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हर जगह हारे लेकिन यहां बीजेपी की मेहनत का कांग्रेस ने उठाया फायदा

Chunav Result 2019, Lok Sabha Election Results 2019: भाजपा को बीते लोकसभा चुनावों में 15.06 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं इस बार इसमें सिर्फ 0.5 प्रतिशत का इजाफा हो सका।

राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने का भी पार्टी को फायदा मिला। (PTI Photo)

Election Results 2019: आम चुनावों में भाजपा ने तगड़े बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। कई राज्यों में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया, वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस कई राज्यों में खाता भी नहीं खोल सकी। लेकिन एक राज्य में स्थिति इसके उलट नजर आयी, जहां कांग्रेस ने एक सीट को छोड़कर बाकी सभी पर जीत हासिल की, वहीं भाजपा अपना खाता भी नहीं खोल सकी। यह राज्य है केरल। हैरानी की बात ये है कि इस बार सबरीमाला मंदिर विवाद को लेकर भाजपा ने जिस तरह से राज्य में आंदोलन का नेतृत्व किया था, उसे देखते हुए आम चुनावों में भाजपा को फायदा मिलने की उम्मीद लगायी जा रही थी। लेकिन नतीजे आए तो भाजपा की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है।

बता दें कि केरल में लोकसभा की 20 सीटें हैं, जिनमें से 19 पर कांग्रेस को जीत मिली है। चुनावों से कुछ माह पहले ही केरल में सबरीमाला मंदिर को लेकर विवाद हुआ था। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दे दी थी। जबकि इससे पहले धार्मिक मान्यताओं के चलते इस पर रोक थी। हालांकि केरल के हिंदू संप्रदाय ने कोर्ट के इस फैसले का विरोध किया और इसे धार्मिक मान्यताओं में दखल माना। भाजपा ने भी इस मसले पर लोगों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक का समर्थन किया। इसे लेकर पूरे केरल में विरोध प्रदर्शन हुए और सैंकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में कई भाजपा के नेता थे। आरएसएस का केरल में संगठन काफी मजबूत है, लेकिन अभी तक आरएसएस का यह समर्थन भाजपा के लिए वोटों में तब्दील नहीं हो पाया है।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सबरीमाला विवाद के चलते केरल की तिरुवअनंतपुरम, पत्तनमतित्ता और त्रिशूर सीटें काफी अहम थी। दरअसल ये तीनों ही सीटें सबरीमाला मंदिर विवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित रहीं। ऐसे में भाजपा ने इन सीटों पर अपने सबसे मजबूत उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन एक भी सीट पर भाजपा को जीत नहीं मिल सकी। भाजपा को बीते लोकसभा चुनावों में 15.06 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं इस बार इसमें सिर्फ 0.5 प्रतिशत का इजाफा हो सका।

क्या रहा कारणः नतीजे देखने के बाद माना जा रहा है कि सबरीमाला मंदिर विवाद के बाद भाजपा के लिए राज्य में समर्थन बढ़ा था, लेकिन यह समर्थन वोटों में तब्दील नहीं हो पाया। इसके अलावा सबरीमाला विवाद को लेकर सत्ताधारी एलडीएफ के खिलाफ नाराजगी थी। चूंकि केरल में एलडीएफ को टक्कर अभी कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ ही दे सकता था और भाजपा अभी राज्य में उस स्थिति में नहीं है। इसलिए ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि लोगों ने एलडीएफ से नाराजगी के फलस्वरुप यूडीएफ को वोट दिया।

इसके अलावा माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने के कारण भी राज्य में कांग्रेस को फायदा मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, केरल की प्रभावशाली नायर सर्विस सोसाइटी ने सबरीमाला विवाद पर इसका मुखर विरोध किया था और कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की थी। नायर सर्विस सोसाइटी ने सबरीमाला विवाद पर भाजपा का समर्थन भी किया था। हालांकि इस संगठन के वोट भाजपा को नहीं मिल सके। इसके पीछे की वजह ये मानी जा रही है कि भाजपा ने सत्ता में होने के बावजूद कोर्ट के फैसले के खिलाफ अध्यादेश लाने का प्रयास नहीं किया। इससे लोगों को लगा कि शायद भाजपा की सबरीमाला विवाद को सुलझाने के दिलचस्पी नहीं है और वह सिर्फ इस मुद्दे को गरमाकर वोट लेना चाहती है।

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