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कुछ सूबों में गठबंधन का खेल, कोई पास कोई फेल

Lok Sabha Chunav/Election Results 2019: सपा-बसपा ने एक झटके में कांग्रेस को किनारे खड़ा कर दिया और कांग्रेस ने भी बदले में पूरी ताकत से चुनाव मैदान में जोर लगा दिया।

Author May 24, 2019 4:16 AM
अखिलेश ने यूपी में मायावती की पार्टी से गठबंधन किया है। (फोटोः पीटीआई)

Election Results 2019: लोकसभा के इस चुनाव की मतगणना के बाद सामने आए रुझानों से यह स्पष्ट है कि जिस सियासी गठबंधन को चुनावी जीत का बहुत बड़ा हथियार माना जा रहा था, वह कहीं-कहीं पर तो वाकई बहुत कारगर साबित हुआ है लेकिन देश के कई हिस्सों में मुंह के बल गिरा भी है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार-झारखंड तक और कनार्टक से लेकर महाराष्टÑ तक इसके अलग-अलग परिणाम देखने को मिले। दक्षिण भारत में कांग्रेस के गठबंधन ने कमाल किया तो उत्तर भारत में जबरदस्त तरीके से नाकाम साबित हुआ।

उत्तर प्रदेश
इस आम चुनाव में देश के मतदाताओं के सामने स्पष्ट रूप से दो राष्टÑीय गठबंधन विकल्प के तौर पर मौजूद थे। एक ओर भाजपा की अगुआई वाला राष्टÑीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और दूसरी ओर कांग्रेस की अगुआई वाला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग)। लेकिन इस पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा जिस गठबंधन की चर्चा रही वह उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्टÑीय लोकदल (रालोद) का गठबंधन था। यही वह गठबंधन था जिसे लेकर कहा जा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाले राजग के विजय रथ को रोकने की असली कूवत इसमें ही है। लेकिन अब मतगणना से मिल रहे रूझानों से, जो लगभग परिणाम ही हैं, यह स्पष्ट है कि यह गठबंधन उत्तर प्रदेश में बुरी तरह फ्लॉप साबित हुआ। सपा-बसपा ने एक झटके में कांग्रेस को किनारे खड़ा कर दिया और कांग्रेस ने भी बदले में पूरी ताकत से चुनाव मैदान में जोर लगा दिया। परिणाम यह है कि यह गठबंधन देश के सबसे ज्यादा संसदीय सीटों वाले प्रदेश में वह कमाल नहीं कर पाया जैसे दावे उसे लेकर किए जा रहे थे।

बिहार
उत्तर प्रदेश की तरह ही पड़ोसी राज्य बिहार में भी चुनावी गठबंधन हुआ। भाजपा ने जनता दल (एकी) और लोकजनशक्ति पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा तो कांग्रेस ने राष्टÑीय जनता दल, रालोसपा, वीआइपी पार्टी, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, भाकपा माले आदि दलों का गठबंधन बनाया। दिलचस्प यह है कि जहां भाजपा की अगुआई वाले गठबंधन ने बिहार की लगभग तमाम सीटों पर कब्जा कर लिया, वहीं कांग्रेस-राजद गठबंधन औंधे मुंह गिर पड़ा।
लेकिन यह भी भूलने वाली बात नहीं है कि जहां भाजपा का गठबंधन बहुत ही आसानी से हुआ था, वहीं राजद-कांग्रेस व अन्य दलों के गठबंधन को लेकर एक महीने से अधिक दिनों तक हंगामा चलता रहा। झारखंड में भी कांग्रेस-झारखंड मुक्ति मोर्चा व अन्य दलों का गठबंधन वैसा कोई कमाल नहीं कर पाया जैसे कयास लगाए जा रहे थे।

महाराष्ट्र
उत्तर प्रदेश के बाद सीटों के लिहाज से दूसरे बड़े राज्य महाराष्टÑ में भाजपा-शिव सेना के गठबंधन ने तो पूरे सूबे में जीत का परचम लहरा दिया लेकिन कांग्रेस-राकांपा व कुछ अन्य दलों का गठबंधन बुरी तरह पिट गया।  ऐसी उम्मीद की गई थी कि वहां पर बराबरी की टक्कर होगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया। हालांकि सुदूर दक्षिण के लोगों ने कांग्रेस के गठबंधन को हाथों हाथ लिया। तमिलनाडु में द्रमुक के साथ कांग्रेस ने मिलकर बेहतरीन नतीजे हासिल किए जबकि केरल में भी कांग्रेस ने बेहतरीन चुनाव परिणाम पेश किए।

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