ताज़ा खबर
 

यह गणित नहीं बदला तो गठबंधन के बावजूद बीजेपी का नुकसान नहीं कर पाएंगी सपा, बसपा

आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि सपा-बसपा साथ आ जाएं तो बीजेपी को मुश्किल हो सकती है। वैसे ऐसा तभी होगा, जब सपा और बसपा के समर्थक एक-दूजे के प्रत्याशियों को वोट देंगे। वरना इस हालिया गठजोड़ के लिए भी समस्या पैदा हो सकती है।

Author January 14, 2019 2:40 PM
सपा-बसपा ने लगभग 25 साल पुरानी दुश्मनी भुलाकर 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। (फाइल फोटोः पीटीआई)

आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मात देने के लिए उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भले ही गठजोड़ कर चुकी हों। लेकिन कुछ सियासी गणित नहीं बदले तो इस गठबंधन के बावजूद बीजेपी को कोई नुकसान नहीं होगा। सपा-बसपा के मतदाताओं की दोनों पार्टियों के प्रति वफादारी इसमें सबसे अहम भूमिका निभाएगी। इन बातों के संकेत पिछले चुनावों (2009, 2012, 2014, 2017) के आंकड़ों से लिए जा सकते हैं।

एक नजर में पूर्व के चुनावी आंकड़ेः 2009 में बीजेपी को 17.50 फीसदी वोट मिले थे, जबकि सपा व बसपा के वोट मिलकर तब 50.67 फीसदी थे। 2012 में बीजेपी के खाते में 15 प्रतिशत वोट आए, जबकि सपा-बसपा के वोट मिलाए जाएं तो यह आंकड़ा 40.80 फीसदी था। 2014 में बीजेपी ने 42.32 फीसदी वोट पाए और सपा-बसपा के तब के वोट मिलाएं तो वे 41.80 फीसदी थे। वहीं, 2017 में बीजेपी को 39.67 फीसदी मतदाताओं ने पसंद किया, जबकि बसपा-सपा के संयुक्त रूप से वोट 44.05 फीसदी थे।

सपा-बसपा पर ऐसे आ सकता है संकटः ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि सपा-बसपा के साथ आने से बीजेपी को मुश्किल हो सकती है। वैसे ऐसा तभी होगा, जब सपा और बसपा के समर्थक एक-दूजे के प्रत्याशियों को वोट देंगे। वरना इस हालिया गठजोड़ के लिए भी समस्या पैदा हो सकती है। उदाहरण के तौर पर तीन परिदृष्यों में यह बात समझी जा सकता है।

यूं समझ सकते हैं गणितः पहला 100 फीसदी वोटर बेस लॉयलटी (मतदाता अपने गठजोड़ को वोट देंगे या नहीं) का, दूसरे में 80 फीसदी वोटर बेस लॉयलटी है, जिसमें 20 फीसदी वोट सपा-बसा के वोट इन दोनों के अलावा किसी अन्य दल के हिस्से में जाएंगे। वहीं, तीसरे हालात में 60 फीसदी वोटर बेस लॉयलटी है। इसमें से 40 फीसदी सपा-बसा के मतदाता गठजोड़ को दगा देने वाले होंगे।

सपा-बसपा को सिर्फ 18 सीटें!: अगर सपा व बसा गठबंधन में वोट फीसद का 20 फीसदी हिस्सा गंवा देंगी, तब चुनावी स्थिति बेहद नाटकीय हो जाएगी। एनडीए को 62 सीटें मिलेंगी, जबकि सपा-बसपा के खाते में महज 18 सीटें आएंगी। वहीं, कांग्रेस दो सीटें पा पाएगी।

एनडीए को मिलेंगी 70 पार सीटें?: वहीं, गठजोड़ में सपा और बसपा 40 फीसदी वोट प्रतिशत अगर खो दें, उस परिस्थिति में भी बीजेपी पर खासा प्रभाव नहीं पड़ेगा। एनडीए को तब 74 सीटें आएंगी और सपा-बसपा को सिर्फ छह सीटों से संतोष करना पड़ेगा, जबकि दो सीटें कांग्रेस के खाते में जाएंगी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App