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Lok Sabha Election 2019: यूपी की 47 लोकसभा सीटों पर यादव, मुस्लिम और दलित समीकरण मजबूत, BJP के लिए मुश्किल है सपा-बसपा के किले को भेद पाना

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): यूपी की 10 लोकसभा सीटों पर मुस्लिम, यादव और दलित समुदाय के लोगों की संख्या 60 फीसदी से ऊपर है। इनमें आजमगढ़, घोसी, डुमरियागंज, फीरोजाबाद, जौनपुर, अंबेडकर नगर, भदोही, बिजनोर, मोहनलालगंज और सीतापुर शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर मुसलमान, यादव और दलित जातियों की संयुक्त आबादी 40 फीसदी से अधिक है। 47 सीटों पर तो 60 फीसदी से अधिक है। (फोटो क्रेडिट/ANI Twitter Handle)

Lok Sabha Election 2019: कहा जाता है कि दिल्ली में सत्ता की सिढ़ी उत्तर प्रदेश से होकर गुजरती है। 80 लोकसभा सीट वाले इस बड़े राज्य पर सभी की नज़रें टिकी हुई हैं। बीजेपी ने जहां 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर पर सवार होकर प्रदेश में अपना एक-छत्र राज कायम किया था, वहीं 2019 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के गठजोड़ ने इस बार उसकी ताकत को कमजोर कर दिया है। विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए सर्वेक्षण बता रहे हैं कि जाति आधारित चुनाव के गढ़ उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा और आरएलडी का गठबंधन सभी दूसरे दलों पर भारी पड़ रहा है।

इंडिया टुडे ने सी-वोटर के हवाले से एक रिपोर्ट पब्लिश किया है, जिसमें बताया गया है कि उत्तर प्रदेश की 47 सीटों पर बीजेपी की हालत बेहद खस्ताहाल है। मुस्लिम, यादव और दलित बहुल इन लोकसभा सीटों पर बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत करने की जद्दोजहद में लगी है। कहा जा रहा है कि ये 47 लोकसभा सीटें ही बीजेपी के भाग्य का फैसला करेंगी। क्योंकि, इन सीटों पर मुस्लिम, यादव और दलित(MYD) समुदाय की आबादी 50 फीसदी से भी ऊपर है। वैसे अगर सी-वोटर डाटा की माने तो उत्तर प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों पर MYD समुदाय लगभग 40 फीसदी से अधिक है।

गौरतलब है कि बसपा और सपा ने उत्तर प्रदेश में क्रमश: 38 और 37 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। जबकि, 3 सीटें राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के खाते में हैं। हालांकि, इन दिनों दलों ने कांग्रेस की अमेठी और रायबरेली लोकसभा क्षेत्र में अपना कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने भी लोकसभा चुनाव लड़ रहे सपा प्रमुख अखिलेश यादव के परिवार वालों के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने की घोषणा की है। सी-वोटर का कहना है कि सपा-बसपा गठबंधन का लाभ अब पूरी तरह से जातीय समीकरण और उनके रूझान का वोट में तब्दील होने पर निर्भर करता है।

MYD समीकरण और चुनावी राजनीति

उत्तर प्रदेश और बिहार में जाति आधारित चुनावी मुहिम काफी पहले से मजबूत स्थिति में रही है। जातीय समीकरणों को साधकर अभी तक सभी दलों ने सत्ता की कुर्सी हासिल की है। ऐसे में अगर समुदाय विशेष की संख्या बल की बात करें तो 2011 जनगणना के मुताबिक उत्तर प्रदेश में मुसलमान 19 फीसदी और दलित 21 फीसदी हैं। हालांकि, ओबीसी में जातीय क्रम में कोई डाटा सार्वजनिक नहीं किया गया है। लेकिन, फिर भी माना जाता है कि यूपी में यादवों की आबादी 9-10 फीसदी है। ऐसे में ये तीनों समुदाय पूरे प्रदेश की आबादी का आधा हिस्सा हैं।

बसपा के पास दलित वोट बैंक है, जबकि समाजवादी पार्टी को यादव और मुस्लिम मतदाताओं का मजबूत समर्थन हासिल है। इस समीकरण से पैदा हुई ताकत के दम पर अखिलेश और मायावती का गठबंधन मोदी की मुहिम को चुनौती दे रहा है। सी-वोटर्स ने प्रत्येक लोकसभा में MYD समुदायों की संख्या का आंकलन किया है, जिसमें स्थिति मोदी ब्रिगेड के लिए ठीक नहीं है। सर्वे में पाया गया कि 80 लोकसभा सीटों में से 10 पर तो MYD समुदाय की संख्या 60 फीसदी से ऊपर है। इनमें आजमगढ़, घोसी, डुमरियागंज, फीरोजाबाद, जौनपुर, अंबेडकर नगर, भदोही, बिजनोर, मोहनलालगंज और सीतापुर शामिल है। आजमगढ़ से ही 2014 में मुलायम सिंह यादव लोकसभा सांसद चुने गए थे। इस लोकसभा क्षेत्र में MYD आबादी 68.3 फीसदी के आसपास है। उस दौरान जब यूपी में बीजेपी ने सभी दलों का सुपड़ा साफ किया था तब मुलायम ने यहां से 3,40,306 वोट हासिल किए थे, जो कि कुल पोल हुए वोट का 35.43 फीसदी था।

इनके अलावा बाकी की 37 लोकसभा सीटों पर MYD आबादी 50 से 60 फीसदी के बीच में हैं। इनमें अमेठी, रायबरेली और मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र शामिल हैं। बाकी की 33 लोकसभा क्षेत्रों में MYD समुदाय की संख्या 40 से 50 फीसदी के बीच है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट वाराणसी शामिल है।

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