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दिल्ली नगर निगम चुनाव: भाजपा के मुसलिम उम्मीदवारों ने किया जीत का दावा

दिल्ली नगर निगम चुनाव में भाजपा ने चार मुसलिम चेहरों को उम्मीदवार बनाया है।

Author नई दिल्ली | Published on: April 9, 2017 2:42 AM
प्रतीकात्मक फोटो

दिल्ली नगर निगम चुनाव में भाजपा ने चार मुसलिम चेहरों को उम्मीदवार बनाया है। चारों उम्मीदवार मुसलिम बहुल सीट से खड़े किए गए हैं और सभी का दावा है कि उनकी जीत तय है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे को अपने क्षेत्र में पेश कर वोट मांग रहे हैं। वे कहते हैं कि देश के नागरिक अब सजग हैं और सांप्रदायिकता जैसे मुद्दे पर किसी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं। पांच राज्यों का चुनाव इसका उदाहरण है।  इन चारों उम्मीदवारों में कुरेशनगर से भाजपा की महिला उम्मीदवार रुबीना बेगम का परिवार 1977 से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहा है। इसके अलावा नई दिल्ली गेट से फइमुद्दीन सैफी, मुस्तफाबाद से सबरा मलिक और चौहान बांगर से सरताज अहमद शामिल हैं। छात्र संगठन एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के साथ कॉलेज के छात्र, शिक्षक और पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता भी इन उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार अभियान में लगे हुए हैं।

कुरेशनगर वार्ड नंबर-89 की महिला सीट से रुबीना को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने इलाके के लोगों को पशोपेश में डाल दिया है। यह क्षेत्र लंबे समय से रुबीना के परिवार के कब्जे में था, जोकि 1977 में जनता पार्टी से जुड़ा और फिर 1990 तक इस सीट पर मुस्तैदी के साथ डटा रहा। पहले यह क्षेत्र प्रसादपुरा वार्ड के नाम से जाना जाता था और 1990 तक यहां से रुबीना के ससुर इस्माइल पार्षद रहे। 1990 के बाद 2007 तक इस्माइल के बेटे इमरान इस्माइल ने इस सीट पर अपनी दावेदारी बरकरार रखी। 2012 से 2017 तक इमरान की मां हूरबानो ने सीट को बचाए रखा। रुबीना को पुश्तैनी सीट के नाम पर इस सीट का टिकट मिला है और उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के वादे से वह जरूर जीतेंगी। यहां कुल 45 हजार मतदाता हैं, जिसमें 52 फीसद मुसलिम, 16 फीसद एससी और बाकी अन्य समुदाय के हैं। रुबीना कहती हैं कि देश ने कभी भी सांप्रदायिकता जैसे मुद्दे को नहीं अपनाया, इसलिए निगम में भी इन मुद्दों को दूसरी पार्टियां चाहे लाख उठाएं, लेकिन लोग भाजपा को ही वोट देंगे। इसी तरह चौहान बांगर वार्ड नंबर-41 की सामान्य सीट से सरताज अहमद को भाजपा ने मुसलिम चेहरे के रूप में पेश किया है। यहां करीब 32 हजार मतदाता हैं।

इस मुसलिम बहुल इलाके में सरताज बीते 12 सालों से सक्रिय हैं। वे कहते हैं कि जब से भाजपा बनी वे पार्टी के साथ हैं। राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी ने जिस प्रकार 16 राज्यों में अपनी छाप छोड़ी और सरकार बनाकर जनोपयोगी काम किया, उसी का असर था कि पिछले महीने पांच राज्यों के चुनाव में से चार में भाजपा को बहुमत मिला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सबका साथ-सबका विकास का नारा देकर देश को एक सूत्र में बांधने का काम किया है, लिहाजा निगम चुनाव में पार्टी की जीत को कोई रोक नहीं सकता। भाजपा ने निगम के दिल्ली गेट वार्ड नंबर-88 सामान्य सीट से युवा नेता फइमुद्दीन सैफी को मैदान में उतारकर कांग्रेस और आप को मुश्किल में डाल दिया है। सैफी के इलाके में करीब 40 हजार मतदाता हैं। यहां 30 फीसद मुसलिम जबकि 70 फीसद अन्य मतदाता हैं। कांग्रेस ने यहां से आले इकबाल और आप ने रियाज चौधरी को मैदान में उतारा है। फइमुद्दीन कहते हैं कि हमारे प्रचार का जिम्मा एबीवीपी संभाले हुए है और वह पार्टी के राष्ट्रीय एजंडे से लेकर दिल्ली की मूल समस्या को जनता के सामने लाने की कोशिश कर रही है। सैफी दावा करते हैं कि वे बीते पांच साल में आंखों की जांच, पानी का टैंकर व सफाई व्यवस्था से लेकर अन्य जनोपयोगी कार्यों के लिए हमेशा जनता के साथ रहे हैं और यही कारण है कि इस चुनाव में उनकी जीत पक्की है।

इन तीनों के साथ ही भाजपा ने एक अन्य मुसलिम चेहरे सबरा मलिक को मुस्तफबाद वार्ड नंबर-58 से मैदान में उतारा है। सबरा के क्षेत्र में करीब 58 हजार मतदाता हैं। यहां 11 हजार सामान्य और बाकी सभी अल्पसंख्यक मतदाता हैं। सबरा के पति यूसुफ मलिक कहते हैं कि इस क्षेत्र में उन्होंने 18 साल से समाजसेवा की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की शमा परवीन और आप की शकीला बेगम के मुकाबले उनकी जीत 10 हजार से ज्यादा वोटों से होगी और वे निगम की सत्ता में भारी बहुमत से लौटेंगे। उम्मीदवार सबरा मलिक कहती हैं कि सुबह से शाम तक सिर्फ पैदल यात्रा कर वे वोटरों को यह समझाने की कोशिश कर रही हैं कि भाजपा ही देश का विकास कर सकती है। सालों तक जिस पार्टी ने दिल्ली में कोई काम नहीं किया उसका विकल्प भाजपा है और यही कारण है कि वे जहां भी जाती हैं जनता उन्हें हाथों-हाथ ले रही है।

 

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