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लोकसभा चुनाव से पहले एक और राज्य में भाजपा विरोधी गठबंधन की सुगबुगाहट?

असम कांग्रेस के प्रभारी व राज्यसभा सांसद रिपुण बोरा के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया, "यह राज्य के हालात और जरूरत पर निर्भर करेगा, तभी हम उनसे (एजीपी) से बात करेंगे।"

Author January 13, 2019 1:43 PM
डिब्रूगढ़ में शुक्रवार को नागरिकता विधेयक को लेकर विरोध जताता ऑल असम ताई अहोम स्टूडेंट्स यूनियन का कार्यकर्ता। वहीं, गुवाहाटी में काला झंडा लहराकर विरोध जताते एएएसयू के कार्यकर्ता। (फोटोः पीटीआई)

लोकसभा चुनाव से पहले एक और राज्य में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) विरोधी गठबंधन की सुगबुगाहट नजर आ रही है। बीजेपी के विकास रथ को बिहार और उत्तर प्रदेश में रोकने के लिए तो गठबंधन हो चुका है, जबकि इसी कड़ी में अगला नंबर असम का हो सकता है। वहां कांग्रेस और असम गण परिषद (एजीपी) के नेताओं ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार वाले नागरिकता (संशोधन) विधेयक ने सूबे में उथल-पुथल मचा रखी है। यही वजह है कि अन्य राजनीतिक दलों चुनावी मैदान में एक हो सकते हैं।

कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई दो मौकों पर राज्य में नए राजनीतिक मोर्चों को लेकर संभावना जता चुके हैं। कांग्रेस की तरफ से पूर्व में यह भी कहा गया था कि एजीपी उसके साथ आकर मिल जाए। हालांकि, मौजूदा समय में ये दोनों ही दल सरकार के बिल का विरोध करते दिख रहे हैं।

असम कांग्रेस के प्रभारी व राज्यसभा सांसद रिपुण बोरा के हवाले से एचटी की रिपोर्ट में कहा गया, “यह राज्य के हालात और जरूरत पर निर्भर करेगा, तभी हम उनसे (एजीपी) से बात करेंगे। राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। कुछ भी हो सकता है। सब कुछ हालात पर निर्भर करता है। अगर जरूरत पड़ेगी, तो हम उस पर (बातचीत, गठजोड़) सोचेंगे।”

दोनों पार्टियां क्या साथ आ सकती हैं? यह पूछे जाने पर एजीपी नेता व पूर्व सीएम प्रफुल्ला कुमार महांता बोले, “नागरिकता विधेयक ही असम अकॉर्ड के क्लॉज छह का उल्लंघन करता है, जो कि हमारे लिए सामान्य आधार है। यह असमवासियों के खिलाफ है।” आगे की रणनीति को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी की केंद्रीय समिति इस मसले (गठजोड़) पर सोचेगी।

बता दें कि शनिवार (12 जनवरी) को लखनऊ स्थित एक होटल में सपा-बसपा ने आगामी चुनाव साथ लड़ने को लेकर गठबंधन का आधिकारिक ऐलान किया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती की पार्टियों ने 38-38 सीटों पर ये चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दो सीटें छोटे दलों व दो सीटें (रायबरेली व अमेठी) कांग्रेस के लिए छोड़ दी गई हैं।

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