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Rajasthan Elections:वंशवाद में पीछे नहीं भाजपा, 160 विधायकों में से 23 हैं लिस्ट में शामिल

बता दें कि राजस्थान में कुल 31 चेहरे ऐसे हैं जो वंशवाद को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे में एक नजर भाजपा के उन चेहरों पर जो इस लिस्ट में शामिल हैं साथ ही जानेंगे कि क्या कहना है उनका वंशवाद पर..

Chhattisgarh Vidhan Sabha Election Result 2018: भाजपा का झंडा, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

चुनावी माहौल में कई बार भाजपा- कांग्रेस वंशवाद का जमकर विरोध करते नजर आए तो वहीं एक दूसरे पर हमले भी किए। लेकिन दोनों ही पार्टियों पर वंशवाद का असर देखने को मिलता है। ऐसे में कई दोनों ही पार्टी में कई ऐसे चेहरे हैं जो वंशवाद से ताल्लुक रखते हैं। बता दें कि राजस्थान में कुल 31 चेहरे ऐसे हैं जो वंशवाद को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे में एक नजर भाजपा के उन चेहरों पर जो इस लिस्ट में शामिल हैं साथ ही जानेंगे कि क्या कहना है उनका वंशवाद पर..

राजस्थान की कुल विधानसभा सीटें- 200
भाजपा -160 विधायकों में से 23 वंशवाद से ताल्लुक रखते हैं।
कांग्रेस- 25 विधायकों में से 8 वंशवाद से ताल्लुक रखते हैं।

कौन हैं भाजपा के 23 विधायक

नाम- वसुंधरा राजे
विधासभा क्षेत्र- झालरापाटन
विजया राजे सिंधिया की बेटी, माधवराव सिंधिंया की छोटी बहन और यशोधरा राजे सिंधिंया की बड़ी बहन हैं वसुंधरा राजे सिंधिया।

नाम- राव राजेन्द्र सिंह
विधानसभा क्षेत्र- शाहपुरा
भाजपा के पूर्व विधायक गुनवंत कंवर के बेटे हैं राव राजेन्द्र सिंह।
वंशवाद पर क्या है कहना: वंशवाद पर राव राजेन्द्र सिंह का कहना है कि उनकी पिता बचपन में ही चल बसे थे जबकि मां ने तब ही राजनीति छोड़ दी थी जब वो राजनीति का हिस्सा बन भी नहीं सकते थे। मैंने उनका नाम नहीं इस्तेमाल किया है।

नाम- नरपत सिंह राजवी
विधानसभा क्षेत्र- विद्याधर नगर
भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत के दामाद हैं नरपत सिंह राजवी।
वंशवाद पर क्या है कहना: ये लोकतंत्र है यहां सिर्फ किसी एक- दो के नाम के दम पर राजनीति में टिके रहना संभव नहीं।

नाम: शोभारानी कुशवाह
विधानसभा क्षेत्र: धौलपुर
बसपा-भाजपा के पूर्व विधायक बी एल कुशवाह की पत्नी हैं शोभारानी कुशवाह।
वंशवाद पर क्या है कहना: राजनीति एक समाज सेवा है, बहुत लोग मेरे पास आते हैं और मैं उनकी हरसंभव मदद करती हूं। मेरे साथ वंशवाद जैसी कोई बात नहीं है।

नाम: सुशील कंवर
विधानसभा क्षेत्र: मसूदा
नेता भंवर सिंह पलारा की पत्नी।
वंशवाद पर क्या है कहना: सुशील कंवर की तरफ से भंवर ने कहा कि वंशवाद जैसा कुछ भी नहीं है क्योंकि मैं अब किसी भी पोस्ट पर नहीं ,वहीं मैं पॉलिटिक्स में ज्यादा रहता भी नहीं हूं।

नाम: बंशीधर खंडेला
विधानसभा क्षेत्र: खंडेला
विधायक दिवंगत गोपाल सिंह के बेटे हैं बंशीघर खंडेला।
वंशवाद पर क्या है कहना: अगर राजनीति में वंशवाद है तो मुझे सिर्फ मेरे पिता की वजह से वोट दिए जाते। लेकिन मैं दो चुनाव हारा भी हूं यानी वंशवाद नहीं है।

नाम: झाबर सिंह खर्रा
विधानसभा क्षेत्र: श्रीमाधोपुर
भाजपा के पूर्व विधायक हरलाल सिंह के बेटे हैं झाबर सिंह खर्रा।
वंशवाद पर क्या है कहना: पीएम जिन भी लोगों पर आरोप लगाते हैं वो ऐसे हैं जिन्होंने कभी काम नहीं किया लेकिन वंशवाद की वजह से नेता बने बैठे हैं। लेकिन मैंने पार्टी के लिए काम किया है।

नाम: ललित कुमार
विधानसभा क्षेत्र: किशनगंज
भाजपा की पूर्व विधायक हेमराज मीणा के बेटे हैं ललित कुमार।
वंशवाद पर क्या है कहना: आप परिवार के नाम से एक बार जीत सकते हो लेकिन अगर बार जीतने के लिए आपको काम करना पड़ेगा जनता के लिए।

नाम: अजय सिंह
विधानसभा क्षेत्र: डेगाना
पूर्व विधायक दिवंगत रघुनाथ चौधरी के बेटे हैं अजय सिंह।
वंशवाद पर क्या है कहना: वंशवाद का मतलब होता है कि कोई काम न करते हुए राजनीति से जुड़ जाना। लेकिन मैंने काम किया है इसलिए ये मेरे साथ लागू नहीं होता।

नाम: प्रताप लाल भील
विधानसभा क्षेत्र: गोगुन्दा
भाजपा के पूर्व विधायक दिवंगत भूरा लाल गमेटी के बेटे हैं प्रताप लाल भील।
वंशवाद पर क्या है कहना: मुझे पार्टी टिकट के लिए 20 साल इंतजार करना पड़ा था। यहां गांधी परिवार जैसे काम नहीं होता।

नाम: कृष्णेंद्र कौर दीपा
विधानसभा क्षेत्र: नदबई
दिवंगत महाराजा और पूर्व विधायक मान सिंह की बेटी

नाम: प्रताप सिंह
विधानसभा क्षेत्र: छाबड़ा
जनता पार्टी के पूर्व विधायक दिवंगत प्रेम सिंह के बेटे हैं प्रताप सिंह
वंशवाद पर क्या है कहना: जब मैंने राजनीति शुरू की थी तब हम विपक्ष में थे। हम कांग्रेस की तरह नहीं जहां आपको शुरू से ही शक्तिशाली होने का अनुभव मिले।

नाम: गोलमा देवी
विधानसभा क्षेत्र: सपोतरा
विधायक: राजगढ़- लक्ष्मणगढ़
राज्य सभा सदस्य किरोड़ी लाल मीणा की पत्नी हैं गोलमा देवी।

नाम: सिद्दी कुमारी
विधानसभा क्षेत्र: बीकानेर पूर्व
पूर्व विधायक करणी सिंह की पड़पोती हैं सिद्धी कुमारी।

नाम: दीया कुमारी
सवाई माधोपुर से विधायक
विधायक गायत्री देवी की पड़पोती हैं दीया कुमारी।
वंशवाद पर क्या है कहना: राजमाता गायत्री देवी ने 40 साल पहले चुनाव जीता था। इतने लंब अंतराल के बाद तो मैं खुद को राजनीति के परिवार से भी नहीं मानतीं।

नाम: गुरजंत सिंह
विधानसभा क्षेत्र: सादुलशहर
पूर्व विधायक महेन्द्र सिंह के भाई। हालांकि इन्होंने टिकट के लिए भी इनकार कर दिया है।

नाम: बालू राम चौधरी
विधानसभा क्षेत्र: सहारा
रतन लाल जाट के छोटे भाई हैं बालू राम चौधरी। हालांकि इन्होंने टिकट के लिए इनकार कर दिया है।
वंशवाद पर क्या है कहना: मैंने पूरी मेहनत की है। हालांकि ये भी सच है कि मेरे भाई ने भी मेरी काफी मदद की और हम साथ में ही इलाकों में जाते हैं।

नाम: जगत सिंह
विधानसभा क्षेत्र: कमन
पूर्व यूनियन मिनिस्टर के नटवर सिंह के बेटे हैं जगत सिंह। हालांकि इन्होंने टिकट के लिए इनकार कर दिया है।

नाम: अलका सिंह गुर्जर
विधानसभा क्षेत्र: बांदीकुई
पूर्व विधायक नत्थु सिंह गुर्जर की पत्नी हैं अलका सिंह गुर्जर।
वंशवाद पर क्या है कहना: अलका की जगह नत्थु ने कहा कि जब पीएम वंशवाद की बात करते हैं तो वो गांधी परिवार की बात करते हैं जिन्होंने सालों तक देश पर राज किया। हम उनकी तरह नहीं हैं।

नाम: कृष्ण कड़वा
विधानसभा क्षेत्र: संगारिया
पूर्व विधायक आत्माराम कड़वा के बेटे हैं कृष्ण कड़वा। हालांकि उन्होंने टिकट के लिए इनकार कर दिया है।
वंशवाद पर क्या है कहना: जनता मेरे पिता के काम को अभी तक याद रखती है लेकिन ये अब मेरे हाथों में हैं और मुझे इसे आगे ले जाना है।

नाम: राजेन्द्र सिंह भादू
विधानसभा क्षेत्र: सूरतगढ़
दिवंगत कांग्रेसी नेता मनफूल सिंह भादू के भतीजे हैं राजेन्द्र सिंह भादू। हालांकि उन्होंने इस बार टिकट के लिए इनकार कर दिया है।
वंशवाद पर क्या है कहना: जो भाजपा के नेता कहते हैं वो सहीं कहते हैं लेकिन ये उनपर लागू होता है जो राजनीति में आने के बाद भी काम नहीं करते हैं।

नाम: मानवेन्द्र सिंह
विधानसभा क्षेत्र: झालरापाटन
पूर्व यूनियन मिनिस्टर जसवंत सिंह के बेटे हैं मानवेन्द्र सिंह।
वंशवाद पर क्या है कहना: ये आपके प्रोफाइल में तो मदद करता है लेकिन काम में नाम आपको खुद ही बनाना पड़ता है।

नाम: हबीबुर्रहमान
विधानसभा क्षेत्र: नागौर
पूर्व विधायक दिवंगत हाजी मोहम्मद उस्मान के बेटे हैं हबीबुर्रहमान।
वंशवाद पर क्या है कहना: वंशवाद का फायदा जरूर पहले इलेक्शन में होता है लेकिन उसके बाद आपको खुद को साबित करना पड़ता है।

 

बता दें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजस्थान में 12 सभाएं की, जो कि पाचों राज्यों में सबसे ज्यादा है। इसके अलावा मोदी ने मध्य प्रदेश में दस, छत्तीसगढ़ में चार, तेलंगाना में पांच और मिजोरम में एक रैली की। गौरतलब है कि कुल मिलाकर इन पांचो राज्य में 679 सीटें हैं, हालांकि चुनाव इन में से 678 पर ही होगा। गौरतलब है कि 199 सीटों के लिए राजस्थान में कुल 2274 प्रत्याशी मैदान में हैं। जिसमें से भाजपा ने 200 प्रत्याशी, कांग्रेस ने 195, बसपा ने 190, आम आदमी पार्टी ने 142, भावापा ने 63, रालोपा ने 58 और अरापा ने 61 कैंडिडेट मैदान में उतारे हैं। बता दें राजस्थान और तेलंगाना में वोटिंग शुरू हो चुकी है जबकि 11 दिसंबर को नतीजे सबके सामने होंगे।

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