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अमेठी: पहली बार कांग्रेस दफ्तर पर लगा ताला, चमक रहा है बीजेपी का नया ऑफिस, स्मृति ने ऐसे फतह किया राहुल का किला

Chunav Result 2019, Lok Sabha Election Results 2019: कांग्रेस के एक स्थानीय नेता योगेन्द्र मिश्रा का कहना है कि किसी को तो हार की जिम्मेदारी लेनी होगी। स्थानीय प्रमुख होने के नाते यह मेरी जिम्मेदारी है। हालांकि उन्होंने इस हार को राहुल गांधी की असफलता मानने से इंकार कर दिया।

Author Published on: May 25, 2019 10:50 AM
अमेठी में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को हरा दिया है।

Election Results 2019: आम चुनावों में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। वहीं देश की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी कांग्रेस अभी भी मरणासन्न हालात में नजर आ रही है। हालांकि बीते लोकसभा चुनावों के मुकाबले कांग्रेस की 8 सीटें बढ़ी हैं, लेकिन इस बार कांग्रेस अपनी पारंपरिक सीट अमेठी से हार गई। गौरतलब बात ये है कि यह सीट गांधी परिवार का गढ़ मानी जाती रही है और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस सीट से पिछले 15 सालों से सांसद रहे हैं। लेकिन इस बार भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को हराकर लंबे समय से अमेठी सीट पर चला आ रहा गांधी परिवार का दबदबा खत्म कर दिया है। अब अमेठी में भी इस हार-जीत का असर दिखने लगा है। कभी अमेठी का कांग्रेस कार्यालय पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से गुलजार रहता था, वहां अब ताला लटका हुआ है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने अमेठी में अपना नया कार्यालय खोल लिया है और जो रौनक कभी कांग्रेस कार्यालय पर होती थी, वो अब भाजपा कार्यालय पर नजर आ रही है।

दो महीने पहले ही भाजपा का ऑफिस शुरू हुआ है, इससे पहले अस्थायी ठिकाने से भाजपा अमेठी में काम कर रही थी। नया ऑफिस एक तीन मंजिला इमारत है, जिसमें हर कमरे में एयर कंडिशनर और शानदार फर्नीचर लगा हुआ है। ऑफिस में एक कॉन्फ्रेंस हॉल है, जिसमें एक वक्त में 300 लोग बैठक कर सकते हैं। इसके अलावा एक आईटी रूम भी है। इमारत की चकाचौंध ऐसी है कि अमेठी में किसी अन्य राजनैतिक पार्टी का ऐसा कार्यालय नहीं है। कांग्रेस कार्यालय से भाजपा का ऑफिस सिर्फ 2 किलोमीटर की दूरी पर है। ऑफिस देखकर लोगों का मानना है कि भाजपा यहां लंबी पारी खेलने के मूड में है।

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स्मृति ईरानी की जीत की बात करें तो लोगों का कहना है कि भाजपा नेता ने अमेठी में काफी मेहनत की है। साल 2014 के लोकसभा चुनावों में हारने के बाद भी स्मृति ईरानी लगातार अमेठी के दौरे करती रहीं और यहां की जनता के संपर्क में रहीं और जरुरत के समय अमेठी की जनता के साथ खड़ी रहीं। माना जा रहा अमेठी में अभी और कांग्रेस समर्थक भाजपा की ओर जा सकते हैं। भाजपा नेताओं का मानना है कि जिन लोगों को सरकारी योजनाओं के तहत आवास, एलपीजी, हैंडपंप आदि की सुविधाएं मिलेंगी, तो और लोग भाजपा के समर्थन में आ सकते हैं।

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस में हार के बाद निराशा का माहौल है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष योगेन्द्र मिश्रा ने तो अपने इस्तीफे की पेशकश की है। द इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में योगेन्द्र मिश्रा ने बताया कि किसी को तो हार की जिम्मेदारी लेनी होगी। स्थानीय प्रमुख होने के नाते यह मेरी जिम्मेदारी है। हालांकि योगेन्द्र मिश्रा ने कहा कि इस हार को राहुल गांधी की असफलता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। भाजपा ने जीत के लिए पूरा जोर लगाया था। हमें विश्वास है कि अमेठी की जनता एक बार फिर गांधी परिवार का समर्थन करेगी और हम वापसी करेंगे।

वहीं एक स्थानीय व्यक्ति अनुज रायदास का कहना है कि राहुल गांधी अमेठी कम आते थे और इस बार उन्हें अपनी हार का आभास भी हो गया था, यही वजह थी कि उन्होंने दूसरी जगह से भी चुनाव लड़ने का फैसला किया। यदि राहुल को हमारी चिंता नहीं है तो हम उनकी चिंता क्यों करें?

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