस को तीन सीटें दी गई हैं। तेलंगाना में टीआरएस को 12, कांग्रेस को दो, बीजेपी को 1 और अन्‍य को 1 सीटें मिलने का अनुमान है। आंध्र प्रदेश में टीडीपी को नौ और वाईएसआर कांग्रेस को 16 सीटें दी गई हैं। असम में एनडीए 9, यूपीए तीन सीटें जी सकती है।

#RepublicExitPoll: रिपब्‍लिक टीवी ने दो एजेंसियों के साथ मिल कर एग्‍जिट पोल किया है। जन की बात के साथ जो एग्‍जिट पोल किया है, उसके मुताबिक एनडीए को 305, यूपीए को 124, महागठबंधन को 26 और अन्‍य को 87 सीटें दी हैं।

रिपब्‍लिक टीवी ने सीवोटर के साथ जो एग्‍जिट पोल किया है, उसके मुताबिक एनडीए को 287, यूपीए को 128, महागठबंधन को 40 और अन्‍य को 87 सीटें आने वाली हैं।

BJP-278-288 | NDA- 308-318 | Congress – 68-78 | UPA- 88-98 | SP-BSP- 20-24 | Others – 157-167

ध्रुवीकरण: इस बार के चुनाव में जातीय, धार्मिक और क्षेत्रीय ध्रुवीकरण के साथ-साथ किसी खास व्यक्ति के प्रति भी पसंद और नापसंद के रूप में ध्रुवीकरण हुआ है और पिछले कई चुनावों के मुकाबले यह गोलबंदी ज्यादा मजबूत दिखी है। उत्तर प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक गोलबंदी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। यहां 26 साल बाद दो धुर विरोधी दलों (सपा और बसपा) ने मिलकर चुनाव लड़ा है। इस राज्य से 80 लोकसभा सीटं हैं। 2014 में भाजपा ने सबसे ज्यादा 71 सीटें यहीं से जीती थीं लेकिन इस बार चुनौती कठिन है।

विशेषज्ञ सुरजीत एस. भल्‍ला का मानना है कि ध्रुवीकरण केवल प्रो-बीजेपी और प्रो-कांग्रेस के रूप में है। यूपी में प्रो-कांग्रेस वोट का मतलब यह नहीं कि वह कांग्रेस को ही मिले। महागठबंधन का वोट भी ‘प्रो-कांग्रेस’ माना जा रहा है। उधर, आसनसोल से तृणमूल कांग्रेस की उम्‍मीदवार मुनुमन सेन का कहना है कि पश्‍चिम बंगाल में छह साल से ध्रुवीकरण हो रहा है।

यूपी में वाराणसी पर देश भर की निगाहें टिकी हैं। यहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। विपक्ष की कोशिश है कि अगर मोदी की हार सुनिश्‍चित न करवा सके तो कम से कम जीत का अंतर जरूर कम करे। इनके अलावा राहुल गांधी की पुश्तैनी सीट अमेठी पर भी सब की निगाहें हैं। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से उनकी टक्कर है। राहुल इस बार केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं।

UP Lok Sabha Elections Exit Poll Results 2019: बीजेपी से सीटें छीन सकेगा सपा-बसपा गठबंधन?

2019 का लोकसभा चुनाव कई मायनों में खास है। सात चरणों में मतदान 19 मई को संपन्‍न हो गया। अब 23 मई को नतीजों का इंतजार है। इससे पहले 19 मई को एग्‍जिट पोल के नतीजे (exit poll results 2019 india) आ रहे हैं।

अगर भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला तो सालों बाद ऐसा होगा कि लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी। दिल्‍ली की सत्‍ता के लिए राज्‍यों के लिहाज से यूपी की सीटों की संख्‍या अहम होती है। वजह, यहां सबसे ज्‍यादा सीटें (80) हैं। इनमें से 73 पिछली बार एनडीए के खाते में थीं। इस लिहाज से इस राज्‍य की चर्चा 2019 में खूब हो रही है। बीजेपी कह रही है कि हम इससे ज्‍यादा ही लाएंगे, जबकि विरोधी और राजनीतिक विश्‍लेषकों का आंकलन सीटें घटने की है। कई जानकार 50 फीसदी सीटें घटने तक का अनुमान लगा रहे हैं। इस लिहाज से यह राज्‍य चर्चा में बना हुआ है।

MP Lok Sabha Elections Exit Poll Results 2019: राज्‍य की सत्‍ता गंवाने के बाद कैसी रहेगी बीजेपी की सूरत?

लेकिन, एक अहम बात है पश्‍चिम बंगाल का चर्चा में आ जाना। अंतिम चरण के मतदान (19 मई) के पहले अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा के बाद से बंगाल की चर्चा कुछ ज्‍यादा ही हो रही है। बंगाल में विपक्ष का स्‍पेस खाली है। इस स्‍पेस को भरने के लिए बीजेपी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। अगर बीजेपी यहां से अच्‍छी सीटेें जीतने में कामयाब रही तो यह न केवल पार्टी के लिए एक नई जमीन मिलने जैसी होगी, बल्‍कि अन्‍य राज्‍यों से होने वाले घाटे की भरपाई में भी उसे भारी मदद मिलेगी। दूसरी ओर, तृणमूल की केंद्रीय राजनीति में अहमियत बढ़ाने की चाहत भी कमजोर पड़ेगी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गुजरात के गांधीनगर से पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले इस सीट से लालकृष्ण आडवाणी जीतते रहे हैं।

Rajasthan Lok Sabha Elections Exit Poll Results 2019: राज हाथ में आया, दिल्‍ली में भी मजबूत होगा कांग्रेस का किला?

2014 में नरेंद्र मोदी की अगुआई में भाजपा केवल 31 फीसदी वोट लाकर 282 सीटें ले आई थी। इतने कम वोट पर इतनी ज्‍यादा सीटें लाकर पहली बार कोई नेता देश का प्रधानमंत्री बना। जानकार मानते हैं कि ऐसी लहर लगातार दो बार पैदा नहीं हो सकती। इसलिए 2019 का चुनाव साधारण चुनाव होगा।

कांग्रेस 1996 से 2004 के बीच 145 के आसपास सीटें जीतती रहीं। 1999 में अपवाद रहा, जब पार्टी ने 114 सीटें जीतीं। 2009 में कांग्रेस की 206 सीटें आईं। 2004 में कांग्रेस 145 सीटें लेकर आई थी और पूरे पांच साल सत्‍ता में रही। इसके अगले चुनाव में भी उसकी सरकार बनी। 2014 में भाजपा 426 सीटों पर लड़ी थी। 31 फीसदी वोट लेकर 282 सीटें जीतीं। एनडीए को 38.5 फीसदी वोट मिले थे और 336 सीटें आई थीं। इंदिरा-नेहरू ने जब बड़ी जीत हासिल की थी, तब भी उनकी सीटें 350 के करीब रहीं थीं और 42 फीसदी वोट शेयर के साथ।

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