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एक चुनाव आयुक्त ने माना कि पीएम ने तोड़ी आचार संहिता, पर बहुमत खिलाफ

चुनाव आयोग एक्ट, 1991 की धारा 10 के मुताबिक 'जहां तक संभव हो चुनाव आयोग में फैसले एकमत से होने चाहिए। यदि किसी मामले में चुनाव आयोग के सदस्यों के मत भिन्न हैं, तो ही बहुमत के आधार पर फैसला होना चाहिए।'

Lok Sabha Election 2019पीएम मोदी एक रैली के दौरान। (PTI Photo)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बीते दिनों चुनाव प्रचार के दौरान आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के आरोप लगे थे। हाल ही में चुनाव आयोग ने उन पर सुनवाई की और उनमें से तीन मामलों में पीएम मोदी को क्लीन चिट दे दी। हालांकि तीन में से दो मामलों में क्लीन चिट देने का फैसला एकमत से नहीं हुआ और एक चुनाव आयुक्त ने पीएम मोदी को क्लीन चिट देने का विरोध किया। लेकिन आखिरकार बहुमत के आधार पर प्रधानमंत्री को क्लीन चिट दे दी गई। बता दें कि 1 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्धा में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी के केरल के वायनाड से चुनाव लड़ने पर निशाना साधा था और कहा था कि ‘राहुल गांधी वहां से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां बहुसंख्यक कम हैं और अल्पसंख्यक ज्यादा।’

इसके अलावा 9 अप्रैल को लातूर में एक रैली के दौरान पीएम ने ‘पहली बार वोट करने जा रहे युवाओं का आह्वान करते हुए उन्हें बालाकोट एयर स्ट्राइक के नाम पर वोट देने की अपील की थी।’ पीएम की इस अपील के खिलाफ कांग्रेस चुनाव आयोग पहुंच गई थी। अब इन दोनों मामलों में चुनाव आयोग से पीएम मोदी को क्लीन चिट तो मिल गई है, लेकिन क्लीन चिट देने का फैसला एकमत से नहीं हुआ। चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा, चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और सुशील चंद्रा शामिल हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक उपरोक्त दोनों मामलों में 2-1 के मत से फैसला हुआ। वहीं बीते दिनों बाड़मेर में दिए गए अपने भाषण को चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में पीएम मोदी को एकमत से क्लीन चिट दी गई है। बाड़मेर में पीएम ने अपने भाषण में न्यूक्लियर हथियारों को लेकर पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा था कि ‘हमने इन्हें दिवाली के लिए नहीं रखा है।’

खबर के अनुसार, चुनाव आयोग एक्ट, 1991 की धारा 10 के मुताबिक ‘जहां तक संभव हो चुनाव आयोग में फैसले एकमत से होने चाहिए। यदि किसी मामले में चुनाव आयोग के सदस्यों के मत भिन्न हैं, तो ही बहुमत के आधार पर फैसला होना चाहिए।’ उल्लेखनीय है कि जब से उपरोक्त कानून लागू हुआ है, तब से दुर्लभ मामलों में ही बहुमत से फैसला हुआ है अन्यथा चुनाव आयोग ने आचार संहिता उल्लंघन के मामलों पर अधिकतर फैसले एकमत से ही लिए हैं।

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