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कोचिंग नगरी में कर्जमाफी, बेरोजगारी व राष्ट्रवाद मुद्दे

लोकसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में किसानों की कर्जमाफी व बेरोजगारी लोगों के बीच मुद्दा बने हुए हैं तो शहरी क्षेत्र में नरेंद्र मोदी और राष्ट्रवाद के साथ ही कोटा में हवाई सेवा में बढ़ोतरी भी बड़ा मुद्दा बन गया है।

Author April 29, 2019 5:11 AM
पीएम नरेन्द्र मोदी, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

देश भर में कोचिंग और कोटा डोरिया साड़ी के लिए पहचान रखने वाली कोटा संसदीय सीट पर इस बार चुनाव में कई मुद्दे हैं। भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद ओम बिड़ला को तो कांग्रेस ने विधायक रामनारायण मीणा को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने इस सामान्य सीट पर जनजाति के रामनारायण मीणा को उतार कर उनके जातीय वोटों से जीत का ताना-बाना बुना है। इस लोकसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में किसानों की कर्जमाफी व बेरोजगारी लोगों के बीच मुद्दा बने हुए हैं तो शहरी क्षेत्र में नरेंद्र मोदी और राष्ट्रवाद के साथ ही कोटा में हवाई सेवा में बढ़ोतरी भी बड़ा मुद्दा बन गया है। इन मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार जीत के बाद समाधान का वादा तो कर रहे हैं पर लोगों के बीच नकारात्मक माहौल है।

दो जिलों कोटा और बूंदी को मिला कर बने इस संसदीय सीट पर जनसंघ के समय से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मजबूत पकड़ रही है। भाजपा में इस बार ओम बिड़ला को फिर से टिकट देने का बड़ा विरोध भी सामने आया था। बिड़ला को भाजपा में बूथ प्रबंधन का तगड़ा खिलाड़ी माना जाता है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दूसरे प्रदेशों में बिड़ला को ही बूथ प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के लिए भेजते हैं। बिड़ला तीन बार विधायक और एक बार सांसद रहे हैं। चुनाव लड़ने की उनकी अलग तरह की ही शैली है। भाजपा संगठन के अलावा उनकी निजी टीम भी पूरी भागदौड़ करती है। बिड़ला का सहकारी संस्थाओं पर भी कब्जा रहा है। प्रदेश में पांच साल तक रही भाजपा सरकार ने इलाके में कोई ज्यादा विकास काम नहीं करवाए, उसका खमियाजा बिड़ला को उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद बिड़ला ने पूरे पांच साल तक इलाके में अपनी सक्रियता बनाए रखी थी।

बिड़ला का कहना है कि उन्होंने पांच साल में कोटा में स्थानीय उद्योग धंधों की मदद के लिए कई योजनाएं मंजूर कराईं। कोटा डोरिया उद्योग से जुड़े मजदूरों के लिए कई तरह के पैकेज भी शुरू करवाए गए। किसानों को चंबल नहर का नियमित पानी दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। कोटा शहर को हवाई सेवा से जोड़ने की दिशा में उनके प्रयास अब सफल हो रहे हैं। बिड़ला का कहना है कि आने वाले समय में कोटा कोचिंग सिटी के साथ ही औद्योगिक तौर पर फिर से विकसित होगा। कांग्रेस ने कोटा संसदीय सीट के पीपल्दा विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामनारायण मीणा को मैदान में उतारा है। मीणा मूल रूप से बंूदी जिले के रहने वाले हैं। कांग्रेस के सामान्य वर्ग के नेताओं और कार्यकर्ताओं में मीणा की उम्मीदवारी को लेकर विरोध भी उभरा था। पार्टी ने मीणा को सिर्फ इलाके में उनकी मीणा जाति के तीन लाख वोटों के हिसाब से ही उम्मीदवार बनाया है। मीणा भी अनुभवी राजनेता हैं और कई बार विधायक और एक बार सांसद भी रह चुके हैं।

रामनारायण मीणा का कहना है कि उनकी उम्मीदवारी को लेकर किसी तरह का कोई विरोध नहीं है। पार्टी के सभी वर्ग और जातियों के नेता उनके प्रचार में लगे हुए हैं। भाजपा की मजबूत सीट माने जानी वाली कोटा में इस बार चौंकाने वाला नतीजा सामने आएगा। मीणा का कहना है कि भाजपा शासन में किसानों की सबसे ज्यादा बुरी दशा हुई है। कोटा क्षेत्र में ही कई किसानों ने फसल का सही दाम नहीं मिलने और कर्ज के कारण आत्महत्या की। इस तरफ भाजपा सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया था। किसानों की समस्या को लेकर ही वे उनके बीच जा रहे हैं। भाजपा शासन में युवाओं में बेरोजगारी की समस्या की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया।

कोटा लोकसभा क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से पांच पर भाजपा काबिज है तो तीन पर कांग्रेस के विधायक हैं। विधानसभा चुनाव छह महीने पहले ही हुए थे। इस सीट पर 2014 में भाजपा के ओम बिड़ला ने कांग्रेस के इज्यराज सिंह को दो लाख से ज्यादा के वोटों के अंतर से हराया था। इज्यराज सिंह अब भाजपा में हंै और उनकी पत्नी कल्पना देवी भी विधायक हैं। 2009 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के इज्यराज सिंह ने भाजपा के श्याम शर्मा को 83 हजार 90 वोटों से हरा कर जीता था। इस सीट पर 19 लाख 31 हजार 460 मतदाता हैं। इनमें से 9 लाख 97 हजार 740 पुरुष और 9 लाख 33 हजार 720 महिला मतदाता हैं।

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