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सीधी टक्कर से और दिलचस्प होगा दिल्ली का दंगल

दिल्ली में लोकसभा की सात सीटें हैं और सभी सीटों पर फिलहाल भाजपा का कब्जा है। इस वजह टिकट का सबसे बड़ा घमासान इसी पार्टी में है। इसका अंदाजा प्रत्याशियों की घोषणा में की जा रही देरी से लगाया जा सकता है।

Author April 22, 2019 1:51 AM
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल (एक्सप्रेस फाइल)

पंकज रोहिला

लोकसभा चुनाव में सीधी टक्कर की रणनीति से दिल्ली की सातों सीटों के घमासान को और भी दिलचस्प बनाने की तैयारी चल रही है। इसका असर अभी से चुनावी दंगल में नजर आने लगा है। इस बार एक सीट पर ज्यादा से ज्यादा प्रत्याशी उतारकर वोट बैंक को बांटने की तैयारी चल रही है। वहीं यह कोशिश भी जारी है कि इस पूरे घमासान को दो दलों के बीच की सीधी टक्कर बना दिया जाए। इसकी मदद से बड़े दलों का नुकसान कम किया जा सकता है।

दिल्ली में लोकसभा की सात सीटें हैं और सभी सीटों पर फिलहाल भाजपा का कब्जा है। इस वजह टिकट का सबसे बड़ा घमासान इसी पार्टी में है। इसका अंदाजा प्रत्याशियों की घोषणा में की जा रही देरी से लगाया जा सकता है। पार्टी सूत्र तर्क दे रहे हैं कि भाजपा पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रत्याशियों को देखना चाहती है। इसके बाद ही वह अपने प्रत्याशी उतारेगी। इसलिए अब तक दिल्ली के चेहरों की घोषणा नहीं की गई है, जबकि नामांकन के लिए सिर्फ दो दिन का समय बचा है। हालांकि हरियाणा में प्रत्याशियों की घोषणा पार्टी ने समय से पहले ही कर दी थी। उन्होंने प्रचार भी शुरू कर दिया।

डमी प्रत्याशी बढ़ाएंगे संकट
चुनाव में इस बार डमी प्रत्याशी भी प्रत्याशियों की मुसीबत बढ़ाएंगे। सूत्र बताते हैं कि सातों सीट पर नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही कई चेहरों को उतारा जा चुका है। ये चेहरे सीटों के जातिगत समीकरणों के हिसाब से तय किए गए हैं। जैसे मुसलिम व पूर्वांचल बहुल इलाकों में उस समुदाय के अधिक लोगों को खड़ा किया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि इसकी मदद से वोट का बंटवारा होगा और हार-जीत के अंतर में कमी आएगी।

टक्कर की रणनीति
गठबंधन की संभावनाओं के बीच बार-बार एक समीकरण यह भी सामने आ रहा है कि दिल्ली में कांग्रेस और ‘आप’ अलग-अलग भी हो सकते हैं। इस स्थिति में भाजपा, ‘आप’ और कांग्रेस की रणनीति इस तरह सामने आ रही है, जिसमें दो प्रमुख दलों के बीच टक्कर कराई जा सके। इसकी मदद से सीटों पर बड़े नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। त्रिकोणीय मुकाबले में मत प्रतिशत निर्णायक भूमिका में होगा।

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