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बिजली व तेल कंपनियों से मांगा जवाब

ई-कचरा जलाने व उसे गंगा में डालने पर कड़ा रुख अख्तियार करने के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) अब इस खतरनाक कचरे का भंडारण करने वाली विद्युत कंपनियों और हवा में जहर घोल रहे डीजल वाहनों व तेल कंपनियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।

Author नई दिल्ली | February 25, 2017 1:26 AM
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)।

ई-कचरा जलाने व उसे गंगा में डालने पर कड़ा रुख अख्तियार करने के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) अब इस खतरनाक कचरे का भंडारण करने वाली विद्युत कंपनियों और हवा में जहर घोल रहे डीजल वाहनों व तेल कंपनियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। अधिकरण ने ई-कचरे से फैल रहे वायु प्रदूषण सबंधी आरोपों से जुड़ी नागरिक व बिजली वितरण सेवा से जुड़े कर्मचारी संघ के महासचिव बलवीर सिंह की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान वितरण कंपनियों के परिसर की जांच का आदेश दिया है और 30 मार्च तक रिपोर्ट मांगी है। एनजीटी ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) को साझा तौर पर उन इलाकों की जांच करने का निर्देश दिया है, जहां इस तरह की सामग्री रखी है और उनसे स्थिति रिपोर्ट सौंपने को भी कहा है। एनजीटी ने दिल्ली सरकार, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड, डीपीसीसी व अन्य से 30 मार्च से पहले उनका जवाब भी मांगा है।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अगुआई वाले पीठ ने कहा है कि सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया गया है, ताकि वे अपना पक्ष रखें। इस बीच डीपीसीसी व सीपीसीबी उन तमाम परिसरों को खंगालेंगे, जिनका याचिका में उल्लेख किया गया है। वे देखेंगे कि खतरनाक प्रदूषकों का क्या प्रबंधन किया जा रहा है और क्या दावे हैं। वे कचरे से निपटने व ई-कचरा प्रबंधन और जारी गतिविधि के तरीके जिनका याचिका में जिक्र है, से जुड़ी रिपोर्ट अधिकरण को सौंपेंगे। गौरतलब है कि सभी कंपनियों के काम की शर्तों में ई-कचरे के समुचित निपटारे की शर्त अनिवार्य रूप से शामिल है।

इसके अलावा एनजीटी ने पेट्रोल या पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 10 साल से पुराने डीजल ट्रकों पर स्थिति रिपोर्ट नहीं सौंपने को लेकर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाले एक पीठ ने इंडियन आॅयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को एक हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि क्या उनके वाहन बीएस चार का अनुपालन कर रहे हैं या नहीं। अधिकरण ने पिछले साल दिसंबर में तेल कंपनियों को नोटिस जारी किए थे और उन्हें यह बताने का निर्देश दिया था कि क्या उन्होंने पेट्रोल या डीजल का र्इंधन स्टेशनों तक परिवहन के लिए 10 साल से पुराने वाहन का इस्तेमाल किया है? अधिकरण ने कहा कि हमने इन तेल कंपनियों को अल्टीमेटम दिया है और कहा है कि हलफनामे में यह बताया जाना चाहिए कि कितनी संख्या में बीएस1, बीएस 2, बीएस 3 और बीएस 4 के अनुरूप वाहन हैं और वे कितने पुराने हैं।

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