ताज़ा खबर
 

Lok Sabha Election 2019: कांग्रेस को भाजपा से ज्यादा अपनी गुटबाजी से खतरा

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): वर्ष 2014 के चुनावों के मुकाबले इस बार मोदी लहर का इतना डंका नहीं है। ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भाजपा से हिसाब किताब पूरा करने का मौका है। प्रदेश और केंद्र दोनों में इस समय भाजपा की सरकार है।

Author Published on: March 15, 2019 4:50 AM
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (Photo: PTI)

ओमप्रकाश ठाकुर

चुनावी बिगुल बजते ही शिमला संसदीय क्षेत्र में गतिविधियां तेज हो गई हैं। लगातार दो बार भाजपा की झोली में आने वाली इस सीट को निकालना कांगेस के सामने इस बार भी सबसे बड़ी चुनौती लग रही है। कांगेस को एकजुट करने के तमाम प्रयास हुए हैं लेकिन जमीन पर ज्यादा कुछ नजर नहीं आ रहा है।
यहां मतदान आखिर चरण में 19 मई को होना है। उधर, हमेशा चुनावों में आक्रामक रहने वाली भाजपा इस बार आलाकमान से मिलने वाले कार्यक्रमों के अलावा पूरी तरह से खामोश है। 2014 के लोकसभा चुनावों में मौजूदा सांसद और भाजपा के वीरेंद्र कश्यप 52.3 फीसदी मत लेकर विजयी रहे जबकि कांग्रेस के मोहन लाल ब्राक्टा 40.89 फीसद मत लेकर चुनाव हार गए। यह तब हुआ जब प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमत्री वीरभद्र सिंह की सरकार थी और ब्राक्टा वीरभद्र सिंह के करीबियों में से एक थे। ब्राक्टा रोहड़ू से कांग्रेस विधायक थे। कांग्रेस की ओर से यह टिकट किसी और को भी दिया जा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 2014 के लोकसभा चुनावों में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल का जमकर जादू चला और वीरभद्र सिंह के गढ़ शिमला सीट पर कांग्रेस तबाह हो गई। इसी जादू की वजह से भाजपा के वीरेंद्र कश्यप को तीन लाख 85 हजार 973 मत मिले जबकि कांग्रेस के मोहन लाल ब्राक्टा को तीन लाख एक हजार 786 मत मिले थे। वीरेंद्र कश्यप 84187 मतों से ये चुनाव जीत गए थे। मोदी लहर में तब वीरभद्र सिंह का जादू फीका पड़ गया था। 2014 के चुनावों में आम आदमी पार्टी के सुभाष चंद ने 14 हजार 233 मत लिए थे और उनकी जमानत जब्त हो गई थी इसी तरह वामपंथी पार्टी के जगत राम भी 11434 मत लेकर जमानत गंवा बैठे थे।

वर्ष 2014 के चुनावों के मुकाबले इस बार मोदी लहर का इतना डंका नहीं है। ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भाजपा से हिसाब किताब पूरा करने का मौका है। प्रदेश और केंद्र दोनों में इस समय भाजपा की सरकार है। पिछली बार इस तरह की स्थिति कांग्रेस की थी और जीत भाजपा गई थी। इस बार क्या होता है, यह देखना होगा। 2014 के चुनावों में भाजपा को धूमल का फायदा मिला था लेकिन इस बार वह हाशिए पर धकेल दिए गए हैं और भाजपा में उन्हें हमीरपुर संसदीय हलके तक ही सिमटा देने की रणनीति है। वीरेंद्र कश्यप धूमल खेमे से हैं। इस बार वे प्रत्याशी बनेंगे इसी को लेकर पार्टी के नेता संदेह में हैं। अभी तक कांग्रेस और भाजपा ने इस महत्त्वपूर्ण सीट से किसी प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है। दोनों ही पार्टियों को प्रत्याशियों की नामों की घोषणा करनी होगी। जितनी देरी होगी उतना ही नुकसान भी होगा।

कांग्रेस की दलील
शिमला संसदीय हलके के 17 विधानसभा हलकों में 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह, उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह समेत आठ विधायक जीत कर विधानसभा में पहुंचे हैं। इसके अलावा ठियोग विधानसभा हलके से माकपा प्रत्याशी राकेश सिंघा को मिले मतों में से अधिकांश मत भी कांग्रेस की ही झोली में पड़ेंगे । माकपा इस बार इस संसदीय सीट से प्रत्याशी नहीं उतार रही है। यह कांग्रेस के लिए फायदेमंद हो सकता है।

भाजपा का दावा
प्रदेश में भाजपा की सरकार है। इसका फायदा मिलेगा। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, न्याय व अधिकारिता मंत्री राजीव सैजल, मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा जैसे नेताओं पर भाजपा प्रत्याशी को जिताने का जिम्मा होगा और ये सभी एकजुट हैं। जबकि कांग्रेस तो एकदम बिखरी हुई है जिसका उसे नुकसान होगा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 पूर्वी और नई दिल्ली के बीच अटका है गठबंधन
2 Lok Sabha Election 2019: NCP की पहली लिस्ट में 12 नाम, बारामती से सुप्रिया सुले, थाणे से आनंद प्रांजपे उम्मीदवार
3 विखे पाटिल: राजीव गांधी ने हरवा दिया था चुनाव, 66 साल में शिवसेना के टिकट पर पहुंचे संसद, अटलजी ने बनाया था मंत्री