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हनीमून पर जाना था, डीएम ने दंपती को चुनाव ड्यूटी से दे दी छुट्टी

एक शिक्षक दंपत्ति ने चुनाव में राजस्थान विधानसभा चुनाव में ड्यूटी न लगाने की गुहार लगाई है। दंपत्ति ने कहा कि उन्हें हनीमून पर जाना है। डीएम ने शिक्षक दंपत्ति को छुट्टी दे दी।

तस्वीर का उपयोग प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

राजस्थान में सात दिसंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। मतों की गिनती 11 दिसंबर को होगी। चुनाव को लेकर राज्य सरकार के कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई जा रही है। इस बीच एक शिक्षक दंपत्ति ने चुनाव में ड्यूटी न लगाने की गुहार लगाई है। दंपत्ति ने कहा कि उन्हें हनीमून पर जाना है। डीएम ने शिक्षक दंपत्ति को छुट्टी दे दी। लेकिन इसी तरह से बहाने बनाने वाले कई अन्य शिक्षकों के आवेदन को वापस कर दिया। दरअसल, राजस्थान के चुरू में दिसंबर के महीने में तापमान काफी कम होता है। ठंड बढ़ जाती है। ऐसे में शिक्षक चुनावी ड्यूटी से बचने के लिए शादी से लेकर हनीमून तक का बहाना दे रहे हैं। कुछ महिला शिक्षकों ने चुनावी ड्यूटी से बचने के लिए कहा कि उस समय उन्हें प्रसव होने वाला है। जिला चुनाव अधिकारी मुक्तानंद अग्रवाल को शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी के लिए प्रेरित करने में काफी परेशानी हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुरू जिले के रहने वाले शिक्षक राजदीप लांबा की 19 नवंबर को शादी हुई थी। उन्होंने हनीमून पर जाने के लिए पहले से ही 1.5 लाख रुपये मूल्य का टिकट बुक करवा लिया था। लेकिन चुनाव में ड्यूटी की वजह से उनके हनीमून पर ग्रहण लगता दिख रहा था। आखिरकार उन्होंने अपनी यह समस्या चुनाव अधिकारी को बताई कि वे काफी पहले से ही छुट्टी पर जाने की तैयारी कर चुके थे। उन्हानें इसके लिए टिकट भी बुक करवा लिए हैं। इसलिए उन्हें चुनाव ड्यूट से मुक्त किया जाए।

शिक्षक दंपत्ति की बात सुनने के बाद जिला चुनाव अधिकारी ने चुनाव ड्यूटी से मुक्त कर दिया। अब वे आराम से पत्नी अंजली के साथ हनीमून मनाने 29 नवंबर से 10 दिसंबर के लिए मॉरीशस जा रहे हैं। अंजली भी सरकारी शिक्षक हैं। शिक्षक दंपत्ति ने इसके लिए जिला चुनाव अधिकारी को धन्यवाद दिया है। हालांकि, चुनाव ड्यूटी से मुक्त करने से पहले जिला चुनाव अधिकारी ने उनके शादी के कार्ड और टिकट देखे।

राजदीप के अलावा, एक और शिक्षक आजाद सोनी को उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चुनाव ड्यूटी से मुक्त किया गया है। इस पूरे मामले पर जिला चुनाव अधिकारी कहते हैं, “इन शिक्षकों से चुनाव में काम लेना काफी कठिन कार्य है। शिक्षक चुनाव ड्यूटी से मुक्त होने के लिए कई तरह के बहाने कर रहे हैं। जांच के बाद उन्होंने सभी के आग्रह को ठुकरा दिया और सिर्फ दो को चुनाव ड्यूटी से मुक्त किया है।”

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