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राहुल गांधी ने सचिन पायलट की और अमित शाह ने वसुंधरा राजे की लिस्‍ट खारिज की

राजस्थान में टिकट वितरण के लिए केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व में आम राय कायम नहीं हो सकी है। फिर बात चाहें सत्ता पक्ष की हो या फिर विपक्ष की।

राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे के साथ कांग्रेस नेता सचिन पायलट। Express Photo by Rohit Jain Paras.

साल 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले तीन बड़े हिंदी भाषी राज्यों मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा के चुनाव होने हैं। राजस्थान में टिकट वितरण के लिए केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व में आम राय कायम नहीं हो सकी है। फिर बात चाहें सत्ता पक्ष की हो या फिर विपक्ष की। पार्टियों में प्रदेश नेतृत्व की कोशिश है कि अपने करीबियों को ही टिकट दिलवाए जाएं जबकि केंद्रीय नेतृत्व किसी भी नेता को पार्टी से बड़ा नहीं होने देना चाहता है।

बताया जाता है कि राजस्थान में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने 150 सीटों पर अपने पसंदीदा उम्मीदवारों की लिस्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी थी। लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस लिस्ट में लिखे नामों को नकार दिया। कारण ये बताया गया कि इस लिस्ट में हर विधानसभा सीट के लिए सिर्फ एक ही उम्मीदवार का नाम दिया गया था। जबकि कांग्रेस आलाकमान का ये आदेश था कि लिस्ट में हर सीट के लिए कम से कम तीन उम्मीदवारों के नाम हों। बताया जा रहा है कि इस लिस्ट में सचिन पायलट ने सिर्फ अपने वफादार और भरोसेमंद नेताओं को ही शामिल किया था। ताकि विधानसभा चुनाव ​जीतने की स्थिति में सीएम के पद के लिए दावेदारी पुख्ता की जा सके।

वहीं भाजपा में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सामने 60 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की प्रस्तावित लिस्ट रखी थी। बताया जाता है कि इस लिस्ट में सभी नाम सीएम वसुंधरा राजे के प्रति समर्पित रहने वाले नेताओं के ​ही थे। वसुंधरा राजे ने ये लिस्ट पार्टी की चुनावी बैठक के दौरान रखा था। अमित शाह ने भी इस लिस्ट को वहीं खारिज कर दिया।

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कोर कमिटी से दोबारा लिस्ट बनाने के लिए कहा है। अमित शाह का जोर इस बात पर भी है कि टिकट पार्टी के उन जमीनी कार्यकर्ताओं को मिले, जिनका जनाधार भी अच्छा हो। बता दें कि इस कोर कमिटी में ज्यादातर नेता सीएम वसुंधरा राजे के विरोधी खेमे से आते हैं। वहीं भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी पांच सालों तक सीएम वसुंधरा राजे की हठ को सहा है। राजे ने प्रदेश अध्यक्ष से लेकर हर महत्वपूर्ण पद पर उस शख्स को काबिज करवाया जो पार्टी से पहले उनका वफादार था। शाह की कोशिश है कि अब प्रदेश में नेताओं को पार्टी से बड़ा बनने से रोका जाए।

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