ताज़ा खबर
 

Election Results 2019: त्वरित प्रतिक्रिया- 2019 के आम चुनाव में इन पांच कारणों से हुई राहुल गांधी की हार

Lok Sabha Chunav/Election Results 2019: पश्चिम बंगाल में तो लड़ाई हिन्दू-मुस्लिम पर जा टिकी और इसका स्पष्ट फायदा हिन्दू वोटरों के ध्रुवीकरण के तौर पर भाजपा को मिला। वहां पहली बार भाजपा ने डबल डिजिट का आंकड़ा पार कर लिया है।

Author नई दिल्ली | May 23, 2019 4:10 PM
(कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी) (Express file Photo by Tashi Tobgyal)

Election Results 2019: लोकसभा चुनाव नतीजों के मिल रहे रुझानों से स्पष्ट हो चुका है कि केंद्र में फिर से नरेंद्र मोदी की सरकार बनने जा रही है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि 2019 में 2014 से ज्यादा मोदी लहर है। समाज के निचले तबके में चल रहे अंडर करंट को तो राजनीतिक दिग्गज और बड़े-बड़े चुनावी विश्लेषक भी नहीं भांप सके। दरअसल, मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की वजह से समाज के निचले तबके के लोगों ने दिल खोलकर भाजपा को वोट दिया, जबकि विपक्षी नेता खासकर राहुल गांधी की न्याय योजना जिसके तहत गरीबों को सालाना 72,000 रुपये देने का ऐलान किया गया था, वो उन पर असर नहीं डाल सका। यूपी जैसे राज्यों में विपक्षी दलों की एकता भी मोदी लहर को कम नहीं कर सकी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वो क्या कारण हैं, जिसकी बदौलत नरेंद्र मोदी की प्रचंड जीत और राहुल गांधी की हार हुई?

Lok Sabha Election Result 2019 Online LIVE Updates: यहां देखें पल-पल की अपडेट्स

कमजोर जातीय, सामाजिक और धार्मिक ध्रुवीकरण: 2014 में जहां भाजपा ने विकास के नाम पर वोट मांगे थे और कांग्रेस के करप्शन राज से मुक्ति की चाह में लोगों ने भाजपा को गले लगाया था, वहीं 2019 में कांग्रेस राफेल घोटाले को उछालकर भी मोदी सरकार के खिलाफ जनमानस में जगह नहीं बना सकी। उधर, भाजपा में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने सरकार की उपलब्धियों के अलावा हरेक राज्य के स्तर पर जातीय, धार्मिक और सामाजिक गोलबंदी की। इसका असर हुआ कि पिछड़े वर्ग में गैर यादव और गैर मुस्लिम को छोड़कर बाकी समुदाय का अधिकांश वोट भाजपा को ट्रांसफर हो गया। इसी तरह दलितों में खासकर यूपी में गैर जाटव वोट भाजपा को मिले। पश्चिम बंगाल में तो लड़ाई हिन्दू-मुस्लिम पर जा टिकी और इसका स्पष्ट फायदा हिन्दू वोटरों के ध्रुवीकरण के तौर पर भाजपा को मिला। वहां पहली बार भाजपा ने डबल डिजिट का आंकड़ा पार कर लिया है।

भाजपा का आक्रामक और बहुआयामी चुनाव प्रचार: कांग्रेस के मुकाबले नरेंद्र मोदी का चुनावी प्रचार कहीं ज्यादा और कई गुणा ज्यादा आक्रामक रहा है। राहुल गांधी जहां राफेल डील में घोटाला और चौकीदार चोर है का नारा लगवाते नजर आए, वहीं पीएम मोदी बोफोर्स घोटाले से लेकर, भोपाल गैस त्रासदी, सिख दंगा और राजीव गांधी द्वारा आईएनएस विक्रांत के इस्तेमाल पर भी कांग्रेस को घेरा। अपनी आक्रामक शैली में मोदी ने राहुल गांधी को हर सभा में नामदार और खुद को निचली जाति का सदस्य कहकर समाज के निचले तबके से कनेक्शन जोड़ा और उनकी सहानुभूति हासिल की जो वोटों के रूप में तब्दील हुआ। राज्यों के हिसाब से पीएम मोदी और अमित शाह ने विपक्षी दलों पर भी आक्रामक अंदाज में हंगामा बोला। मसलन, बिहार में लालू परिवार पर तो यूपी में माया-अखिलेश पर और जब वे लोग पश्चिम बंगाल में रहे तो ममता बनर्जी, उनके परिवार और टीएमसी कार्यकर्ताओं पर गुंडई का आरोप लगाकर वोटरों को लामबंद करने की कोशिश की।

नरेंद्र मोदी की जगह प्रतिद्वंदी चेहरे की कमी, विपक्षी दलों में एका का अभाव: भाजपा और एनडीए की तरफ से स्पष्ट था कि नरेंद्र मोदी पीएम बनेंगे लेकिन 22 दलों के विपक्ष में एक भी चेहरा स्पष्टता से आगे नहीं था, जिसके लिए यह कहा जाता कि अमुक व्यक्ति पीएम पद का प्रत्याशी है। अलबत्ता हालात तो ऐसे थे कि ममता बनर्जी, मायावती, चंद्रबाबू नायडू अलग-अलग पीएम पद के दावेदार थे। चुनावी रैलियों में भी भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर बार-बार विपक्ष को घेरा कि 22 दलों की बारात का दूल्हा कौन है। इनके अलावा एनडीए ने जहां सभी राज्यों में एक होकर चुनाव लड़ा वहीं सैद्धांतिक तौर पर एक रहने वाले विपक्षी सूरमाओं ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। इससे वोटों का बंटवारा हुआ। यूपी में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां ओबीसी और मुस्लिम वोटों का विखराव सपा-बसपा-रालोद गठबंधन और कांग्रेस के बीच हुआ जबकि सवर्ण, गैर जाटव दलित वोटों और ईबीसी वोटर भाजपा के पक्ष में एकजुट दिखे।

मोदी राज की कल्याणकारी योजनाओं का असर और सोशल मीडिया पर धूम: समाज का एक बड़ा तबका ऐसा है, जिसपर जातीय गोलबंदी का असर नहीं पड़ा बल्कि मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ का असर उन पर पड़ा और उन लोगों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया। ऐसे वोटरों को विपक्षी गठबंधन अपना वोट बैंक समझता रहा, जबकि अंडर करंट की वजह से ऐसे लोगों का वोट सीधे भाजपा को ट्रांसफर हो गए। इतना ही नहीं भाजपा ने बूथ मैनेजर, पन्ना प्रमुखों और सोशल मीडिया वॉरियर्स के जरिए गांव-गांव और बूथ लेवल तक मतदाताओं से संवाद स्थापित किया। मोदी सरकार की उपलब्धियां बताईं और यह समझाने में कारगर रही कि देश सुरक्षित हाथों में है। इसका असर जीत के रूप में दिख रहा है।

भाजपा का राष्ट्रवाद, हिन्दू आतंकवाद, विपक्षी परिवारवाद पर वार: चुनाव की तारीखों का ऐलान होने से पहले एयरफोर्स द्वारा बालाकोट में किए गए एयर स्ट्राइक का व्यापक असर मतदाताओं पर पड़ा, ऐसा नजर आता है। इसके बाद मोदी के हाथों में देश सुरक्षित होने का दावा भाजपा ने चुनावी रैलियों में किया। इससे इतर भाजपा ने मालेगांव धमाकों की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से कैंडिडेट बनाकर हिन्दू आतंकवाद की धारणा पर न केवल चोट किया बल्कि हिन्दू मतदाताओं को कांग्रेस के खिलाफ लामबंद भी किया। भाजपा ने चुनावी रणनीति के तहत विपक्षी खेमे के परिवारवाद पर भी हमला किया। इसमें बिहार में लालू परिवार, यूपी में मुलायम परिवार को निशाने पर रखा।

कुल मिलाकर देखें तो इस चुनाव में मोदी समर्थक और मोदी विरोध की दो धारा स्पष्ट तौर पर दिखीं। इसके अलावा चुनावी राजनीति के पुराने जातीय वर्चस्व और समीकरण भी ध्वस्त होते नजर आए। लोगों में यह भी देखने को मिला कि राज्य में वो किसी क्षेत्रीय दल का समर्थन कर रहे हैं जबकि केंद्र में मोदी सरकार चाहते हैं।

Follow live coverage on election result 2019. Check your constituency live result here.

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X