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Madhya Pradesh Elections: कांग्रेस के वो 8 चेहरे जिन्हें भाजपा नहीं हरा पाई

पिछले 15 सालों से प्रदेश में भाजपा की सरकार है और ऐसे में पिछले 15 सालों में भाजपा सरकार ने दिग्विजय को मिस्टर बंटाधार कहकर जमकर कोसा लेकिन उनके मंत्रियों का तोड़ नहीं निकाल पाई।

Author November 22, 2018 4:23 PM
भाजपा- कांग्रेस का प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

प्रदेश में 28 नवंबर को 230 सीटों के लिए वोटिंग है। ऐसे में प्रदेश की दोनों बड़ी पार्टियां भाजपा-कांग्रेस के सभी प्रत्याशियों ने अपना दम लगा दिया है। गौरतलब है कि पिछले 15 सालों से प्रदेश में भाजपा की सरकार है और ऐसे में पिछले 15 सालों में भाजपा सरकार ने दिग्विजय को मिस्टर बंटाधार कहकर जमकर कोसा लेकिन उनके मंत्रियों का तोड़ नहीं निकाल पाई। बता दें भाजपा नेता उमा भारती ने 2003 में दिग्विजय के हर फॉर्मूले को फेल बताकर सत्ता हथियाई थी और इस बार भी कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है जिसमें बिजली की कमी वाले प्रदेश और सड़कों के गड्डे भाजपा सभी को याद दिला रही है। खैर भाजपा चाहे कितनी भी कोशिश कर ले लेकिन रिकॉर्ड्स कहते हैं कि आज भी भाजपा के पास दिग्विजय सिंह के इन 8 मंत्रियों का कोई तोड़ नहीं है। प्रदेश में भले ही भाजपा रही हो लेकिन इन 8 चेहरों ने अपने अपने क्षेत्रों में कांग्रेस को जीत दिलाई है।

आरिफ अकील-
भोपाल उत्तर से कांग्रेस विधायक आरिफ अकील भोपाल में इकलौते ऐसे विधायक हैं, जिन्हें भाजपा नहीं हरा पाई है। आपको बता दें कि आरिफ पांच बार के विधायक हैं और इस बार 6वीं बार मैदान में हैं। वो दिग्विजय सरकार में अल्पसंख्यक, अन्य पिछड़ा वर्ग और गैस राहत विभाग के मंत्री रहे हैं।

गोविंद सिंह-
लहार विधायक गोविंद सिंह, दिग्विजय सरकार में राज्यमंत्री रहे थे। इसके साथ ही उन्होंने सहकारिता मंत्री के तौर पर काम भी खूब किया। गोविंद 6 बार के विधायक हैं और अब सातवीं बार चुनावी मैदान में हैं। इनके सामने भाजपा ने पुराने प्रतिद्वंदी रसाल सिंह को उतारा है। आपको बता दें कि पिछले चुनावों में गोविंद सिंह ने रसाल सिंह को धूल चटाई थी।

अजय सिंह-
अजय सिंह पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे हैं और साथ ही भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत हैं। वो दिग्विजय सरकार में ग्रामीण एवं पंचायत विभाग के मंत्री थे। अजय 6 बार विधायक रह चुके हैं और सातवीं बार चुनावी मैदान में हैं। इस क्षेत्र में भाजपा की हालत इतनी नाजुक है कि यहां प्रत्याशी तक नहीं मिलते हैं। भाजपा ने अजय के सामने शररेंदु तिवारी को उतारा है। जो पिछली बार भी हार का स्वाद चख चुके हैं।

केपी सिंह कक्काजू-
पिछोर विधायक केपी सिंह दिग्विजय सरकार के समय 1993 में राज्यमंत्री थे, फिर 1998 में पशुपालन व ग्रामोद्योग विभाग के मंत्री रहे। वो पांच बार के विधायक हैं। आपको बता दें कि भाजपा ने उनके खिलाफ मैदान में प्रीतम लोधी को उतारा है। गौरतलब बै कि यहां लोधी वोट बैंक को देखकर भाजपा ने प्रीतम पर दांव खेला है।

रामनिवास रावत-
विजयपुर विधायक रामनिवास रावत दिग्विजय सरकार में दो बार राज्यमंत्री रहे हैं। वो पांच बार विधायक रहे हैं और 6वीं बार मैदान में उतर रहे हैं। गौरतलब है कि इस बार रावत सीट बदल कर सबलगढ़ से लड़ना चाहते थे लेकिन कांग्रेस ने वापस उन्हें विजयपुर से मैदान में उतारा है। भाजपा की ओर से रावत के सामने इस बार मैदान में सीताराम आदिवासी हैं।

राजेन्द्र सिंह-
विधानसभा उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह वर्तमान में अपरपाटन से विधायक हैं। इस बार भी कांग्रेस ने उन्हें मैदान में उतारा है। बता दें दिग्विजय सरकार में राजेन्द्र सिंह वाणिज्य मंत्री रहे हैं। संसदीय कार्य के विशेषज्ञ के तौर पर जाने वाले राजेन्द्र बीच में लोकायुक्त प्रकरण में भी घिरे थे लेकिन भाजपा उनका तोड़ नहीं निकाल पाई। राजेन्द्र के खिलाफ यहां भाजपा ने रामखिलावन पटेल को उतारा है, जो पिछली बार करीब 12 हजार वोटों से हारे थे।

बाला बच्चन-
दिग्विजय सरकार के योद्दाओं में प्रदेश सरकार के कार्यकारी अध्यक्ष बाला बच्चन का नाम भी शुमार है। आपको बता दें कि बाला चार बार से विधायक हैं और पांचवी बार मैदान में हैं। दिग्विजय सरकार में वो स्वास्थ्य मंत्री थे। इस आदिवासी नेता को भी भाजपा हरा नहीं पाई है। बच्चन के सामने इस बार फिर से भाजपा ने देवसिंह पटेल को उतारा है। जो पिछली बार 10 हजार से अधिक वोटों से हारे थे।

 

मुकेश नायक-
पवई विधायक मुकेश नायक तीन बार के विधायक हैं। वो चौथी बार मैदान में उतर रहे हैं। वो दिग्विजय सरकार में 1993 में उच्च, तकनीकी व स्कूल शिक्षा के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री रहे हैं। आपको बता दें कि बीच में नायक ने शिकस्त खाई थी लेकिन उसके बाद उन्होंने जोरदार वापसी की। जिसके बाद वो अब वापस भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। इस बार भाजपा ने मुकेश के खिलाफ प्रहलाद लोदी को मैदान में उतार है वो लोकल हैं और सपा से भाजपा में आए हैं।

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