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दिल्ली नगर निगम चुनाव: सर्वेक्षणों की बाढ़ के बाद भी तय नहीं भाजपा के दावेदार

दिल्ली नगर निगम का चुनाव भाजपा के लिए टेढ़ी खीर साबित होने वाला है।

Author नई दिल्ली  | March 27, 2017 3:54 AM
प्रतीकात्मक फोटो

दिल्ली नगर निगम का चुनाव भाजपा के लिए टेढ़ी खीर साबित होने वाला है। दिल्ली के सभी सांसद, नेता विपक्ष, केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, अनिल जैन सहित अन्य प्रदेश नेताओं को मिलाकर बनाए गए कोर ग्रुप की सलाह भाजपा आलाकमान को अब महंगी पड़ रही है। नतीजा यह है कि पार्टी ने प्रदेश स्तर पर दो बार सर्वे कराने के बाद प्रदेश मोर्चे के नेताओं से अलग सर्वे कराया है। इसके अलावा जिले और सांसदों से भी सूची मांगी। संघ की राय ली जा रही है पर हालात यह है कि नामांकन प्रक्रिया शुरू होने की तिथि 27 मार्च तक एक भी टिकट तय नहीं हो पाया। हालात यह है कि अंतिम दावेदार भी आलाकमान की मुहर के इंतजार में पशोपेश में हैं। निगम चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले एक पूर्व विधायक ने बताया कि मौजूदा, पूर्व और हारे गए सभी को टिकट नहीं देना ऐसा अहम फैसला है। यह निर्णय या तो पार्टी को मोदी लहर और केजरीवाल की नीतियों के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दिला देगा या फिर पार्टी बाद में अपने कोर ग्रुप के फैसले पर पछताएगी। उनका कहना था कि यह भी तय है कि पार्टी अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं कर रही है। इसलिए अब उसके विकल्प और नए लोगों को जोड़ने के लिए कई स्तरों पर सर्वे शुरू कर दिया गया है। सर्वे को खंगाला जा रहा है और इस महीने के अंत तक सूची बनाने का काम पूरा होगा।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार प्रदेश के मोर्चे के पूर्वांचल, अल्पसंख्यक, युवा, किसान और अनुसूचित जाति-जन जाति के नेताओं को अपने-अपने इलाके में नरेंद्र मोदी की नीतियों को बताते हुए लोगों से अच्छे उम्मीदवारों के नाम बताने का काम दिया था। हालांकि जिले स्तर पर अभी पूरी तरह मोर्चे के पदाधिकारी तय नहीं हैं। बावजूद इसके पूर्व मोर्चे के नेताओं को ही यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे केंद्र सरकार की नीतियों को बताने के साथ आने वाले समय में पार्टी क्या करने वाली है भी बताएं। घर-घर जाकर लोगों से मिलते हुए उनसे पार्टी की गतिविधियां सहित दिल्ली में आप की विफलता और अपने एजंडे पर फीडबैक लेने के लिए कहा गया है। इसके साथ लोगों से भावी उम्मीदवारों के नामों की सलाह लेने के लिए भी कहा गया है। इसके बाद मोर्चे की इस सूची को जिलाध्यक्ष के नेतृत्व वाली सूची, सांसद सूची और फिर संघ की सूची से मिलान कर टिकट तय होंगे। इस बार पार्टी ने अपने स्तर पर दो सर्वे कराए हैं। उस सर्वे का भी फीडबैक लिया जाएगा। निगम चुनाव में सोमवार से नामांकन का प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पार्टी के उम्मीदवारों को एक प्रस्तावक और एक समर्थक की जरूरत होती है जबकि निर्दलीय को दस प्रस्तावक चाहिए। इसमें पेंच यह है कि पार्टी समर्थित कोई भी उम्मीदवार नामांकन नहीं भर सकता है। यदि वह पार्टी के नाम पर नामांकन भरता है तो उसे प्रस्तावक और समर्थक चाहिए जो अभी तय नहीं हुए हैं। ऐसे नेता अभी निर्दलीय के रूप में भी आवेदन नहीं कर रहे हैं। स्थिति पूरी तरह असमंजस की बनी हुई है। टिकट के दावेदार दक्षिणी दिल्ली से लेकर पूर्वी दिल्ली तक अपने आलाकमान के यहां दस्तक दे रहे हैं। विधायक, पूर्व विधायक और क्षेत्र के कद्दावर नेताओं से कोर ग्रुप को यह विश्वास दिलाने की कोशिश हो रही है कि वे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं।

 

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