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दिल्ली विधानसभा उपचुनाव: दो लाख मतदाता करेंगे जीत का फैसला

दिल्ली की राजौरी गार्डन विधानसभा सीट पर आज होने वाला उपचुनाव तीनों बड़े दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है।

Author नई दिल्ली | April 9, 2017 2:49 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर (PTI Photo)

दिल्ली की राजौरी गार्डन विधानसभा सीट पर आज होने वाला उपचुनाव तीनों बड़े दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। 13 अप्रैल को इस चुनाव के जो भी नतीजे आएंगे, उसे विजयी दल मुद्दा बनाएगा और दावे करेगा कि दिल्लीवासियों ने उसके समर्थन में जनमत दिया है। इसके बाद दिल्ली के तीनों नगर निगमों के चुनाव हैं। राजौरी गार्डन विधानसभा उपचुनाव के लिए सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप), भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। यहां से भाजपा-अकाली दल के मनजिंदर सिंह सिरसा, कांग्रेस की मीनाक्षी चंदीला और आप के हरजीत सिंह उम्मीदवार हैं। यह सीट पहले आम आदमी पार्टी के पास ही थी। राजौरी गार्डन से आप विधायक जरनैल सिंह ने यहां से इस्तीफा देकर फरवरी में हुए पंजाब चुनाव में उम्मीदवारी दिखाई, लेकिन हार गए। साल 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में पूर्व पत्रकार जरनैल सिंह ने सिरसा को 10 हजार मतों से हराया था जबकि 2013 के चुनाव में सिरसा ने कांग्रेस की धनवंती चंदीला को हराकर कांग्रेस की इस परंपरागत सीट को अपने कब्जे में लिया था। उपचुनाव के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी चंदीला ख्याला से निगम पार्षद और यहां से विधायक रहे दयानंद चंदीला की बहू हैं।

यह इलाका प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का भी माना जाता है। माकन ने भी इस सीट पर अपनी पूरी ताकत झोंकी है। पंजाबी बहुल इस सीट पर चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कांग्रेस ने मतदाताओं को लुभाने के लिए पंजाब में मंत्री बने नवजोत सिंह सिद्धू को प्रचार के लिए उतारा। सिद्धू ने अजय माकन के साथ इलाके में रोड शो कर आप को पंजाब की तरह दिल्ली में भी मुकाबले से बाहर बता दिया। माकन खुद इस सीट से लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं। भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, सांसद परेश रावल और अकाली नेता सुखबीर बादल ने भी इलाके में रोड शो कर सिरसा के पक्ष में वोट मांगे। केजरीवाल ने भी अपने उम्मीदवार के समर्थन में सभा की। केजरीवाल और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एचएस फुल्का ने शुक्रवार को इलाके में रैली और रोड शो कर धुआंधार प्रचार किया। वैसे राजौरी गार्डन उपचुनाव में आप के लिए सबसे बड़ी चुनौती पंजाब और गोवा चुनाव में मिली करारी हार को दिल्ली में बेअसर करने की है। इसके लिए केजरीवाल सहित सभी आप नेता ईवीएम में गड़बड़ी को हार की वजह बताते हुए इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं भाजपा चार राज्यों में अपनी ताजा जीत को भुनाने और केजरीवाल सरकार की नाकामियों को मुद्दा बनाने में जुटी हुई है। प्रचार के अंतिम चरण में कांग्रेस और भाजपा ने शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट को केजरीवाल के खिलाफ कारगर हथियार बनाया। इन सब के बीच यह तय है कि आगामी 23 अप्रैल को होने वाले नगर निगम चुनाव के ठीक पहले हो रहा यह उपचुनाव तीनों दलों के लिए निगम चुनाव का सेमीफाइनल बन गया है।

यह चुनाव भाजपा के लिए दिल्ली की राजनीति में वापसी करने और कांग्रेस के लिए अपना वजूद बचाने का मौका साबित हो सकता है। यह सीट तीनों दलों के लिए निगम चुनाव ही नहीं, बल्कि सियासी भविष्य के लिए भी कसौटी साबित हो रही है। अजय माकन और मनोज तिवारी के लिए तो यह उपचुनाव और निगम चुनाव अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। राजौरी गार्डन विधानसभा सीट में निगम के चार वार्ड टैगोर गार्डन, राजौरी गार्डन, विष्णु गार्डन और ख्याला आते हैं। यहां पर कुल 206182 मतदाता हैं, जिसमें 36 फीसद सिख मतदाता, 12 फीसद अनुसूचित जाति, 14 फीसद ओबीसी, 4 फीसद गुर्जर और 5 फीसद मुसलिम मतदाता हैं।

 

 

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