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Rajasthan Elections: हर एक वोट जरूरी होता है, जब 1 से 2 प्रतिशत वोटों ने बदल दी सत्ता

देश की दोनों ही बड़ी पार्टियों ने राजस्थान के प्रचार प्रसार में अपना पूरा दमखम लगा दिया। ऐसे में वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए निर्वाचन विभाग की तरफ से कई प्रयास किए जाते हैं।

भाजपा- कांग्रेस का प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के आखिरी चरण में आज तेलंगाना और राजस्थान में वोटिंग शुरू हो चुकी है। देश की दोनों ही बड़ी पार्टियों ने राजस्थान के प्रचार प्रसार में अपना पूरा दमखम लगा दिया। ऐसे में वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए निर्वाचन विभाग की तरफ से कई प्रयास किए जाते हैं। राजनीतिक पार्टियां भी पूरा जोर लगाती हैं।दरअसल वोट बढ़ने और घटने से राजनीति में बड़ी उथल पुथल मच जाती है। पिछले 6 चुनावों के आंकड़े राजस्थान की जनता का मिजाज कुछ ऐसा ही बता रहे हैं। बता दें कि प्रदेश में एक प्रतिशत कम वोटिंग या सिर्फ दो प्रशितश वोटिंग बढ़ोत्तरी पर सत्ता का परिवर्तन हो जाता है।

मोदी लहर का दिखा था असर
गौरतलब है कि पिछले चुनाव में मोदी लहर का असर दिखा था कि वोटिंग में 9 प्रतिशत का उछाल आया, जो निर्वाचन विभाग के साथ भाजपा और कांग्रेस के लिए इतिहास बना गया। मोदी लहर के चलते भाजपा को इतिहास की सबसे अधिक 163 सीटें मिली थीं तो वहीं कांग्रेस को इतिहास की सबसे कम 21 सीटें।

1985- 2% वोटों ने बदल दी सत्ता
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए विधानसभा चुनाव में 54.93 प्रतिशत की वोटिंग हुई थी। कांग्रेस ने 113 सीटें जीत कर सत्ता में वापसी की थी। यहां 1980 में भी कांग्रेस की ही सरकार थी। वर्ष 1990 के चुनाव में 2 प्रतिशत मतदान अधिक होने पर सत्ता बदल गई। कांग्रेस 50 सीटों पर ही सिमट गई जबकि भाजपा केखाते में 85 सीटें आईं। जनता दल के 55 विधायकों के सहयोग से भाजपा ने सरकार बनाई। 9 निर्दलीय और अन्य दलों के दो ही प्रत्याशी जीते। वहीं दो साल बाद बाबरी मस्जिद मामले में भाजपा सरकार बर्खास्त कर दिया गया।

1993- साढे 3% वोटों ने करवाई भाजपा की वापसी
प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के दौरान 1993 में विधानसभा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में 3.50 प्रतिशत के इजाफे के साथ 60.59 प्रतिशत वोटिंग हुई। भाजपा को पहली बार 13 प्रतिशत वोटों की वृद्धि के साथ 38.60 प्रतिशत वोट जबकि 95 सीटें मिलीं। वहीं करीब 5 प्रतिशत वोटों की बढोत्तरी के साथ कांग्रेस ने 38.27 प्रतिशत वोट और 76 सीटें हासिल की। इसमें 21 निर्दलीय भी जीते, लेकिन पिछले चुनाव में 55 सीटें जीतने वाला जनता दल 6 सीटों पर सिमट गया और वोट भी 21 प्रतिशत से कम होकर 7 प्रतिशत रह गए। हालांकि निर्दलीयों की मदद से भाजपा ने फिर से सरकार बनाई

1998- 3% वोटो से कांग्रेस को हुआ फायदा
विधानसभा चुनाव 1998 में सत्ता विरोधी लहर की वजह से एक बार फिर करीब 3 प्रतिशत वोटिंग बढ़ी। इसमें कांग्रेस का वोटो 38 % से बढ़कर 45% पहुंचा और कांग्रेस ने अभी तक की सबसे अधिक 153 सीटें जीतीं। यानी कांग्रेस को 77 सीटों के इजाफा मिला। वहीं भाजपा का वोट प्रतिशत करीब 5% तक गिर गया। लेकिन सीटों के लिहास से वह 95 से सीधे 33 पर आ गई और उसे 62 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। जिसके बाद कांग्रेस ने दो-तिहाई सीटों के साथ सरकार बनाई।

2003- भाजपा का पहला शतक
कांग्रेस सरकार के खिलाप लहर चली। मतदान प्रतिशत करीब 4 % बढ़कर 67.18 पर पहुंच गया। भाजपा का वोट प्रतिशत 33% से बढ़कर 39% से भी अधिक हो गया। भाजपा ने 120 सीटें हासिल की, जो पिछले चुनाव से 87 सीटें ज्यादा थीं। भाजपा की स्थापना के बाद पहली बार पार्टी 100 सीटों के पार निकली। सत्ता भाजपा को मिली। वहीं कांग्रेस को 35.65 % वोटों के साथ 56 सीटें मिलीं। करीब 9% वोट और 97 सीटों का नुकसान पार्टी को झेलना पड़ा था।

2008- 1% वोट ने बिगाड़ा गणित
विधानसभा चुनाव 66.49% वोटिंग हुई, जो पिछले चुनाव से करीब एक प्रतिशत कम रही। भाजपपा को वोट प्रतिशत 39 से गिरकर 34 % पर आ गया और उसे करीब 42 सीटों के नुकसान के साथ 78 सीटें मिलीं। कांग्रेस को 36.82 % मत मिले, जो पिछले चुनाव से एक प्रतिशत ही ज्यादा था। लेकिन सीटों के लिहाज से उसे 96 सीटें मिलीं। वहीं बसपा को 6, निर्दलीयों को 14 व अन्य पार्टियों को 6 सीटें मिली। कांग्रेस ने बसपा और अन्य के सहयोग से सरकार बनाई।

 

2013- मोदी लहर का दिखा असर
भाजपा ने नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री का प्रत्याशी घोषित किया था। मोदी लहर का असर राजस्थान चुनाव में देखने को मिला। पहली बार 9% से बढ़कर वोटिंग 75% जा पहुंची। वहीं भाजपा का वोट 11 % बढ़कर 45% हो गया। पार्टी को इतिहास की सबसे अधिक सीटें मिली। पिछले चुनाव से 85 ज्यादा। कांग्रेस 21 सीट पर सिमट गई। 74 सीटों का नुकसान के साथ मत प्रतिशत भी 4% गिर गया। वहीं 33% वोट ही मिले। सात निर्दलीय, तीन बसपा , 4 एनपीपी व 2 सीटें जमींदारा पार्टी ने जीतीं।

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