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छत्तीसगढ़ चुनाव में नीतीश कुमार की नीति बढ़ा सकती है भाजपा की परेशानी

छत्तीसगढ़ में पिछले 15 सालों से रमन सिंह की सरकार है। चौथी बार सरकार बनाने के लिए भाजपा जोर लगाए हुई है। वहीं कांग्रेस भी सत्ता में वापसी के लिए हाथ पैर मार रही है।

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पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनावों में सबसे पहले छत्तीसगढ़ में दो चरणों में 12 और 20 नवंबर को चुनाव होने हैं। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपना जोर लगा दिया है। राज्य में भाजपा 15 सालों से सत्ता पर काबिज है लेकिन बिहार की सत्ताधारी और एनडीए की सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) भाजपा के मंसूबों पर पानी फेरना चाह रही है। दरअसल, पार्टी अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐसी नीति बनाई है जिससे भाजपा को बड़ा नुकसान हो सकता है। छत्तीसगढ़ की सभी 90 सीटों पर जेडीयू ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया है लेकिन वो उम्मीदवारों को उतारने के मामले में बड़े राजनीतिक दलों (कांग्रेस और भाजपा) के बागियों खासकर सत्ताधारी भाजपा के बागियों पर नजरें गड़ाई हुई है। अगर नीतीश भाजपा के बागियों को टिकट देते हैं तो इससे भाजपा को बड़ा नुकसान हो सकता है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में भाजपा हरेक विधान सभा चुनाव में करीब 40 से 50 फीसदी सीटिंग विधायकों का टिकट काटती रही है और उनकी जगह नए चेहरों को तरजीह देती रही है। भाजपा का यह गुजरात मॉडल छत्तीसगढ़ में तीन बार सरकार बनवा चुका है लेकिन इसी मॉडल को नीतीश कुमार की पार्टी ने अपना हथियार बना लिया है। जेडीयू बिहार की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी शराबबंदी, जल, जंगल और जमीन के सहारे सियासी जमीन तलाशने की फिराक में है। पार्टी सूत्रों ने बताया है कि कांग्रेस और भाजपा द्वारा टिकट बंटवारे के फौरन बाद जेडीयू अपने उम्मीदवारों का ऐलान करेगी। बिहार में जेडीयू और भाजपा की मिलीजुली सरकार है।

छत्तीसगढ़ में पिछले 15 सालों से रमन सिंह की सरकार है। चौथी बार सरकार बनाने के लिए भाजपा जोर लगाए हुई है। वहीं कांग्रेस भी सत्ता में वापसी के लिए हाथ पैर मार रही है। उधर, राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने बसपा सुप्रीमो मायावती से हाथ मिला लिया है। उनकी पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ भी राज्य में सरकार बनाने के सपने देख रही है। इस आदिवासी बहुल राज्य में इस बार मुकाबला त्रिकोणात्मक है। भाजपा ने साल 2003 के चुनाव में 51 नए चेहरों को उतारा था, इनमें से 28 जीतकर विधान सभा पहुंचे थे। 2008 में भी भाजपा ने 50 सीटिंग में से 20 विधायकों का टिकट काटते हुए कुल 44 नए चेहरों को उतारा था। इनमें से 23 जीतकर सदन पहुंचने में कामयाबर रहे थे। 2013 में भी भाजपा ने 14 सीटिंग विधायकों का टिकट काटते हुए 36 नए चेहरों पर दांव खेला था इनमें 20 जीतकर आए थे। ऐसे में जेडीयू की नजर इन बागियों पर टिकी है, जिनका टिकट पार्टी काट सकती है।

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