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Lok Sabha Election 2019: अपने गढ़ से लड़ने का मौका कम

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): कीर्ति आजाद के लिए बिहार की ये दोनों सीटें नो वैकेंसी वाली महागठबंधन में नजर आती हैं। वैसे दरभंगा से तीन दफा कीर्ति सांसद रहे हैं। अब कीर्ति के लिए दिल्ली की किसी सीट पर कांग्रेस उनके लिए गुंजाइश निकालने की कोशिश में है।

दरभंगा से सांसद कीर्ति फोटो सोर्सः कीर्ति आजाद

Lok Sabha Election 2019: दरभंगा सीट से भाजपा सांसद कीर्ति आजाद कांग्रेस में आ तो गए हैं, मगर अपनी जमीन तलाशने में उन्हें दिक्कत हो रही है। अगर कांग्रेस दरभंगा सीट पर अपना दावा बरकरार रखती है तो राजद के लिए परेशानी खड़ी होगी। और अगर दावा छोड़ती है तो एक जीते सांसद की सीट छोड़ने की अलग तरह की दिक्कत सामने आएगी। मसलन फिर कीर्ति कहां जाएंगे। बीते 18 फरवरी को कीर्ति आजाद ने कांग्रेस का पंजा राहुल गांधी के सामने दिल्ली में थामा है। सदस्यता ग्रहण करते वक्त उन्होंने कहा कि मैं अपने पिता की पार्टी में आया हूं। इनके पिता भागवत झा आजाद भागलपुर संसदीय क्षेत्र से पांच दफा सांसद चुने गए। मूलत: ये भागलपुर के बगल गोड्डा जिले के कस्बा गांव के वाशिंदें हैं।

अविभाजित बिहार में महगामा भागलपुर लोकसभा सीट का हिस्सा था। अब यह झारखंड में है। इसी के तहत इनका गांव है।अपने पिता की पार्टी में आने का कीर्ति का एलान कहीं भागलपुर सीट की ओर तो इशारा नहीं कर रही। यदि है तो ठीक दरभंगा वाले हालात यहां भी है। फर्क केवल यह है कि यहां राजद के शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेता शाहनवाज हुसैन को पराजित कर सांसद बने थे। इस वजह से भागलपुर सीट राजद किसी भी हालत में छोड़ने को राजी नहीं होगा।

दरभंगा में राजद उम्मीदवार मोहम्मद अली अशरफ फातमी दो लाख 79 हजार 906 वोट हासिल हासिल कर दूसरे नंबर पर रहे थे। यहां भाजपा के कीर्ति आजाद 314949 वोट लाकर जीते थे। तीसरे नंबर पर जदयू के संजय कुमार झा रहे थे। जिन्हें 104494 मत मिले थे। अबकी दफा एनडीए की तरफ से यह सीट जदयू की झोली में जाने की बात लगभग पक्की है। ऐसी हालत में संजय राजग के उम्मीदवार होंगे। कीर्ति आजाद के लिए बिहार की ये दोनों सीटें नो वैकेंसी वाली महागठबंधन में नजर आती हैं। वैसे दरभंगा से तीन दफा कीर्ति सांसद रहे हैं। अब कीर्ति के लिए दिल्ली की किसी सीट पर कांग्रेस उनके लिए गुंजाइश निकालने की कोशिश में है। जानकार बताते हैं कि जिस इलाके में बिहारी वोटरों की आबादी ज्यादा होगी उसी इलाके की सीट तलाशी जा रही है।

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