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Chhattisgarh Elections: जानें किस पार्टी में ज्यादा हावी रहा परिवारवाद, बीजेपी-कांग्रेस दोनों ने दिए टिकट

राजनीति में परिवारवाद का हमेशा से ही बोलबाला रहा है। इस बार पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में कई पूर्व सांसद, मंत्री और विधायकों के बेटे, बेटी, बहू और पत्नियों को राजनीतिक पार्टियों के द्वारा टिकट दिए गए हैं.

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

राजनीति में परिवारवाद का हमेशा से ही बोलबाला रहा है। कई बार इस मुद्दे पर बहस भी हो चुकी है। कई लोग परिवारवाद के समर्थन में कहते हैं कि जब डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बन सकता है तो नेता का बेटा नेता क्यों नहीं बन सकता? इस बार पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में कई पूर्व सांसद, मंत्री और विधायकों के बेटे, बेटी, बहू और पत्नियों को राजनीतिक पार्टियों के द्वारा टिकट दिए गए हैं. मध्य प्रदेश और राजस्थान की बात करें तो इन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के मुकाबले परिवारवाद को बढ़ावा देते हुए कई मौजूदा नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिया है। वहीं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने बीजेपी के मुकाबले सबसे ज्यादा पूर्व नेताओं के बेटे, बेटियों को टिकट दिया है।

छत्तीसगढ़ – 9 विधायक ऐसे हैं जिनके परिवार पहले से ही राजनीति में सक्रिय हैं-

छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा सीटें हैं। राज्य में 15 सालों से रमन सिंह की सरकार है। मौजूदा स्थिति की बात करें तो राज्य में भाजपा के 49 विधायक हैं जिनमें से तीन ऐसे विधायक हैं जिनके परिवार के लोग पहले से ही राजनीति में सक्रिय हैं। वहीं कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस के 39 विधायकों में से 6 विधायक ऐसे घरों से आते हैं जिनके माता या पिता पहले से ही सांसद या विधायक हैं।

क्या कहते हैं आंकड़े-

छत्तीसगढ़ विधानसभा की कुल सीट : 90
बीजेपी विधायक – 49, वंशवाद – 3
कांग्रेस विधायक – 39, वंशवाद – 6

भाजपा के तीन विधायकों का क्या है परिवारवाद कनेक्शन ?

युद्धवीर सिंह जूदेव की उम्र 36 साल है। युद्धवीर चंद्रपुर से विधायक हैं। युद्धवीर दिवंगत सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे दिलीप सिंह जूदेव के बेटे हैं। इस बार उनकी पत्नी संयोगिता सिंह चंद्रपुर से चुनावी मैदान में हैं। जब राजनीति में परिवार को बढ़ावा देने को लेकर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।

केदार कश्यप की उम्र 45 साल है। केदार नारायणपुर से विधायक हैं। केदार दिवंगत सांसद और विधायक बलीराम कश्यप के बेटे हैं। केदार नारायणपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। वंशवाद मामले पर जब उनसे बातचीत करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।

अमर अग्रवाल की उम्र 55 साल है। वो विलासपुर से विधायक और राज्य में मंत्री भी हैं। अमर अग्रवाल के पिता पूर्व राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। अमर इस बार बिलासपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। जब परिवारवाद को लेकर उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने इस पूरे मामले पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया।

परिवारवाद को लेकर क्या बोले कांग्रेसी नेता-

उमेश पटेल खरसिया से विधायक हैं। उनके पिता कांग्रेस की सरकार के समय मंत्री थे। उमेश पटेल खरसिया से चुनाव लड़ रहे हैं। जब परिवारवाद पर उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, अगर डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है तो क्या आप उसे वंशवाद से जोड़ते हो.. मैं चुनाव लड़ा हूं और एक लाख 80 हजार लोगों का प्रतिनिधित्व करता हूं।

रेणु जोगी 66 साल की हैं। वो कोटा से विधायक हैं। रेणु पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पत्नी हैं। जिन्होंने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ नाम से नई पार्टी का गठन किया है। वो कोटा से जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के टिकट से चुनाव लड़ रही हैं। इस मामले पर बात करने के लिए उनसे संपर्क किया गया था लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

देवती कर्मा दंतेवाड़ा से विधायक हैं। वो महेंद्र कर्मा की पत्नी हैं। जो कांग्रेस की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वो दंतेवाड़ा से चुनाव लड़ रही हैं।

टी एस सिंहदेव सरगुजा से विधायक हैं और विपक्ष के नेता हैं। टी एस सिंहदेव देवेंद्र कुमारी के बेटे हैं। देवेंद्र कुमारी पूर्व मंत्री रह चुकी हैं। टी.एस सिंहदेव का कहना है कि ‘अगर आप लोगों के वादों पर खरा नहीं उतरेंगे तो आपका करियर कोई नहीं बना सकता है.’ टी.एस सिंहदेव सरगुजा से चुनाव लड़ रहे हैं।

अरुण वोरा दुर्ग से विधायक हैं। उनके पिता मोती लाल वोरा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। अरुण ने भी परिवारवाद के मुद्दे पर कुछ नहीं कहा। अरुण दुर्ग से चुनाव लड़ रहे हैं।

अमित जोगी मरवाही से विधायक हैं। उन्हें कांग्रेस पार्टी से साल 2017 में निकाल दिया गया था। अमित JCC के मेंबर हैं। जब उनसे परिवारवाद को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में नामदार तभी अपने आपको कायम रख सकता है जब वो अपने आपको साबित कर सके.. अगर ऐसा नहीं होता है तो उन्हें कूड़े में फेंक दिया जाएगा।’

 

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