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चुनाव: कब और कैसे शुरू हुआ नतीजों से पहले सर्वे का चलन, पढ़ें शुरू होने की कहानी

बड़े पैमाने पर पहली बार ब्रिटेन में 1937 में और फ्रांस में 1938 में नतीजा पूर्व सर्वे हुए। दोनों देशों में तब चुनाव के नतीजे कमोबेश बिलकुल सटीक निकले थे।

भारत में नतीजा पूर्व सर्वे का खाका 1960 में खींचा गया था।

नतीजा पूर्व सर्वे (एग्जिट पोल) का विमर्श इसलिए सामने आया ताकि पत्रकार बिरादरी विभिन्न मसलों पर जनता की नब्ज टटोल सकें। दरअसल को शुरू करने का श्रेय जॉर्ज गैलप और क्लॉड रोबिंसन को जाता है। जॉर्ज और रोबिंसन ने अमेरिकी सरकार के कामकाज पर वहां लोगों की राय जानने की कोशिश की थी। उन्होंने पाया कि सैंपल और रिजल्ट में ज्यादा अंतर नहीं था। उनका यह तरीका काफी मशहूर हुआ, जिसे देखते हुए ब्रिटेन और फ्रांस ने भी इसे अपनाया। बड़े पैमाने पर पहली बार ब्रिटेन में 1937 में और फ्रांस में 1938 में नतीजा पूर्व सर्वे हुए। दोनों देशों में तब चुनाव के नतीजे कमोबेश बिलकुल सटीक निकले थे।

मूल रूप से नतीजा पूर्व सर्वे शुरू करने का श्रेय नीदरलैंड के समाजशास्त्री मार्सेल वॉन को जाता है। मार्सेल वॉन ने 15 फरवरी, 1967 को पहली बार इसका इस्तेमाल डच विधानसभा चुनाव में किया था। मार्सेल पहले राजनीति में थे, लेकिन बाद में राजनीति छोड़ जनता की नब्ज टटोलने का काम करने लगे। नीदरलैंड में हुए चुनाव में उनका आकलन सटीक बैठा था। बेल्जियम, डेनमार्क, जर्मनी और आयरलैंड जैसे देशों में नतीजा पूर्व सर्वे करने को छूट है जबकि चीन, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको में कुछ शर्तों के साथ इसकी इजाजत है।

भारत में कब खींचा गया खाका
भारत में नतीजा पूर्व सर्वे का खाका 1960 में खींचा गया था। इसे सेंटर फॉर द स्टडी आॅफ डेवलपिंग सोसायटीज (सीएसडीएस) ने तैयार किया था। लेकिन 80 के दशक के मध्य में उस वक्तचार्टर्ड अकाउंटेंट से पत्रकार बने प्रणय रॉय ने मतदाताओं की नब्ज टटोलने की कोशिश की थी। यहीं से भारत में पेशेवर स्तर पर एग्जिट पोल की शुरुआत मानी जाती है। दूरदर्शन ने 1996 में सीएसडीएस को देश भर में एग्जिट पोल की अनुमति दे दी। सीएसडीएस के किए नतीजा पूर्व सर्वे में किसी भी दल को बहुमत मिलता नहीं दिखा था। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत हासिल नहीं कर पाई थी। इसके बाद 1998 के लोकसभा चुनाव में हुए नतीजा पूर्व सर्वे ज्यादातर समाचार चैनलों में प्रकाशित हुए। इस चुनाव में चुनावी सर्वे करने वाली बड़ी एजंसियों- इंडिया टुडे-सीएसडीएस, आउटलुक-एसी नीलसन, फ्रंटलाइन-सीएमएस ने एनडीए को बहुमत दूर रखा था।

चुनाव आयोग का प्रतिबंध
शुरुआती दिनों में नतीजा पूर्व सर्वे लोकप्रिय हुए, लेकिन जल्द ही राजनीतिक दलों ने इन पर प्रतिबंध लगाने की मांग शुरू कर दी। 1999 में चुनाव आयोग ने एग्जिट पोल को प्रतिबंधित कर दिया। इसके खिलाफ एक समाचार पत्र ने आयोग के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी थी। कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त कर दिया था।

दिशानिर्देश
वर्ष 2009 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर नतीजा पूर्व सर्वे को प्रतिबंधित करने की मांग उठी। तब चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को प्रतिबंध के संदर्भ में कानून में बदलाव के लिए तुरंत एक अध्यादेश लाए जाने संबंधी पत्र लिखा। 2009 में कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 में संशोधन किया, जिसके तहत चुनावी प्रक्रिया के दौरान जब तक अंतिम वोट नहीं पड़ जाता, नतीजा पूर्व सर्वे नहीं दिखाए जा सकते।

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