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सिंधिया के साथ सेल्फी लेने पर उड़ा था जिस शख्स का मजाक, उसी ने गुना सीट पर तोड़ा रजवाड़े का रिकॉर्ड

Lok Sabha Chunav/Election Results 2019: सिंधिया परिवार के गढ़ गुना लोकसभा सीट पर बीजेपी के केपी यादव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को करारी शिकस्त दी है।

गुना में केपी यादव ने ज्योतरादित्य सिंधिया को हरा दिया है : फोटो सोर्स- @Oyevivekk/ट्विटर

Election Results 2019: लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आ चुके हैं। इस चुनाव में एक बार फिर से सत्ताधारी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को बहुमत हासिल हुआ है। बीजेपी ने अकेले ही 300 से अधिक सीटों का आंकड़ा पार कर लिया। ऐसे में बीजेपी की आंधी में कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी एमपी की गुना सीट से करारी हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें बीजेपी के कृष्ण पाल यादव (केपी यादव) ने एक लाख से ज्यादा मतों से हराया है। लेकिन इस बीच उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है, जिसमें वह गाड़ी के अंदर बैठे ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ दूर से ही सेल्फी लेने की कोशिश कर रहे हैं।
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सोशल मीडिया में एक फोटो हुई वायरल: केपी यादव की जीत के बाद सोशल मीडिया में एक फोटो खूब वायरल हो रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि एक समय केपी यादव सेल्फी लेने के सिंधिया से कह रहे थे लेकिन उन्होंने मना कर दिया। हालांकि अब उन्हीं केपी ने सिंधिया को चुनाव में शिकस्त दे दी। आज तक में छपी खबर के मुताबिक ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया ने सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट की थी जिसमें कहा गया कि जो कभी महाराज (सिंधिया) के साथ सेल्फी लेने की लाइन में रहते थे, उन्हें बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बनाया है।

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सिंधिया के करीबी: बताया जा रहा है कि एक समय केपी यादव ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाते थे। यही नहीं वह सिंधिया की चुनावी तैयारियों पर भी नजदीक से नजर रखते थे। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो मुंगावली विधानसभा में सिंधिया के कहने के बाद उपचुनाव लड़ने के लिए तैयार केपी यादव को जब ऐन मौके पर रोक दिया गया तो उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का फैसला कर लिया।

कौन हैं केपी यादव: बताया जा रहा है कि गुना लोकसभा सीट से जीत हासिल करने वाले केपी यादव कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी रहे थे। लेकिन मध्य प्रदेश में चुनाव के दौरान अपनी अनदेखी की वजह से वह कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए। केपी पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर हैं, जबकि उनके पिता अशोकनगर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं।

सिंधिया राजपरिवार का गढ़ है गुना: बता दें कि गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र को ग्वालियर के सिंधिया राजघराने का गढ़ माना जाता है। यहां अब तक हुए उपचुनाव समेत 20 चुनाव में सिंधिया राजघराने के प्रतिनिधियों को 14 बार जीत हासिल हुई है। बता दें कि गुना सीट पर सिंधिया परिवार के सदस्य को अब तक कभी हार नहीं मिली थी। हालांकि 1952, 1962 और 1984 में सिंधिया परिवार का कोई सदस्य इस सीट से चुनाव नहीं लड़ा था। राजमाता विजयाराजे सिंधिया एक बार चुनाव हारी थीं लेकिन वह सीट रायबरेली थी।

सिंधिया को दी शिकस्त: जानकारों का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने जब बीजेपी ने उनके ही करीबी रहे केपी यादव को मैदान में उतारा तो कहा गया कि सिंधिया बड़ी आसानी से गुना में जीत हासिल कर लेंगे। लेकिन इसके उलट केपी ने सिंधिया को गुना लोकसभा सीट से एक लाख से अधिक मतों से हरा दिया। बता दें कि इस सीट से विजयराजे सिंधिया 6 बार, माधवराव सिंधिया 4 बार और ज्योतिरादित्य ने 4 बार चुनाव जीता है। ऐसे में सिंधिया के गढ़ में केपी का जीतना काफी कुछ कहता है।

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