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MCD चुनाव नतीजे 2017: इन वजहों ने तीसरी बार बीजेपी को बनाया दिल्ली एमसीडी का ‘सुल्तान’

MCD Election Result 2017: दिल्ली में 23 अप्रैल को एमसीडी चुनाव हुए थे, जिसके आज नतीजे आए हैं और बीजेपी को 180 सीटें मिली हैं। पिछले चुनावों में बीजेपी को 138 सीटें मिली थीं।

Author Updated: April 26, 2017 2:14 PM
झारखंड में घटक दल आजसू के रवैये से भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। (फाइल फोटो)

भारतीय जनता पार्टी का विजय रथ जारी है। लगातार तीसरी बार पार्टी राजधानी में मेयर की कुर्सी पर काबिज हुई है। पार्टी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी। वहीं गोवा और मणिपुर में गठबंधन सरकार बनाई है। कुछ समय पहले हुए महाराष्ट्र निकाय चुनावों में भी बीजेपी ने आजादी के समय से कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले लातूर निकाय चुनावों ने भी जीत हासिल की थी। आपको बताते हैं एेसे 5 कारण, जिनकी बदौलत बीजेपी ने एमसीडी चुनावों में झाड़ू और हाथ को धो दिया।

सभी नए उम्मीदवारों को टिकट: बीजेपी ने इस चुनाव में किसी भी पुराने पार्षद को टिकट नहीं दिया। जितनी सीटों पर उसने चुनाव लड़ा, सब पर नए चेहरों को मौका दिया गया। अब तक एमसीडी पर भ्रष्टाचार का जो आरोप लगता आ रहा है, बीजेपी ने उसे धोने की कोशिश की है।

दिल्ली के नेतृत्व में बदलाव: बीजेपी ने संगठन में खूब बदलाव किए। पार्टी ने दिल्ली में पुराने नेतृत्व को बदलकर नए चेहरों को मौका दिया गया। सतीश उपाध्याय को हटाकर पूर्वी दिल्ली से सांसद और अभिनेता मनोज तिवारी प्रदेश को नया दिल्ली बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। तिवारी की पूर्वांचली समुदाय पर काफी अच्छी पकड़ है और दिल्ली में इन राज्यों से आने वाली जनता की काफी जनसंख्या है। लोगों के बीच भी वह बहुत ज्यादा लोकप्रिय भी हैं।

UP, उत्तराखंड की जीत को भुनाया: यूपी और उत्तराखंड में जिस तरह बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला, उसका लोगों पर काफी सकारात्मक असर पड़ा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसलों को देखते हुए लोगों में बीजेपी के प्रति विश्वास और बढ़ा। एंटी रोमियो स्क्वॉड, अवैध बूचड़खानों पर बैन और मुस्लिमों के लिए योजनाओं के एेलान ने भी लोगों के मन में बीजेपी की छवि को और बेहतर किया।

मोदी लहर बरकरार: यह कहना गलत नहीं होगा कि दिल्ली एमसीडी चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोला है। बीजेपी ने एेसे लोगों को टिकट दिया था, जो पहली बार चुनाव लड़ रहे थे। लिहाजा वे जनता के बीच इतने पॉपुलर भी नहीं होंगे। बीजेपी के सभी नेताओं ने इन चुनावों में जीत का श्रेय पीएम मोदी के विकास कार्यों को दिया है।

अमित शाह की संगठन पर पकड़: जब से अमित शाह बीजेपी के अध्यक्ष बने हैं, उन्होंने लगातार संगठन में जमीनी स्तर से लेकर टॉप लेवल तक बदलाव किए हैं। उन्होंने लोगों को बीजेपी से जुड़ने के लिए कैंपेन चलाया। साथ ही कार्यकर्ताओं में जीतने का जज्बा पैदा किया। पार्टी में 75 साल के ऊपर के नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने का फैसला भी लिया गया। बीजेपी को मिडिल क्लास , गरीबों और मुस्लिमों की हितैषी पार्टी के तौर पर पेश किया।

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