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आतिशी के सामने ‘आपका लवली’

1980 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले भी दिल्ली से कोई भी सिख उम्मीदवार संसद के निचले सदन, लोकसभा में नहीं पहुंचे थे। केंद्र में 1977 में बनी जनता पार्टी सरकार के गिरने के बाद नई संसद चुनने के लिए 1980 में लोकसभा चुनाव हुए थे।

1980 में दक्षिण दिल्ली से चरणजीत सिंह कांग्रेस की टिकट पर सांसद चुने गए थे।

दिल्ली में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अब आमने-सामने हैं। मतदान का दिन करीब आने के साथ चुनाव प्रचार का तापमान भी बढ़ गया है। पूर्वी दिल्ली सीट पर आप और कांग्रेस के उम्मीदवारों ने अपनी टक्कर से जंग को रोचक बना दिया है। आम आदमी पार्टी की आतिशी के सामने खड़े अरविंदर सिंह लवली ने अपने प्रचार का आधार यही बनाया है कि वे पूर्वी दिल्ली के बाशिंदे हैं। उनका कहना है कि पहली बार किसी पार्टी ने पूर्वी दिल्ली को वहां का रहनेवाला उम्मीदवार दिया है। इसलिए मतदाताओं के लिए उन्होंने अपना नारा भी ‘आपका लवली’ बनाया है। पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर भाजपा-कांग्रेस-‘आप’ की त्रिकोणीय लड़ाई में अगर अरविंदर सिंह लवली जीते, तब यह 40 साल बाद दिल्ली से किसी सिख के लोकसभा में पहुंचने का इतिहास बनेगा।

1980 में दक्षिण दिल्ली से चरणजीत सिंह कांग्रेस की टिकट पर सांसद चुने गए थे। चरणजीत सिंह ने तब जनता पार्टी के कद्दावर नेता रहे प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा को हराया था। राजनैतिक जानकार मानते हैं करीब 12-14 फीसद पंजाबी और सिख आबादी वाली दिल्ली में मौजूदा लोकसभा चुनाव में लवली ही एकमात्र सिख उम्मीदवार हैं। पूर्वी दिल्ली के स्थानीय निवासी होने के अलावा इलाके समेत पूरी दिल्ली की पकड़ लवली की दावेदारी को मजबूत करती है। दिल्ली के शिक्षा, राजस्व, शहरी विकास, ट्रांसपोर्ट व पर्यटन मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा चुके लवली चुनाव प्रचार में भी दिल्ली की राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी साबित हो रहे हैं।

पदयात्रा, जनसभा और जनसंपर्क में भीड़ और लोगों में उनसे मिलने का जज्बा काम आ रहा है। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही उनका राजनीति की तरफ रुझान हो गया था। वे भीमराव आंबेडकर कॉलज के अध्यक्ष के अलावा 1992-96 तक एनएसयूआइ के महासचिव भी रहे हैं। 1980 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले भी दिल्ली से कोई भी सिख उम्मीदवार संसद के निचले सदन, लोकसभा में नहीं पहुंचे थे। केंद्र में 1977 में बनी जनता पार्टी सरकार के गिरने के बाद नई संसद चुनने के लिए 1980 में लोकसभा चुनाव हुए थे।

उस चुनाव में कांग्रेस ने दक्षिण दिल्ली से अपने उम्मीदवार के रूप में चरणजीत सिंह को उतारा था। राजनीतिक हलकों में नया नाम होने के बावजूद चरणजीत सिंह तब जीत दर्ज कर संसद पहुंचे थे। हालांकि 1999 में सरदार मनमोहन सिंह ने दक्षिण दिल्ली सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। तब वे भाजपा के वीके मल्होत्रा से चुनाव हार गए थे। 2014 लोकसभा चुनाव में पश्चिमी दिल्ली सीट से आम आदमी पार्टी ने जरनैल सिंह को उम्मीदवार बनाया था। जरनैल सिंह भी चुनाव हार गए थे।

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