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उत्तराखंड में वोटिंग से ठीक पहले आपस में उलझी कांग्रेस, कहीं उम्मीदवार ढीले तो कहीं निर्दलीय के भरोसे पार्टी

बता दें कि उत्तराखंड में 15 फरवरी (बुधवार) को वोटिंग होनी है

सितारगंज में लगा कांग्रेस का पोस्टर (Photo Source: Ashutosh Bhardwaj)
उत्तराखंड में 15 फरवरी को वोटिंग होनी है, लेकिन सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के प्रचार में फूट और संसाधनों, जनशक्ति व राजनीतिक इच्छा में कमी नजर आ रही है। प्रचार तैयारियों का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि कांग्रेस के स्टेट चीफ किशोर उपाध्याय जब गुरुवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की रैली के लिए सितारगंज पहुंचे तो उन्हें लेने के लिए एक भी गाड़ी नहीं आई। कई फोन कॉल करने के 15 मिनट बाद एक छोटी गाड़ी आई जो उन्हें लेकर गई।

पार्टी के लिए सितारगंज सीट काफी महत्वपूर्ण रही है। 2012 में इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने चुनाव लड़ा था, जो पिछले साल सीएम हरीश रावत के कथित ‘अहंकार’ के चलते बीजेपी में शामिल हो गए थे। इस साल बहुगुणा के बेटे सौरभ बीजेपी के टिकट से यहां खड़े हैं। वहीं, इसके पास वाली सीट किच्छा से सीएम हरीश रावत चुनाव लड़ रहे हैं, जोकि पहले धारचुला से लड़ते थे। कम से कम कागजी तौर पर तो कांग्रेस के पास पिछले साल का बदला लेने का मौका है।

सितारगंज में 1.0 लाख वोटर्स हैं, जिसमें से करीब 35 हजार बंगाली और 30 हजार मुस्लिम वोटर्स हैं, जो पहले से कांग्रेस का साथ देते आ रहे हैं। कांग्रेस के ओर से मालती बिसवास खड़ी हैं, जिनके पति श्याम बिसवास एक स्थानीय नेता हैं। राहुल गांधी ने भी जो रैली की वो यहां के टैगोर नगर में की थी, जोकि बंगाली प्रवासी समुदाय का इलाका है।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उपाध्याय को बताया कि मालती कोई खास मेहनत नहीं कर रहीं। सितारगंज के दुकानदार देबाशीष मंडल ने कहा, “वह बेहद कम दिखाई देती हैं। बहुत स्लो हैं। उनमें जीतने की इच्छा की कमी है।” इतना ही नहीं, कांग्रेस ने किशोर उपाध्याय को साहसपुर विधानसभा सीट से टिकट दिया है। कांग्रेस ने धनोल्टी से अपना प्रत्याशी वापस लेकर यूकेडी के प्रीतम पंवार को समर्थन देने का ऐलान किया है।

पार्टी में केवल सीएम हरीश रावत और उपाध्याय ही ऐसे नेता हैं जिनकी राज्य स्तर तक पहुंच लगती है। जहां कुछ उम्मीदवारों का कहना है कि उनके पास फंड की कमी है, वहीं अधिकतर का दावा है कि उन्हें राज्य या केंद्रीय लीडरशिप पर भरोसा नहीं रहा। इसके अलावा रविवार को राहुल गांधी के हरिद्वार में हुए रोड शो में बीजेपी के झंडे लहराए गए और नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारेबाजी भी हुई। राज्य में टिकट बंटवारे के समय पड़ी दरार प्रचार के दौरान और बड़ी हो गई है।

अब कांग्रेस नेता इसका ठीकरा सीएम रावत के सिर फोड़ रहे हैं। एक उम्मीदवार ने कहा, “वह हमेशा से राज्य को सिर्फ अपने मन मुताबिक चलाना चाहते हैं। यही कारण था कि लोग बगाबत पर उतर आए थे। जब मुश्किल से सरकार बची थी तो हमें लगा था सीएम बदल जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।” इसके अलावा रविवार को राहुल गांधी के हरिद्वार में हुए रोड शो में बीजेपी के झंडे लहराए गए और नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारेबाजी भी हुई।

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