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गुजरात चुनाव 2017 एग्जिट पोल: BJP-कांग्रेस पर क्‍या होगा नतीजों का असर, जानिए

Gujarat Election Exit Poll 2017 Result, Gujarat Chunav Exit Poll 2017 Today: दूसरे चरण का मतदान खत्‍म होने के बाद गुरुवार शाम तक एग्जिट पोल के नतीजे आएंगे।

Gujarat Election Results 2017: गुजरात चुनाव में बीजेपी की प्रतिष्‍ठा दांव पर है।

गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 का एग्जिट पोल के नतीजे गुरुवार (14 दिसंबर) को आ रहे हैं। दूसरे चरण का मतदान खत्‍म होने के बाद एग्जिट पोल के आंकड़े जारी किए जाएंगे। चुनाव आयोग की ओर से नतीजों की घोषणा 18 दिसंबर को की जाएगी। उसी दिन हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजे भी आएंगे। एग्जिट पोल के जरिए यह अनुमान लगाने की कोशिश होगी कि राज्‍य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वोटर्स की पहली पसंद बने हुए हैं या नहीं। अगर नतीजे भाजपा के खिलाफ और कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो यह पार्टी के नए अध्‍यक्ष राहुल गांधी को भारत की चुनावी राजनीति में नए सितारे के रूप में पेश करेगा। गुजरात के नतीजों का असर बहुत हद तक 2019 के आम चुनाव पर भी पड़ने का अनुमान विशेषज्ञ लगा रहे हैं। राज्‍य में भाजपा की जीत पीएम मोदी और ताकत मुहैया कराएगी। केंद्र सरकार द्वारा सुधारों को और आक्रामकता से पेश किया जा सकता है। हार किसी बड़े झटके से कम नहीं होगी। गुजरात में बीजेपी की हार का मतलब पार्टी के चुनावी तंत्र का अस्‍त-व्‍यस्‍त होना होगा और फिर भाजपा को 2019 में जीत के लिए पूरी ताकत झोंकनी पड़ेगी।

वहीं कांग्रेस के लिए जीत पार्टी और राहुल गांधी के लिए संजीवनी का काम करेगी। कांग्रेस अध्‍यक्ष ने खुद चुनाव प्रचार की कमान संभाली और गुजरात के विभिन्‍न इलाकों में जनसंपर्क किया। कांग्रेस की तरफ से राहुल ही प्रचार का चेहरा रहे। उन्‍होंने आक्रामक अंदाज में प्रचार तो किया ही, ट्विटर पर उनकी सक्रियता और हाजिरजवाबी ने सोशल मीडिया पर कई समर्थक बटोरे। अगर गुजरात में कांग्रेस जीतती है तो राहुल विपक्ष का वह चेहरा बन सकते हैं जिसके सहारे मोदी को 2019 में हराने की तैयारी चल रही है। अभी एग्जिट पोल्‍स नहीं आए हैं मगर ओपिनियन पोल्‍स में भाजपा को जीत मिलती दिखाई गई है, मगर कांग्रेस उसे कड़ी टक्‍कर देती दिखी है।

गुजरात के नतीजों का असर संसद की कार्यवाही पर देखने को भी मिलेगा। अगर भाजपा गुजरात व हिमाचल प्रदेश में जीत दर्ज करती है तो राहुल गांधी को चुनाव के दौरान उठाए गए मुद्दों पर भाजपा को घेरना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन अगर कांग्रेस हिमाचल में हारने के बाद भी गुजरात में जीत दर्ज करती है तो, विपक्षी पार्टी ऐसे मुद्दे उठा सकती है, जो राजनीतिक तापमान बढ़ाएंगे। एक माह तक चलने वाला शीतकालीन सत्र प्राय: नवंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होता है और क्रिसमस से पहले समाप्त हो जाता है। इस वर्ष शीत सत्र 15 दिसंबर से पांच जनवरी तक चलेगा। क्रिसमस की वजह से 25 व 26 दिसंबर को छुट्टी रहेगी।

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