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Poll Result 2019: सोनिया गांधी के आवास पर मां-बहन के अपमान से उठी थी जगन रेड्डी की आंधी! 2019 में पूरी हुई सौगंध

Poll Result 2019: जगनमोहन रेड्डी की मां और उनकी बहन जब हैदराबाद से दिल्ली स्थित सोनिया गांधी के निवास स्थल 10 जनपथ पहुंची तब उनका अभिवादन बड़ी बेरूखी से किया गया।

Author May 24, 2019 8:36 PM
लोकसभा चुनावों में भले ही मोदी की सुनामी थी। लेकिन, आंध्र प्रदेश में एक ही चेहरा हावी था- जगनमोहन रेड्डी। कांग्रेस से अलग होकर पार्टी बनाने वाले रेड्डी की कहानी बड़ी दिलचस्प है। (फोटो सोर्स:REUTERS)

चुनाव नतीजों (Election Result 2019) में अगर मोदी की सुनामी है, तो आंध्र प्रदेश में भी वाईएसआर कांग्रेस की लहर दिखाई दे रही है। राज्य की लोकसभा और विधानसभा सीटों पर सिर्फ पार्टी प्रमुख जगन रेड्डी की आंधी है। ऐसा नहीं कि जगन की आंधी महज दो-चार सालों का नतीजा है। इनकी कहानी बिल्कुल वैसे ही है, जैसे दक्षिण भारतीय फिल्मों में किसी हीरो की होती है। पिता की दुर्घटना में मृत्यु के बाद कांग्रेस हाईकमान के कठोर और बदले तेवर के बीच जगनमोहन रेड्डी ने एक नई लकीर खींची और सीधे-सीधे 10 जनपथ को ललकारना शुरू कर दिया। इस दौरान मुकदमे, जेल, विरोधियों के हमले तमाम उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ा। लेकिन जगन रेड्डी राजनीति में अपनी अलग शख्सियत बनाने में कामयाब रहे।

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कांग्रेस के दिग्गज नेता और आंध्र के मुख्यमंत्री वाईएसआर की हेलिकॉप्टर क्रैश में मृत्यु के बाद परिस्थितियां ऐसे बदलीं कि उनके परिवार और 10 जनपथ (सोनिया गांधी का निवास स्थल) के बीच खाई चौड़ी हो गई। दरअसल, बात वर्ष 2010 के मध्य की है। वाईएसआर की विधवा और जगन रेड्डी की मां विजयलक्ष्मी (विजयम्मा) अपनी बेटी शर्मिला रेड्डी के साथ हैदराबाद से दिल्ली स्थित सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पहुंचीं। लेकिन, तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पर उनके साथ व्यवहार कुछ खास गर्मजोशी वाला नहीं था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनिया गांधी की तरफ से विजयम्मा और शर्मिला को खास तवज्जो नहीं मिली। इन्हें तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष से मिलने के लिए 10-15 मिनट का इंतजार करना पड़ा। इसके बाद जब ड्राइंग रूम में दोनों दाखिल हुईं, तब उनका सामना सोनिया गांधी के साथ हुआ। सोनिया गांधी का व्यवहार सामान्य से हटकर कुछ सख्त था।

मुलकात के चंद पल बीतते ही सोनिया ने विजयम्मा को उनके बेट जगनमोहन रेड्डी की ‘ओदारपू’ यात्रा स्थगित करने के लिए कहा। जगन रेड्डी उन लोगों के घर पहुंच रहे थे, जिन्होंने उनके पिता की मृत्यु के वियोग में आत्महत्याएं कर ली थीं। जगन अपनी यात्रा के बीच पड़ाव में थे और सोनिया चाहती थीं कि वह इसे तत्काल प्रभाव से रोक दें।

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मीडिया रिपोट्स के मुताबिक सोनिया गांधी की बात सुनकर विजयम्मा सन्न रह गईं। हालांकि, उन्होंने गांधी को ‘ओदारपू’ यात्रा के बारे समझाने की कोशिश कीं, मगर सोनिया अपनी कुर्सी से उठीं और उन्हें विवादित यात्रा रोकवाने को कहा। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष के इस व्यवहार से आहत जगन की मां और बहन हैदराबाद लौट आए। लेकिन, इस दौरान उन्होंने अपमान का बदला लेने की कसम खा ली। रायलसीमा में एक बार वाईएसआर परिवार की तरफ से कहा भी गया, “जब रेड्डी किसी के खिलाफ कसम खा लेता है, तो उसे तब तक चैन नहीं मिलती जब तक सामने वाले को सबक न सीखा दे। या तो वह अपना बदला पूरा करता है या फिर अपने आपको बर्बाद कर डालता है।”

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जगनमोहन रेड्डी को जब सोनिया गांधी द्वारा अपनी मां और बहन के साथ पेश आए रूखे व्यवहार की जानकारी मिली तब वह काफी नाराज हुए थे। उन्होंने अपने परिवार और करीबियों को संकेत दे दिया कि जल्द ही वह अपनी नई पार्टी बनाएंगे और गांधी परिवार को सबक सिखाएंगे। इस दौरान उन्होंने आंध्र से कांग्रेस को खत्म करने की मंशा भी जाहिर कर दी। गौरतलब है कि जब जगनमोहन के पिता वाईएसआर की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हुई, तब वह खुद को प्रदेश में उनका उत्तराधिकारी मान रहे थे। यहां तक कि सीएम की कुर्सी नहीं मिलने की सूरत में खुद को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने का भी ख्वाब देख रहे थे। लेकिन, सोनिया गांधी के सलाहकारों ने उन्हें जगन से दूरी बनाए रखने की सलाह दी।

सलाहकारों की बात मानते हुए सोनिया गांधी ने ऐसे व्यक्ति को आंध्र का सीएम बना दिया जो गांधी परिवार का पुराना वफादार तो था, लेकिन जमीन पर उसका कोई जनाधार नहीं था। सोनिया गांधी ने के रोसैया को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। जबकि, उस वक्त पूरी कांग्रेस पार्टी और विधायक वाईएसआर परिवार के साथ खड़े थे। गौरतलब है कि उस दौरान जगनमोहन रेड्डी के समर्थन में 117 विधायकों खड़े थे। लेकिन, हाईकमान ने इसे पूरी तरह दरकिनाकर कर दिया। के. रोसैया के सीएम बनने के बाद आंध्र प्रदेश कांग्रेस में बगावती सुर उठने लगे। हालांकि, इस दफे भी हाईकमान ने जगनमोहन रेड्डी पर नहीं बल्कि किरण कुमार रेड्डी पर अपना हाथ रखा और उन्हें सीएम बना दिया।

उसी दौरान जगन मोहन ने पार्टी छोड़ी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की नींव रखी। उन्होंने कडपा सांसद पद से इस्तीफा दिया और उपचुनाव में भारी अंतर से जीत हासिल की। इस दौरान जगन रेड्डी एक सफल बिजनसमैन भी थे। लेकिन, इसी दौरान उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले दर्ज होने शुरू हो गए। उन्हें और उनके करीबी को जेल में भेज दिया गया। इस दौरान उनके परिवार ने इसके पीछे सीधे तौर पर सोनिया गांधी पर आरोप लगाए। 2013 में जमानत मिलने तक वह 18 महीनों तक हैदराबाद की जेल में रहे। 2014 लोकसभा चुनाव के बाद से ही जगन रेड्डी ने एक खास रणनीति के तहत लोगों से संपर्क स्थापित करना शुरू किया। उन्होंने आंध्र प्रदेश में लगभग 3,600 किलोमीटर की पदयात्रा की और पार्टी के लिए समर्थन हासिल किया।

2019 लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में नतीजे सबके सामने हैं। जगनमोहन रेड्डी की पार्टी ने 17वीं लोकसभा की कुल 25 सीटों में से 22 पर कब्जा जमा लिया, जबकि 3 पर टीडीपी काबिज हो गई। वहीं, विधानसभा की भी 175 सीटों में से 151 पर सफलता हासिल कर ली। इस दौरान लोकसभा हो या विधानसभा कांग्रेस दोनों ही चुनावों में ‘शून्य’ में चली गई।

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